Mango Export to Maldives: भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की पहल पर कर्नाटक के नीलम (Neelum) और तोतापुरी (Totapuri) आमों की पहली हवाई खेप मालदीव भेजी गई है। इस पहल से किसान उत्पादक कंपनी (FPC) से जुड़े किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में 50 फीसदी से अधिक कीमत मिली है। यह कदम भारतीय आमों की वैश्विक पहचान मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और निर्यात आधारित खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहली बार एयर कार्गो से मालदीव भेजे गए कर्नाटक के आम
Maldives to relish Karnataka's finest mangoes! 🥭
Kudos to @APEDADOC for facilitating the first-ever air shipment of Neelam and Totapuri mangoes from Karnataka to the Maldives.
This milestone unlocks new opportunities for Karnataka's mango growers, encouraging greater… pic.twitter.com/CUBBHx7hHj
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) July 30, 2026 30 जुलाई को कर्नाटक से एक मीट्रिक टन नीलम और तोतापुरी आमों की पहली एयर शिपमेंट मालदीव के लिए रवाना की गई। यह पहल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले APEDA के सहयोग से पूरी हुई।
इस शिपमेंट का उद्देश्य कर्नाटक की लेट-सीजन आम किस्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाना और भारत के आम निर्यात को नई ऊंचाई देना है। एयर फ्रेट के जरिए भेजे जाने से ताजगी और गुणवत्ता भी बरकरार रहती है, जिससे विदेशी बाजारों में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों को मिला 50% से ज्यादा फायदा
पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस निर्यात पहल का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला। किसान उत्पादक कंपनी (FPC) से जुड़े किसानों से आमों की सीधी खरीद (Direct Procurement) की गई, जिससे उन्हें स्थानीय कृषि मंडियों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक रिटर्न प्राप्त हुआ।
इस मॉडल से किसानों को कई फायदे मिले—
- स्थानीय मंडियों पर निर्भरता कम हुई।
- बेहतर और प्रीमियम कीमत मिली।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच बनी।
- निर्यात योग्य गुणवत्ता वाली खेती के लिए प्रोत्साहन मिला।
- किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नया अवसर तैयार हुआ।
महिला उद्यमी ने संभाली निर्यात की जिम्मेदारी
इस शिपमेंट में शामिल एक मीट्रिक टन आम कर्नाटक के कोलार जिले के केजीएफ (KGF) तालुक स्थित मैसर्स प्रकृतिमाया फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़े किसानों से खरीदे गए।
इनका निर्यात मैसर्स अहल्या देवी वेंचर्स की निदेशक अश्विनी ए. ने किया। वे हाल ही में पंजीकृत महिला उद्यमी और निर्यातक हैं। यह पहल महिला उद्यमिता और कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी एक सकारात्मक उदाहरण मानी जा रही है।
नीलम और तोतापुरी आम क्यों हैं खास?
नीलम आम की विशेषताएं
- बेहद मीठा और रसीला गूदा
- आकर्षक सुगंध
- स्मूदी, जूस, डेजर्ट और ड्रिंक्स के लिए लोकप्रिय
- घरेलू और विदेशी बाजार में अच्छी मांग
तोतापुरी आम की खासियत
- विशिष्ट लंबा आकार
- हल्का मीठा और खट्टा स्वाद
- ताजा खाने के साथ प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी उपयोग
- पल्प, जूस और फूड प्रोडक्ट्स में व्यापक इस्तेमाल
लेट-सीजन आमों से बढ़ेगा भारत का निर्यात
नीलम और तोतापुरी दोनों ही लेट-सीजन किस्में हैं, जिनकी तुड़ाई जून के अंत से लेकर जुलाई के आखिर तक होती है। इससे भारत का आम निर्यात सीजन लंबा हो सकता है और पीक सीजन खत्म होने के बाद भी विदेशी बाजारों में मांग पूरी की जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय आमों की वैश्विक उपलब्धता बढ़ेगी और निर्यातकों को नए बाजारों में अवसर मिलेंगे।
कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र को मिलेगा नया बाजार
यह एयर शिपमेंट कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता का संकेत है। इससे राज्य के किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान उत्पादक कंपनियां (FPC), कृषि स्टार्टअप और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी प्रीमियम उपज बेचने का नया अवसर मिलेगा।
यदि इसी मॉडल को अन्य राज्यों और फलों पर भी लागू किया जाता है, तो भारत के कृषि निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
- पहली बार कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आम एयर शिपमेंट से मालदीव पहुंचे।
- किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में 50% से अधिक कीमत मिली।
- डायरेक्ट प्रोक्योरमेंट मॉडल से बिचौलियों की भूमिका घटी।
- महिला उद्यमी की भागीदारी ने कृषि निर्यात को नई दिशा दी।
- भारत के आम निर्यात सीजन को बढ़ाने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोलने में मदद मिलेगी।


