Share Market Today: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद बाजार ने शानदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में 200 से ज्यादा अंक टूटने वाला Sensex निचले स्तर से 450 अंकों से अधिक रिकवर हो गया, जबकि Nifty 50 भी 24,200 के नीचे फिसलने के बाद दोबारा 24,300 के ऊपर पहुंच गया।
हालांकि, बाजार की यह रिकवरी फिलहाल बड़े शेयरों तक सीमित रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी दबाव बना हुआ है, जिससे व्यापक बाजार (Broad Market) में कमजोरी देखने को मिली।
शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में जबरदस्त रिकवरी
बुधवार, 29 जुलाई को सेंसेक्स 888.68 अंकों की बढ़त के साथ 77,654.60 पर और निफ्टी 264.85 अंकों की तेजी के साथ 24,250.20 पर बंद हुआ था। लेकिन गुरुवार को वैश्विक तनाव के चलते दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले।
दोपहर 12:37 बजे तक:
- Sensex: 203.81 अंक (0.26%) की बढ़त के साथ 77,858.41
- Nifty 50: 62.30 अंक (0.26%) की तेजी के साथ 24,312.50
इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स 77,440.91 तक गिरा था, लेकिन वहां से करीब 460 अंकों की रिकवरी करते हुए 77,900.73 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 24,187.10 तक फिसलने के बाद लगभग 144 अंकों की वापसी कर 24,331.40 तक पहुंच गया।
क्यों लौटा बाजार? जानिए 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिकी फेड ने ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं
अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने लगातार पांचवीं मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया। यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और भारतीय बाजार को भी सपोर्ट मिला।
2. IT Stocks में जोरदार खरीदारी
गुरुवार के कारोबार में सबसे मजबूत प्रदर्शन आईटी सेक्टर का रहा। Nifty IT Index करीब 1.5% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई से जुड़े वैश्विक शेयरों में हालिया कमजोरी के बाद निवेशकों का रुझान फिर से आईटी सर्विस कंपनियों की ओर बढ़ा है। यही वजह रही कि आईटी शेयरों ने पूरे बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई।
दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण कोरिया का Kospi Index, जिसे वैश्विक चिप और एआई सेक्टर का अहम संकेतक माना जाता है, जून के मध्य के उच्च स्तर से 30% से अधिक नीचे आ चुका है। ऐसे में निवेशकों का फोकस आईटी सर्विसेज कंपनियों की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है।
3. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद तेल आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई। ऑयल टैंकरों की आवाजाही जारी रहने से सप्लाई बनी रही और ब्रेंट क्रूड करीब 1% टूटकर 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया।
भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए तेल की कीमतों में नरमी सकारात्मक मानी जाती है। इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है।
4. बड़े शेयरों में खरीदारी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप कमजोर
बाजार में रिकवरी मुख्य रूप से लार्जकैप शेयरों की वजह से देखने को मिली। वहीं Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स दबाव में रहे। इसका मतलब है कि निवेशकों की खरीदारी फिलहाल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित है और व्यापक बाजार में अभी भी सतर्कता बनी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार की रिकवरी यह दिखाती है कि मजबूत वैश्विक संकेत मिलने पर निवेशक बड़े शेयरों में तेजी से खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की चाल और कच्चे तेल की कीमतें आगे भी बाजार की दिशा तय करेंगी।
यदि आईटी सेक्टर में यह मजबूती बनी रहती है और वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं, तो निफ्टी 24,300 के ऊपर टिकने की कोशिश कर सकता है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में स्थिरता आने के बाद ही व्यापक बाजार में मजबूती की पुष्टि मानी जाएगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


