नई दिल्ली: अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल की वेदांता समूह की कंपनी वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड (VAML) ने अपनी रिन्यूएबल एनर्जी रणनीति में बड़ा अपडेट दिया है। कंपनी ने सेरेंटिका रिन्यूएबल इंडिया 9 प्राइवेट लिमिटेड (SRI9PL) के साथ हुए पावर डिलीवरी एग्रीमेंट (PDA) में संशोधन करते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की क्षमता और उससे मिलने वाली ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है।
कंपनी के मुताबिक, यह बैटरी स्टोरेज सिस्टम उसके मौजूदा 600 मेगावाट (MW) के सोलर पावर प्रोजेक्ट के साथ एकीकृत किया जाएगा। इससे सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक स्थिर होगी और कंपनी को 90% से 95% तक सुनिश्चित बिजली आपूर्ति (Assured Supply) मिल सकेगी।
Highlights
- वेदांता एल्युमीनियम ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट में अहम संशोधन किया।
- 600 MW सोलर प्रोजेक्ट के साथ BESS सिस्टम जोड़ा जाएगा।
- बैटरी स्टोरेज क्षमता 142.5-150 MW के बीच होगी।
- कंपनी को 90-95% तक सुनिश्चित ऊर्जा आपूर्ति मिलेगी।
- संशोधित जानकारी BSE और NSE को भेजी गई।
क्या है पूरा मामला?
वेदांता एल्युमीनियम ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि 30 जुलाई 2026 को दाखिल की गई फाइलिंग में कुछ आंकड़ों से जुड़ी अनजानी त्रुटियां रह गई थीं। कंपनी ने अब संशोधित जानकारी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि उसके 600 मेगावाट सोलर पावर डिलीवरी एग्रीमेंट में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को भी शामिल किया जाएगा।
कंपनी का कहना है कि यह संशोधन केवल सूचना को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
कितनी होगी बैटरी स्टोरेज क्षमता?
संशोधित समझौते के अनुसार, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की क्षमता 142.5 मेगावाट से 150 मेगावाट के बीच होगी।
यह स्टोरेज सिस्टम सौर ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव के दौरान भी बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगा, जिससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनेगी।
90-95% तक मिलेगी सुनिश्चित बिजली आपूर्ति
कंपनी के अनुसार, BESS के एकीकरण के बाद उसे 90% से 95% तक Assured Power Supply मिलेगी। इसका मतलब है कि मौसम या सूर्य की उपलब्धता में बदलाव के बावजूद बिजली की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना आसान होगा।
यह कदम न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि कंपनी के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मौजूदा 600 MW सोलर प्रोजेक्ट से होगा एकीकरण
वेदांता एल्युमीनियम ने साफ किया है कि बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए अलग परियोजना विकसित नहीं की जाएगी। इसे कंपनी के पहले से संचालित 600 मेगावाट सोलर पावर प्रोजेक्ट के साथ जोड़ा जाएगा।
इससे सौर ऊर्जा के उत्पादन में आने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सकेगा और उद्योगों को लगातार बिजली उपलब्ध कराना आसान होगा।
निवेशकों के लिए क्या कहा कंपनी ने?
कंपनी ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि पहले जारी सूचना में हुई त्रुटि के लिए उसे खेद है। संशोधित विवरण SEBI के प्रकटीकरण और पारदर्शिता संबंधी नियमों का पालन करते हुए जारी किया गया है ताकि निवेशकों को सही और अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
भारत में क्यों बढ़ रही है BESS की अहमियत?
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) में महत्वपूर्ण तकनीक माना जा रहा है। जैसे-जैसे देश में सौर और पवन ऊर्जा का हिस्सा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता भी बढ़ रही है। BESS की मदद से अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जा सकता है, जिससे ग्रिड की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा दोनों मजबूत होती हैं।


