Stock Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 917 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 263 अंक तक फिसल गया। इसके अलावा इंफोसिस के कमजोर आउटलुक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, एशियाई बाजारों की कमजोरी और बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ाता है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई देता है।
शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 75,708.19 के स्तर पर लाल निशान में खुला। इसके बाद बिकवाली तेज हुई और यह 75,474.43 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 917 अंक नीचे था।
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 23,666.35 पर खुला और गिरकर 23,606.30 के निचले स्तर तक पहुंच गया। लगातार पांच दिनों से जारी गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी ला दी।
गुरुवार को भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 363.66 अंक (0.47%) टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 126.65 अंक (0.53%) गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ था।
Stock Market Crash के 6 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
शेयर बाजार में सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का रहा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से—
- आयात बिल बढ़ता है।
- महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
- रुपये पर दबाव आता है।
- कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।
इन आशंकाओं के चलते निवेशकों ने बाजार में बिकवाली की।
2. इंफोसिस के शेयरों में तेज गिरावट
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Infosys के शेयरों में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए—
- शुद्ध लाभ 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़
- राजस्व 14% बढ़कर ₹48,211 करोड़
इसके बावजूद कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के Revenue Guidance की ऊपरी सीमा घटाकर 3% कर दी। इस फैसले के बाद निवेशकों ने शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
आईटी सेक्टर की कमजोरी का असर पूरे बाजार पर देखने को मिला।
3. विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
गुरुवार को भी FII ने लगभग ₹2,999.23 करोड़ के शेयर बेचे।
लगातार विदेशी बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी कम होती है और निवेशकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।
4. एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
भारतीय बाजार पर वैश्विक कमजोरी का भी असर पड़ा।
शुक्रवार को प्रमुख एशियाई बाजार लाल निशान में कारोबार करते दिखे—
- दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 5.56% टूटा।
- जापान का Nikkei 225 गिरावट में रहा।
- चीन का SSE Composite भी कमजोर रहा।
- हांगकांग का Hang Seng Index लाल निशान में कारोबार करता दिखा।
अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई।
5. इंडिया VIX में 9% की जोरदार छलांग
बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX लगभग 9% बढ़कर 14.68 पर पहुंच गया।
India VIX में तेजी का मतलब है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाना पसंद करते हैं, जिससे बिकवाली और तेज हो जाती है।
6. बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताएं
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और उसके हूथी समर्थकों के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हुए हमलों ने वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
इन घटनाओं से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और वैश्विक निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी।
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा?
तेल महंगा होने का सबसे अधिक असर उन सेक्टरों पर दिखाई दिया जिनकी लागत सीधे ईंधन पर निर्भर करती है।
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (BPCL, HPCL, Indian Oil) करीब 2% तक फिसलीं।
- पेंट कंपनियों में लगभग 1% की गिरावट रही।
- टायर कंपनियां 2% तक टूटीं।
- एयरलाइन शेयर जैसे स्पाइसजेट और इंडिगो में 3% तक की कमजोरी देखी गई।
- आईटी सेक्टर में इंफोसिस की गिरावट के कारण दबाव बना रहा।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी और पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होगा, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे समय में घबराकर निवेश बेचने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाना बेहतर माना जाता है। निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं देता।


