भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 जुलाई को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। ग्लोबल संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की सतर्क रणनीति के चलते बाजार पर दबाव बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली हावी रही।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। तकनीकी चार्ट भी निकट भविष्य में कमजोरी के संकेत दे रहे हैं। ऐसे में 24 जुलाई के कारोबार में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम रेजिस्टेंस और 23,600 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।
लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार
गुरुवार के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 363.66 अंक (0.47%) टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 126.65 अंक (0.53%) गिरकर 23,869.60 पर आ गया और 23,900 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
मार्केट ब्रेड्थ भी कमजोर रही। पूरे सत्र में:
- 1,569 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई।
- 2,479 शेयरों में गिरावट आई।
- 155 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए।
यह आंकड़े बताते हैं कि बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
निफ्टी 50 में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे:
- अदाणी एंटरप्राइजेज
- श्रीराम फाइनेंस
- नेस्ले इंडिया
- अदाणी पोर्ट्स
- बजाज फाइनेंस
वहीं मजबूती दिखाने वाले प्रमुख शेयर रहे:
- बजाज ऑटो
- एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M)
- टीसीएस
- आयशर मोटर्स
ऑटो सेक्टर में बेहतर तिमाही नतीजों का असर शेयरों की मजबूती के रूप में दिखाई दिया।
सेक्टरवार प्रदर्शन कैसा रहा?
गुरुवार के कारोबार में अधिकांश सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में रही, जिसमें लगभग 1.8% की कमजोरी दर्ज की गई।
इसके अलावा:
- निफ्टी ऑयल एंड गैस: लगभग 1% गिरावट
- निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर: लगभग 1% गिरावट
- निफ्टी पीएसयू बैंक: लगभग 1% गिरावट
- निफ्टी एनर्जी: लगभग 1% गिरावट
- निफ्टी मेटल: 0.7% गिरावट
- निफ्टी फार्मा: 0.4% गिरावट
- निफ्टी एफएमसीजी: 0.4% गिरावट
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: 0.4% गिरावट
हालांकि कुछ सेक्टरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की।
- निफ्टी ऑटो: 0.7% की बढ़त
- निफ्टी मीडिया: 0.22% की बढ़त
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1-1 प्रतिशत टूटकर बंद हुए।
बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के अनुसार, ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की आशंका जता रही हैं।
ऊंचे कच्चे तेल के दाम कई तरह की चुनौतियां पैदा करते हैं:
- महंगाई बढ़ने का जोखिम
- कंपनियों के मुनाफे पर दबाव
- ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की संभावना
- उभरते बाजारों से विदेशी निवेश का निकलना
उन्होंने कहा कि हालिया मैक्रो-इकोनॉमिक संकेत भी बताते हैं कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। थोक महंगाई और बिजनेस एक्टिविटी के आंकड़े भी इस ओर इशारा कर रहे हैं।
निवेशकों को क्यों बरतनी चाहिए सावधानी?
इक्विरस वेल्थ के एमडी और बिजनेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में कमजोरी का सिलसिला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
उनके मुताबिक:
- अमेरिका और यूरोप से मिले कमजोर आर्थिक संकेत निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक है।
- डॉलर की मजबूती निवेशकों को सुरक्षित एसेट्स की ओर आकर्षित कर रही है।
- विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता फिलहाल कम हुई है।
हालांकि उनका मानना है कि बाजार तकनीकी रूप से ‘ओवरसोल्ड’ जोन में दिखाई दे रहा है, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
24 जुलाई के लिए क्या कहता है टेक्निकल चार्ट?
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के अनुसार, निफ्टी ने डेली चार्ट पर अपवर्ड कंसोलिडेशन का महत्वपूर्ण स्तर तोड़ दिया है, जो बाजार में बढ़ती कमजोरी का संकेत है।
उन्होंने कहा कि:
- निफ्टी प्रमुख शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है।
- RSI इंडिकेटर बेयरिश क्रॉसओवर में है।
- तकनीकी संकेत फिलहाल कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।
24 जुलाई के लिए अहम स्तर
| स्तर | महत्व |
|---|---|
| 24,000 | मजबूत रेजिस्टेंस |
| 23,600 | पहला प्रमुख सपोर्ट |
| 23,500 से नीचे | बिकवाली और तेज होने की आशंका |
यदि निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकने में सफल नहीं होता है तो अगले कुछ सत्रों तक बाजार में दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा माहौल में आक्रामक निवेश की बजाय संतुलित रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।
- मजबूत तिमाही नतीजों वाली कंपनियों पर नजर रखें।
- गुणवत्ता वाले लार्जकैप शेयरों में चरणबद्ध निवेश करें।
- अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले शेयरों में जल्दबाजी से बचें।
- स्टॉप लॉस का पालन करें।
- लंबी अवधि के निवेशक गिरावट का उपयोग धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती के दबाव में दिखाई दे रहा है। तकनीकी संकेत भी निकट अवधि में कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में 24 जुलाई का कारोबार काफी अहम रहेगा, जहां निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बड़ी चुनौती होगा, जबकि 23,600 के आसपास मजबूत सपोर्ट देखने को मिल सकता है। जब तक बाजार स्पष्ट दिशा नहीं पकड़ता, तब तक निवेशकों के लिए सतर्क और चयनात्मक निवेश रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। NewsJagran किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


