Videocon Insolvency Case: कभी भारत की सबसे बड़ी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में शामिल रही वीडियोकॉन (Videocon) का दिवालिया मामला एक बार फिर चर्चा में है। करीब ₹90,000 करोड़ के कर्ज में डूबी कंपनी की दिवाला प्रक्रिया पिछले 8 साल से अधिक समय से अटकी हुई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के संस्थापक वेणुगोपाल धूत की याचिका स्वीकार कर ली है और अगली सुनवाई 10 अगस्त को तय की है।
दिलचस्प बात यह है कि जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) वीडियोकॉन के बाद दिवालिया प्रक्रिया में गई थी, लेकिन उसका अधिग्रहण पहले ही हो चुका है। वहीं, वीडियोकॉन आज भी अपने नए खरीदार का इंतजार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने वेणुगोपाल धूत की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
धूत ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें Videocon Industries Limited (VIL) और Videocon Oil Ventures Limited (VOVL) की दिवाला प्रक्रिया अलग-अलग चलाने को सही ठहराया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि दोनों कंपनियों की Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) एक साथ चलेगी या अलग-अलग।
आखिर पूरा विवाद क्या है?
इस विवाद की शुरुआत फरवरी 2020 में हुई थी।
वेणुगोपाल धूत ने मांग की थी कि Videocon Oil Ventures Ltd. और उसकी विदेशी तेल एवं गैस संपत्तियों को Videocon Industries Ltd. की दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि पूरे समूह का समाधान एक साथ हो सके।
पहले NCLT ने दी थी मंजूरी
मुंबई स्थित NCLT ने धूत की इस मांग को स्वीकार करते हुए दोनों कंपनियों की संपत्तियों को एक साथ शामिल करने का निर्देश दिया था।
लेकिन इसके बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस आदेश को चुनौती दी।
बैंकों की क्या दलील थी?
लेंडर्स का कहना था कि:
- दोनों कंपनियों का कारोबार अलग-अलग है।
- एक कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार से जुड़ी है, जबकि दूसरी तेल एवं गैस क्षेत्र में काम करती है।
- इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग समाधान (Resolution Plan) बेहतर रहेगा।
बैंकों की दलीलों के बाद मामला NCLAT पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल ने NCLT के पहले वाले आदेश को रद्द कर दिया और अलग-अलग दिवाला प्रक्रिया को सही माना।
अब इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
2018 से अटका हुआ है Videocon का मामला
Videocon Industries के खिलाफ 2018 में कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हुई थी।
कंपनी और उसकी ग्रुप कंपनियों पर करीब ₹90,000 करोड़ का बकाया कर्ज है, जो भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े डिफॉल्ट मामलों में शामिल है।
कंपनी के कई कारोबार आपस में जुड़े होने के कारण NCLT ने पहले Videocon Industries सहित 13 समूह कंपनियों की दिवाला प्रक्रिया को एक साथ चलाने का आदेश दिया था।
Twin Star का रिजॉल्यूशन प्लान क्यों रद्द हुआ?
वीडियोकॉन के लिए Twin Star Technologies (वेदांता समूह से जुड़ी कंपनी) ने रिजॉल्यूशन प्लान पेश किया था।
इस प्लान के तहत:
- कुल स्वीकार किए गए दावे: लगभग ₹90,000 करोड़
- ऑफर की गई राशि: करीब ₹2,962 करोड़
इतने बड़े Haircut (कर्ज में भारी कटौती) को लेकर कई बैंकों और लेनदारों ने विरोध किया।
इसके अलावा लिक्विडेशन वैल्यू से जुड़ी गोपनीय जानकारी के उल्लंघन को लेकर भी सवाल उठाए गए। इसके बाद NCLAT ने Twin Star के रिजॉल्यूशन प्लान को रद्द कर दिया।
JP Associates बिक गई, लेकिन Videocon अब भी इंतजार में
हाल के महीनों में JP Associates की दिवाला प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कंपनी को नया खरीदार मिल गया।
इसके विपरीत Videocon का मामला लगातार कानूनी विवादों में फंसा हुआ है। मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि कंपनी की विदेशी तेल एवं गैस संपत्तियों और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार का समाधान एक साथ किया जाए या अलग-अलग।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले से ही यह स्पष्ट होगा कि Videocon की दिवाला प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी और क्या वर्षों से अटका यह मामला आखिरकार अपने समाधान तक पहुंच पाएगा।
क्या होगा आगे?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने वेणुगोपाल धूत की याचिका स्वीकार कर ली है और सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। इस सुनवाई पर बैंक, लेनदार, संभावित निवेशक और दिवाला प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर Videocon के अंतिम समाधान और कर्ज वसूली की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।


