Air India Phuket-Delhi Flight Case: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान से जुड़ी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में कुछ ही सेकंड के भीतर दबाव कम होने की चेतावनी मिली। इसके बाद ऑटोपायलट भी बंद हो गया। घटना के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव आया और कई यात्री घायल हुए।
हवाई यात्रा को आम तौर पर परिवहन के सबसे सुरक्षित साधनों में गिना जाता है। यही वजह है कि विमान में सफर करने वाले यात्रियों को तकनीकी सिस्टम, पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सहित पूरी व्यवस्था पर भरोसा होता है। ऐसे में किसी उड़ान के दौरान एक साथ कई तकनीकी चेतावनियां सामने आना निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।
36 हजार फीट की ऊंचाई पर सिस्टम में आई गड़बड़ी
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, फुकेत से दिल्ली जा रहे एयर इंडिया के विमान में करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव कम होने की चेतावनी मिली। यह स्थिति कुछ ही सेकंड के अंतराल में सामने आई।
हाइड्रोलिक सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण नियंत्रणों और उपकरणों के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक साथ तीनों सिस्टम से जुड़ी चेतावनी मिलना गंभीर तकनीकी घटना मानी जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद विमान का ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया। विमान की ऊंचाई में भी अचानक बदलाव आया। विमान पहले ऊपर की ओर गया और इसके बाद करीब 297 फीट नीचे आया। यह पूरा घटनाक्रम बेहद कम समय में हुआ।
इस दौरान विमान में सवार कई यात्रियों के घायल होने की बात सामने आई है। विमान को भी नुकसान पहुंचा।
पायलट के ड्रग टेस्ट ने बढ़ाई चिंता
इस मामले का एक और पहलू जांच एजेंसियों और विमानन क्षेत्र के लिए चिंता का कारण बन गया है। शुरुआती जांच के दौरान कमांडिंग पायलट के साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आने की बात सामने आई है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि सिर्फ टेस्ट पॉजिटिव आने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हादसे या तकनीकी गड़बड़ी के पीछे पायलट की भूमिका थी।
AAIB की जांच अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए तकनीकी खराबी, पायलट की स्थिति और घटना के बीच किसी संभावित संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिर भी यह मामला विमानन सुरक्षा व्यवस्था के तीन महत्वपूर्ण हिस्सों पर सवाल जरूर खड़ा करता है—विमान की तकनीकी जांच, पायलटों की मेडिकल और ड्रग स्क्रीनिंग तथा नियामकीय निगरानी।
क्या पायलटों की ड्रग टेस्टिंग बढ़ेगी?
घटना के बाद पायलटों की रैंडम ड्रग टेस्टिंग को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। मौजूदा व्यवस्था में रैंडम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमान उड़ाते समय पायलट की शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद अहम होती है। हालांकि केवल ड्रग टेस्ट बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। विमानन सुरक्षा एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें तकनीकी रखरखाव से लेकर क्रू की फिटनेस और नियामकीय निगरानी तक हर स्तर पर लगातार सतर्कता जरूरी है।
अहमदाबाद हादसे के बाद और बढ़ी चिंता
इस घटना को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भारत में हाल ही में हुए अहमदाबाद विमान हादसे की जांच भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे समय में किसी अन्य उड़ान में गंभीर तकनीकी समस्या और सुरक्षा से जुड़े सवाल सामने आना यात्रियों के बीच चिंता पैदा कर सकता है।
हालांकि दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ना उचित नहीं होगा। हर विमान हादसे या तकनीकी घटना के कारण अलग हो सकते हैं और उनका निर्धारण विस्तृत जांच के बाद ही किया जा सकता है।
जरूरत इस बात की है कि जांच एजेंसियां तकनीकी खराबी, विमान के रखरखाव, हाइड्रोलिक सिस्टम, कॉकपिट डेटा और क्रू से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच करें।
बढ़ते एयर ट्रैफिक के साथ सुरक्षा भी जरूरी
भारत में हवाई यात्रा का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। बीते वर्षों में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े एयर पैसेंजर बाजारों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बढ़ते यात्रियों और उड़ानों के बीच विमानन क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ ज्यादा विमानों का संचालन करना नहीं, बल्कि सुरक्षा के उच्च मानकों को लगातार बनाए रखना है।
यात्रियों का भरोसा इस पूरे सिस्टम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर तकनीकी खराबी, क्रू स्क्रीनिंग या निगरानी व्यवस्था से जुड़े सवाल बार-बार सामने आते हैं, तो उनका सीधा असर यात्रियों के भरोसे पर पड़ सकता है।
जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
फुकेत-दिल्ली उड़ान मामले में AAIB की रिपोर्ट फिलहाल प्रारंभिक है। इसलिए अभी किसी एक कारण को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
आगे की जांच में विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, फ्लाइट डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, हाइड्रोलिक सिस्टम और क्रू से जुड़े पहलुओं की विस्तृत पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
हवाई यात्रा की सुरक्षा केवल दुर्घटना होने के बाद जांच का विषय नहीं होनी चाहिए। तकनीकी रखरखाव, पायलट फिटनेस, रैंडम टेस्टिंग और नियामकीय निगरानी में लगातार सुधार ही यात्रियों के भरोसे को मजबूत कर सकता है।


