Cardamom Price: महंगाई का असर अब सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। छोटी इलायची की कीमतों में भी लगातार तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में इसकी औसत कीमत करीब 3,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि अलग-अलग ग्रेड की इलायची के भाव 2,700 रुपये से लेकर 4,500 रुपये प्रति किलो तक बताए जा रहे हैं। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को और महंगी इलायची का सामना करना पड़ सकता है।
छोटी इलायची क्यों हो रही महंगी?
छोटी इलायची देश के सबसे महंगे मसालों में शामिल है। इसका इस्तेमाल घरों के अलावा होटल, रेस्तरां, मिठाई उद्योग, चाय, पान-मसाला और माउथ फ्रेशनर बनाने में भी बड़े पैमाने पर होता है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में इसकी मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है।
बाजार कारोबारियों के मुताबिक इस बार भारत और ग्वाटेमाला दोनों जगह इलायची की फसल पर मौसम का असर पड़ा है। उत्पादन कमजोर रहने से बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई है। दूसरी तरफ मांग बनी रहने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
खारी बावली के इलायची थोक कारोबारी और निर्यातक कपिल जैन के मुताबिक बाजार में इस समय इलायची के दाम तेज हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग ग्रेड के हिसाब से कीमत तय होती है और फिलहाल औसत भाव करीब 3,000 रुपये किलो है। कुछ बेहतर ग्रेड की इलायची 4,500 रुपये किलो तक बिक रही है।
7 से 9 मिमी तक की इलायची, आकार के हिसाब से बदलता है भाव
छोटी इलायची का बाजार केवल उसकी कुल कीमत से तय नहीं होता, बल्कि उसके साइज और क्वालिटी के आधार पर अलग-अलग रेट होते हैं। बाजार में फिलहाल करीब 7 से 9 मिमी साइज की इलायची उपलब्ध है।
नॉर्दन स्पाइसेज ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रवींद्र अग्रवाल के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों की तुलना में छोटी इलायची के औसत भाव में करीब 10 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग जरूरत के लिए अलग साइज की इलायची इस्तेमाल होती है। करीब 7 मिमी वाली इलायची का इस्तेमाल पान में किया जाता है, जबकि 8 मिमी ग्रेड का उपयोग ट्रेडिंग और सामान्य लेन-देन में ज्यादा होता है। वहीं शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में 9 मिमी की इलायची की मांग रहती है।
भारत और ग्वाटेमाला में उत्पादन पर मौसम की मार
भारत में केरल इलायची उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा ग्वाटेमाला दुनिया के बड़े इलायची उत्पादक देशों में शामिल है। दोनों देशों की फसल का अंतरराष्ट्रीय बाजार पर सीधा असर पड़ता है।
कारोबारियों के मुताबिक ग्वाटेमाला में एक एकड़ जमीन से भारत की तुलना में करीब तीन गुना तक इलायची का उत्पादन हो सकता है। इसलिए वहां उत्पादन में होने वाला बदलाव वैश्विक सप्लाई और कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
इस बार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और अल नीनो से जुड़े असर को भी उत्पादन में कमजोरी की एक वजह बताया जा रहा है। जब फसल कम होती है और बाजार में उपलब्ध स्टॉक घटता है, तो मांग के मुकाबले सप्लाई कम पड़ने से कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है।
त्योहारों में और बढ़ सकती है मांग
आने वाले दिनों में गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण इलायची की खपत बढ़ने की उम्मीद है। मिठाइयों, चाय, बेकरी उत्पादों और दूसरे खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल बढ़ने से मांग में तेजी आ सकती है।
कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद नहीं है। ऐसे में यदि त्योहारों के दौरान मांग तेजी से बढ़ती है तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
क्या 5,000 रुपये किलो तक पहुंच सकती है इलायची?
बाजार से जुड़े कारोबारियों का अनुमान है कि अगर उत्पादन और सप्लाई की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो छोटी इलायची के दाम में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है।
कपिल जैन के मुताबिक भारत और ग्वाटेमाला में इस वर्ष कुल उत्पादन करीब 35 से 40 हजार टन रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौसम का असर आगे भी जारी रहता है और बाजार में स्टॉक सीमित रहता है तो इलायची की कीमत 5,000 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंचना भी संभव है।
हालांकि, यह बाजार का अनुमान है और वास्तविक कीमत उत्पादन, आयात-निर्यात, स्टॉक, त्योहारी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर बदल सकती है।
महंगी इलायची का असर कहां पड़ेगा?
इलायची की कीमत बढ़ने का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल कई उद्योगों में होता है। चाय और मिठाई से लेकर पान-मसाला, माउथ फ्रेशनर और कुछ फार्मास्यूटिकल उत्पादों में भी इलायची का उपयोग किया जाता है।
इसलिए अगर कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो इन उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं।
उपभोक्ताओं को कब मिल सकती है राहत?
इलायची की कीमतों में राहत मुख्य रूप से नई फसल की आवक और बाजार में सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि उत्पादन बेहतर रहता है और बाजार में पर्याप्त स्टॉक आता है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
फिलहाल त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने और उपलब्ध स्टॉक सीमित रहने के कारण तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। ऐसे में चाय और मिठाइयों में इलायची का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को आने वाले समय में ऊंचे दाम का सामना करना पड़ सकता है।


