Sugar Price Today: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देशभर में चीनी के औसत खुदरा भाव में पिछले एक सप्ताह के दौरान करीब 2 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, एक महीने पहले की तुलना में चीनी अभी भी काफी महंगी बिक रही है।
रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की समय सीमा बढ़ी
चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया में राहत दी है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने चीनी मिलों को आवेदन करने की समय सीमा बढ़ाकर 7 सितंबर 2026 कर दी है।
जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, चीनी मिलें इस समय सीमा तक एडवांस ऑथराइजेशन को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) में बदलने के लिए आवेदन कर सकती हैं। सरकार का उद्देश्य त्योहारी मांग बढ़ने से पहले बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इससे पहले 20 अगस्त को वाणिज्य मंत्रालय ने TRQ स्कीम के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी थी।
इसके बाद DGFT ने इस निर्धारित मात्रा में बचे हुए करीब 2 लाख टन रॉ शुगर के लिए नए आवेदन भी आमंत्रित किए। अब आवेदन की समय सीमा बढ़ाए जाने से चीनी मिलों को अतिरिक्त समय मिल गया है।
एक हफ्ते में ₹2 किलो कम हुआ चीनी का भाव
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चीनी की कीमत में हाल के दिनों में नरमी आई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को देशभर में चीनी का औसत खुदरा भाव 61.93 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।
एक सप्ताह पहले यही कीमत करीब 64.10 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी सात दिनों में औसत खुदरा कीमत में लगभग 2.17 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।
हालांकि, अगर एक महीने पहले की कीमत से तुलना करें तो तस्वीर अलग नजर आती है। एक महीने पहले चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 49.71 रुपये प्रति किलोग्राम था। मौजूदा कीमत इसके मुकाबले लगभग 25 फीसदी अधिक है।
इसका मतलब यह है कि पिछले एक सप्ताह में भले ही उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन चीनी अभी भी एक महीने पहले के मुकाबले काफी महंगी है।
सरकार के कदमों का दिखने लगा असर
चीनी की कीमतों में हालिया तेजी के पीछे त्योहारी सीजन से पहले बढ़ने वाली मांग को प्रमुख वजह माना जा रहा था। भारत में त्योहारों के दौरान मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है।
ऐसे समय में सरकार के सामने दोहरी चुनौती होती है। एक तरफ घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ कीमतों को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकना भी महत्वपूर्ण है।
रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति इसी दिशा में उठाया गया कदम है। अतिरिक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
क्या त्योहारों में फिर बढ़ सकती है चीनी की कीमत?
त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा कई बातों पर निर्भर करेगी। इनमें घरेलू उत्पादन, मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक, आयात की गति और बाजार में मांग प्रमुख हैं।
सरकार और इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। यदि बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी रहती है तो त्योहारी मांग बढ़ने के बावजूद कीमतों में बड़ी तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है।
आम लोगों को कितनी राहत?
फिलहाल चीनी के भाव में एक सप्ताह में करीब 2 रुपये प्रति किलो की कमी निश्चित तौर पर उपभोक्ताओं के लिए राहत वाली खबर है। लेकिन मौजूदा कीमत अभी भी एक महीने पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है।
आने वाले कुछ सप्ताह खास तौर पर महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने वाली है। सरकार की ओर से ड्यूटी फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट और आवेदन की समय सीमा बढ़ाने जैसे कदमों का वास्तविक असर बाजार में सप्लाई बढ़ने के बाद ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
यानी फिलहाल चीनी के भाव में नरमी जरूर आई है, लेकिन त्योहारों के दौरान कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह घरेलू सप्लाई और बढ़ती मांग के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।


