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Gautam Adani US Case: गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में क्यों बंद हुआ घूसखोरी का केस? 600 पन्नों के कानूनी दस्तावेजों से खुला बड़ा राज

Namam Sharma
Last updated: 2026/07/19 at 3:56 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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7 Min Read
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नई दिल्ली: उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिका में कथित घूसखोरी और निवेशकों को गुमराह करने से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। अब अदालत में दाखिल करीब 600 पन्नों के दस्तावेजों और कानूनी रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ है कि अडानी की डिफेंस टीम ने अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के सामने इतने व्यापक कानूनी और तकनीकी तर्क पेश किए कि अंततः विभाग ने आपराधिक मामला वापस लेने का फैसला किया।

Contents
क्या था पूरा मामला?10 हफ्तों में तैयार किया मजबूत कानूनी बचावचार बड़े विशेषज्ञों की ली गई मदद10 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव का भी हुआ जिक्रआखिर केस बंद क्यों हुआ?सिविल मामले में हुआ समझौताअडानी पक्ष ने क्या कहा?निष्कर्ष

कोर्ट में दाखिल दस्तावेज बताते हैं कि करीब 10 सप्ताह तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान अडानी की टीम ने विशेषज्ञों की राय, विस्तृत कानूनी विश्लेषण और सैकड़ों पन्नों के साक्ष्य पेश किए। इसी रणनीति ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा बदल दी।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 20 नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।

अमेरिकी एजेंसियों का आरोप था कि भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के बड़े ठेके हासिल करने के लिए लगभग 25 करोड़ डॉलर (करीब 2,400 करोड़ रुपये) की कथित रिश्वत देने की साजिश रची गई। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गलत जानकारी देकर बॉन्ड और लोन के माध्यम से 3 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई गई।

हालांकि अडानी समूह ने शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे बताया था।

10 हफ्तों में तैयार किया मजबूत कानूनी बचाव

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, 3 फरवरी से 17 अप्रैल 2026 के बीच अडानी की कानूनी टीम ने अमेरिकी जांच एजेंसियों के सामने कई दौर में विस्तृत दस्तावेज पेश किए।

इनमें शामिल थे:

  • 118 पन्नों का मुख्य कानूनी पत्र
  • दो विस्तृत स्लाइड प्रेजेंटेशन (करीब 130 पेज)
  • अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) को 151 पन्नों की रिपोर्ट
  • विभिन्न विशेषज्ञों की विस्तृत कानूनी और तकनीकी राय

इन दस्तावेजों के जरिए डिफेंस टीम ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को कानूनी आधार पर चुनौती दी।

चार बड़े विशेषज्ञों की ली गई मदद

अडानी की ओर से बचाव के लिए दुनिया के प्रतिष्ठित कानूनी और नियामकीय विशेषज्ञों को शामिल किया गया।

इनमें शामिल थे:

  • हार्वर्ड लॉ स्कूल के सिक्योरिटीज कानून विशेषज्ञ
  • अमेरिकी SEC के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष
  • भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI)
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के पूर्व प्रमुख

इन विशेषज्ञों ने लगभग 200 पन्नों की स्वतंत्र रिपोर्ट तैयार कर यह तर्क दिया कि अमेरिकी अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों में कई कानूनी कमजोरियां हैं और अमेरिकी कानून का दायरा भारत में हुई घटनाओं पर सीमित रूप से लागू होता है।

10 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव का भी हुआ जिक्र

कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि अडानी की कानूनी टीम ने गौतम अडानी के उस सार्वजनिक बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने अमेरिका के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 10 अरब डॉलर तक निवेश करने और लगभग 15,000 रोजगार सृजित करने की बात कही थी।

डिफेंस टीम का तर्क था कि लंबित कानूनी कार्रवाई से ऐसे निवेश प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित निवेश के बदले आपराधिक मामले में राहत देने जैसी कोई संभावना नहीं है। अभियोजन पक्ष ने ईमेल के माध्यम से साफ कहा कि निवेश और आपराधिक मुकदमे दो अलग-अलग विषय हैं।

आखिर केस बंद क्यों हुआ?

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, 18 मई 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग ने स्वयं अदालत से आपराधिक मामला समाप्त करने की अनुमति मांगी।

जब अदालत ने कारण पूछा तो अमेरिकी अधिकारियों ने कई प्रमुख आधार बताए:

  • कथित घटनाएं पूरी तरह भारत में हुई थीं।
  • अमेरिकी क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को लेकर गंभीर कानूनी चुनौतियां थीं।
  • उपलब्ध साक्ष्य अभियोजन के लिए पर्याप्त नहीं माने गए।
  • अमेरिकी निवेशकों को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान साबित नहीं हुआ।
  • भारत की संबंधित एजेंसियां भी मामले की समीक्षा कर चुकी थीं और वहां आगे आपराधिक कार्रवाई की संभावना बेहद सीमित थी।

इन कारणों के आधार पर अमेरिकी सरकार ने केस वापस लेने का अनुरोध किया।

सिविल मामले में हुआ समझौता

आपराधिक मामला समाप्त होने के साथ-साथ अमेरिकी नियामक से जुड़े सिविल मामले का भी निपटारा हुआ।

समझौते के तहत:

  • गौतम अडानी लगभग 60 लाख डॉलर (करीब 57 करोड़ रुपये) का सिविल जुर्माना भरने पर सहमत हुए।
  • सागर अडानी लगभग 1.2 करोड़ डॉलर (करीब 115 करोड़ रुपये) का सिविल जुर्माना अदा करेंगे।

महत्वपूर्ण बात यह रही कि दोनों ने समझौते के तहत लगाए गए आरोपों को न तो स्वीकार किया और न ही उनका खंडन किया, जो अमेरिका में सिविल सेटलमेंट का सामान्य कानूनी प्रावधान माना जाता है।

अडानी पक्ष ने क्या कहा?

अडानी की कानूनी टीम का कहना है कि यह फैसला किसी राजनीतिक या व्यावसायिक दबाव का परिणाम नहीं था, बल्कि विस्तृत कानूनी विश्लेषण, विशेषज्ञों की राय और तथ्यों के आधार पर तैयार मजबूत बचाव की वजह से अमेरिकी न्याय विभाग ने अपना रुख बदला।

उनके अनुसार, अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों ने अभियोजन पक्ष के कई प्रमुख दावों पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े किए, जिसके बाद मामला आगे बढ़ाना व्यावहारिक नहीं माना गया।

निष्कर्ष

गौतम अडानी से जुड़ा यह मामला अंतरराष्ट्रीय कारोबारी और कानूनी जगत में काफी चर्चा का विषय रहा। कोर्ट दस्तावेजों से अब यह स्पष्ट होता है कि व्यापक कानूनी तैयारी, विशेषज्ञों की रिपोर्ट और क्षेत्राधिकार से जुड़े तर्क इस मामले में निर्णायक साबित हुए। हालांकि आपराधिक मामला समाप्त हो चुका है, वहीं सिविल स्तर पर समझौते के जरिए विवाद का निपटारा किया गया।

(पीटीआई इनपुट के साथ)

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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