नई दिल्ली: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत में क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) की तेज रफ्तार से हो रही नीलामी पर केंद्र सरकार की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी में जिस गति से काम किया है, वह देश के खनन क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। अग्रवाल का मानना है कि अब अगला बड़ा कदम इन ब्लॉकों में जल्द से जल्द माइनिंग ऑपरेशंस शुरू करना होना चाहिए, ताकि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सके।
हाल ही में खनन मंत्रालय ने क्रिटिकल और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी के आठवें चरण की शुरुआत की है। इस चरण में देश के 9 राज्यों में फैले 20 नए खनिज ब्लॉकों के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं। सरकार का यह कदम भारत को खनिज संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और भविष्य की तकनीकों के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अनिल अग्रवाल ने एक्स पर क्या लिखा?
Many congratulations to the Government on the amazing speed at which it is bringing mineral blocks, including critical minerals, to auction.
Let's also put a shovel into the ground and operationalise with equal speed. India will become a global force in this sector. pic.twitter.com/riqUqT65us
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) July 18, 2026 अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स सहित अन्य खनिज ब्लॉकों को रिकॉर्ड गति से नीलामी के लिए पेश किया है, जिसके लिए वह बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि नीलामी के बाद खदानों में भी उतनी ही तेजी से उत्पादन शुरू हो।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि यही गति बनी रही तो भारत आने वाले वर्षों में क्रिटिकल मिनरल्स और माइनिंग सेक्टर में वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभर सकता है।
क्या हैं क्रिटिकल मिनरल्स?
क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे खनिज होते हैं जो आधुनिक उद्योगों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि इनका उपयोग कई हाई-टेक और रणनीतिक क्षेत्रों में होता है।
इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में किया जाता है:
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी
- क्लीन एनर्जी और सोलर प्रोजेक्ट
- विंड एनर्जी
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स
- डिफेंस और एयरोस्पेस
- एडवांस मैन्युफैक्चरिंग
- उर्वरक (फर्टिलाइजर) उद्योग
आठवें चरण में 20 ब्लॉकों की नीलामी
खनन मंत्रालय के अनुसार, आठवें चरण में कुल 20 खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू की गई है। ये ब्लॉक देश के 9 राज्यों में स्थित हैं और इनमें कई महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।
इस चरण की खास बातें:
- 20 खनिज ब्लॉकों के लिए ई-नीलामी शुरू।
- 9 राज्यों में फैले हैं ये ब्लॉक।
- 13 नए खोजे गए खनिज क्षेत्र पहली बार नीलामी में शामिल।
- 7 ब्लॉकों को री-बिडिंग (Re-bidding) के लिए दोबारा पेश किया गया।
अब तक 88 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक किए जा चुके हैं पेश
सरकार के इस नए चरण के साथ अब तक कुल 88 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों को नीलामी के लिए पेश किया जा चुका है। इनमें से 56 ब्लॉकों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सफल नीलामियां इस बात का संकेत हैं कि भारतीय और वैश्विक कंपनियों की देश के खनन क्षेत्र में निवेश की रुचि बढ़ रही है।
भारत की आत्मनिर्भरता को मिलेगा बड़ा सहारा
भारत वर्तमान में कई महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज, सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार घरेलू स्तर पर इन खनिजों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
यदि नीलामी के बाद खनन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू होता है तो:
- महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता घटेगी।
- घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी।
- EV और क्लीन एनर्जी सेक्टर को कच्चा माल आसानी से मिलेगा।
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।
माइनिंग सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह पहल?
क्रिटिकल मिनरल्स आज दुनिया की सबसे रणनीतिक प्राकृतिक संपत्तियों में शामिल हैं। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश पहले से ही इनके सुरक्षित स्रोत विकसित करने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारत की तेज नीलामी प्रक्रिया भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नीलामी के बाद परियोजनाओं को समय पर मंजूरी और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाता है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक माइनिंग और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल द्वारा सरकार की सराहना इस बात का संकेत है कि उद्योग जगत सरकार की तेज निर्णय प्रक्रिया को सकारात्मक रूप में देख रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती नीलामी के बाद खनन परियोजनाओं को समय पर शुरू करना होगी। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो भारत न केवल महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, क्लीन एनर्जी, डिफेंस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थान बना सकता है।


