नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देने की दिशा में वेदांता ने बड़ा दावा किया है। कंपनी ने एक बार फिर दोहराया है कि उसका लक्ष्य भारत में रोजाना 5 लाख बैरल तेल और गैस का उत्पादन करना है। वेदांता का कहना है कि देश के पास करीब 300 अरब बैरल हाइड्रोकार्बन (कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस) संसाधन मौजूद हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक और तेज खोज अभियान के जरिए उपयोग में लाया जा सकता है।
अगर यह लक्ष्य सफल होता है तो भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी, आयात बिल कम होगा और ऊर्जा के मामले में देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सकेगा।
भारत अभी भी आयात पर है बेहद निर्भर
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है, लेकिन घरेलू उत्पादन अभी भी मांग के मुकाबले काफी कम है। वर्तमान में देश अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस विदेशों से आयात करता है।
इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव या वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना सरकार और उद्योग दोनों की प्राथमिकता बन चुका है।
300 अरब बैरल हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दावा
वेदांता ने कहा है कि भारत के पास लगभग 300 अरब बैरल के बराबर हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हैं। इनमें कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस दोनों शामिल हैं।
कंपनी की ऑयल एंड गैस इकाई केर्न (Cairn) आधुनिक ड्रिलिंग तकनीक, डिजिटल एक्सप्लोरेशन और उन्नत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की मदद से इन संसाधनों की खोज और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
कंपनी का मानना है कि भारत में अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां तेल और गैस की व्यापक खोज नहीं हो सकी है। इसलिए भविष्य में बड़े भंडार मिलने की संभावना बनी हुई है।
क्या बोले वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल?
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि देश में उत्पादित होने वाला हर एक बैरल तेल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, विदेशी आयात पर निर्भरता कम करता है और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देता है।
अनिल अग्रवाल के अनुसार भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। इसके साथ ही देश के पास विश्वस्तरीय इंजीनियर, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो आधुनिक तकनीक के जरिए इन संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।
‘समुद्र मंथन’ मिशन से बढ़ेगी खोज
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के कई समुद्री और जमीनी क्षेत्रों में अभी भी व्यवस्थित तरीके से तेल और गैस की खोज नहीं हुई है।
इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गहन जल अन्वेषण मिशन (समुद्र मंथन) शुरू किया है। इस पहल के तहत गहरे और अत्यधिक गहरे समुद्री क्षेत्रों में नए ब्लॉकों को खोज और उत्पादन के लिए खोला जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि इससे देश में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और इस दशक के अंत तक ऊर्जा क्षेत्र में करीब 500 अरब डॉलर तक के निवेश की संभावना बनेगी।
चार राज्यों में फैला है वेदांता का बड़ा नेटवर्क
वेदांता ऑयल एंड गैस का परिचालन फिलहाल देश के चार प्रमुख राज्यों में फैला हुआ है।
कंपनी के पास लगभग 47,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 44 ऑनशोर (जमीन आधारित) और ऑफशोर (समुद्री) ब्लॉक हैं।
इनका संचालन मुख्य रूप से इन राज्यों में हो रहा है—
- राजस्थान
- गुजरात
- असम
- आंध्र प्रदेश
इन क्षेत्रों में पारंपरिक और आधुनिक दोनों तकनीकों के जरिए तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन किया जा रहा है।
भारत को क्या होगा फायदा?
यदि वेदांता अपने उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहती है तो इसके कई बड़े फायदे हो सकते हैं।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में तेजी आएगी।
- ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर अपेक्षाकृत कम होगा।
आगे की राह
भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और आने वाले वर्षों में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वेदांता का 5 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य और 300 अरब बैरल हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दावा भारत की ऊर्जा नीति के लिए अहम संकेत देता है। हालांकि इन संसाधनों का वास्तविक उत्पादन बड़े पैमाने पर खोज, निवेश, आधुनिक तकनीक, नियामकीय मंजूरियों और परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
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