नई दिल्ली: उद्योगपति अनिल अंबानी के कारोबारी समूह के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) की सहायक कंपनी मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) को दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया से बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने सरकारी एसेट रिकंस्ट्रक्शन संस्था नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) के साथ 2,771.32 करोड़ रुपये के कर्ज पुनर्गठन (Debt Restructuring) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के बाद कंपनी का 1,100 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज कम हो जाएगा और उसके खिलाफ चल रही दिवालियापन की कार्रवाई वापस ले ली जाएगी।
Highlights
- MMOPL को दिवालियापन प्रक्रिया से मिली राहत।
- NARCL के साथ ₹2,771.32 करोड़ का कर्ज पुनर्गठन समझौता।
- 31 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार ₹1,100 करोड़ से अधिक कर्ज में कमी।
- Insolvency की कार्यवाही वापस लेने पर बनी सहमति।
- MMOPL में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की 74% और MMRDA की 26% हिस्सेदारी।
क्या है पूरा मामला?
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 10 जुलाई 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में बताया कि उसकी सहायक कंपनी मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) ने 9 जुलाई 2026 को NARCL के साथ मास्टर डेब्ट रीस्ट्रक्चरिंग एग्रीमेंट (MRA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत MMOPL के ऊपर NARCL का बकाया कर्ज 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार 1,100 करोड़ रुपये से अधिक घट जाएगा। साथ ही कंपनी के खिलाफ शुरू की गई दिवालियापन की प्रक्रिया भी वापस ले ली जाएगी।
JP Associates जैसी स्थिति से बची कंपनी
हाल के समय में JP Associates दिवालियापन प्रक्रिया के बाद अधिग्रहण की स्थिति में पहुंच गई थी। हालांकि MMOPL के मामले में कर्ज पुनर्गठन समझौते के कारण कंपनी को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे अनिल अंबानी समूह की इस अहम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को बड़ी राहत मिली है।
MMOPL में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है, जिसमें—
- रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 74% हिस्सेदारी है।
- मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) की 26% हिस्सेदारी है।
समझौते में क्या-क्या प्रावधान हैं?
कर्ज पुनर्गठन समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
- NARCL को MMOPL के बोर्ड में एक निदेशक (Director) नियुक्त करने का अधिकार मिलेगा।
- पुनर्गठन योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए Monitoring Committee बनाई जाएगी, जिसमें कर्जदाता और कंपनी दोनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- कंपनी के कुछ महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट निर्णयों के लिए पहले से कर्जदाता की लिखित मंजूरी आवश्यक होगी।
- समझौते में सामान्य वित्तीय अनुशासन और प्रतिबंध संबंधी शर्तें भी शामिल हैं।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों पर क्या असर?
यह खबर ऐसे समय आई है जब शुक्रवार को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर करीब 5% गिरकर 69.90 रुपये पर बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि दिवालियापन का खतरा टलने और कर्ज में बड़ी राहत मिलने के बाद निवेशकों की धारणा में कितना बदलाव आता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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