भारत-पाकिस्तान के बंटवारे ने लाखों परिवारों की जिंदगी बदल दी थी। किसी ने अपना घर खोया, किसी ने कारोबार और किसी ने अपनों को। इन्हीं लाखों लोगों में एक नाम था हर प्रसाद नंदा (एच.पी. नंदा) का। लाहौर में सफल कारोबारी रहे एचपी नंदा को 1947 के विभाजन के दौरान सब कुछ छोड़कर दिल्ली आना पड़ा। जेब में केवल 5000 रुपये थे, लेकिन हौसला इतना बड़ा था कि आगे चलकर उन्होंने एस्कॉर्ट्स ग्रुप जैसा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा कर दिया। यही कंपनी बाद में देश को मशहूर ‘राजदूत’ मोटरसाइकिल और विश्वस्तरीय ट्रैक्टर देने के लिए जानी गई।
लाहौर में जमाया था सफल कारोबार
बंटवारे से पहले हर प्रसाद नंदा का परिवार लाहौर के संपन्न परिवारों में गिना जाता था। वर्ष 1944 में उन्होंने अपने भाई युदी नंदा के साथ मिलकर ‘एस्कॉर्ट्स एजेंट्स लिमिटेड’ की स्थापना की। कंपनी ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल कारोबार से जुड़ी थी और तेजी से आगे बढ़ रही थी।
लेकिन 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन ने सब कुछ बदल दिया। हिंसा और अस्थिरता के बीच उन्हें अपना घर, कारोबार और सारी संपत्ति छोड़कर भारत आना पड़ा।
शरणार्थी शिविर से शुरू हुआ नया संघर्ष
दिल्ली पहुंचने के बाद एचपी नंदा और उनका परिवार शरणार्थी शिविर में रहने को मजबूर हो गया। जो परिवार कभी बड़े बंगले में रहता था, वह अचानक मुश्किल हालात में जीवन बिताने लगा। उस समय उनके पास सिर्फ 5000 रुपये बचे थे।
हालांकि उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने दिल्ली में एक छोटा-सा कार्यालय किराये पर लिया और अपने पुराने व्यावसायिक अनुभव के दम पर फिर से कारोबार शुरू करने का फैसला किया।
विदेशी कंपनियों की एजेंसी से शुरू की नई पारी
ऑटोमोबाइल सेक्टर में अनुभव होने के कारण एचपी नंदा ने विदेशी कंपनियों के साथ काम शुरू किया। उन्होंने Massey Ferguson जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के ट्रैक्टर और कृषि उपकरण भारत में आयात कर बेचने का काम किया।
कुछ वर्षों बाद उन्होंने केवल ट्रेडिंग तक सीमित रहने के बजाय भारत में ही निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और रेलवे उपकरण बनाने के कारखाने स्थापित किए और एस्कॉर्ट्स ग्रुप को मजबूत औद्योगिक कंपनी के रूप में विकसित किया।
‘राजदूत’ मोटरसाइकिल ने दिलाई नई पहचान
एक समय भारत में ‘राजदूत’ मोटरसाइकिल प्रतिष्ठा और मजबूती का प्रतीक मानी जाती थी। इस लोकप्रिय बाइक का निर्माण एस्कॉर्ट्स ग्रुप ने किया था। हालांकि कंपनी की सबसे बड़ी पहचान ट्रैक्टर निर्माण के क्षेत्र में बनी।
एचपी नंदा के नेतृत्व में एस्कॉर्ट्स भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग और कृषि मशीनरी कंपनियों में शामिल हो गई। उनके विजन ने भारतीय कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आज Escorts Kubota के नाम से है पहचान
समय के साथ एस्कॉर्ट्स ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत की। आज कंपनी Escorts Kubota Limited के नाम से जानी जाती है और कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण तथा रेलवे से जुड़े उत्पादों का निर्माण करती है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹32,912 करोड़ के आसपास है।
संघर्ष से मिली सफलता की मिसाल
हर प्रसाद नंदा का निधन वर्ष 1999 में हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी भारतीय उद्योग जगत को प्रेरित करती है। बंटवारे में सब कुछ खो देने के बावजूद उन्होंने केवल 5000 रुपये से नई शुरुआत की और एक ऐसी कंपनी खड़ी की जिसने भारत को ट्रैक्टर, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में नई पहचान दिलाई।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे से हासिल होती है।


