भारत के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहे अदाणी ग्रुप ने अब ग्रीन केमिकल्स सेक्टर में बड़ा कदम उठाया है। समूह की फ्लैगशिप कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने फ्रांस की क्लीन-टेक कंपनी Dioxycle के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस सहयोग का उद्देश्य भारत में कम-कार्बन (Low Carbon) केमिकल्स के उत्पादन को बढ़ावा देना और पर्यावरण के अनुकूल नई तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाना है।
Highlights
- अदाणी एंटरप्राइजेज और फ्रांस की Dioxycle के बीच रणनीतिक साझेदारी।
- भारत में कम-कार्बन केमिकल्स के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना।
- कैप्चर की गई CO₂ और रिन्यूएबल बिजली से बनेगा फॉर्मिक एसिड।
- सफल परीक्षण के बाद बड़े स्तर पर कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी।
- कार्बन उत्सर्जन को आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में बड़ा कदम।
अदाणी साइट पर बनेगी पायलट फैसिलिटी
इस साझेदारी के तहत शुरुआत अदाणी ग्रुप की एक साइट पर पायलट प्रोडक्शन फैसिलिटी स्थापित करके की जाएगी। यहां कैप्चर की गई कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और रिन्यूएबल बिजली की मदद से फॉर्मिक एसिड का उत्पादन किया जाएगा।
यदि यह तकनीक पायलट स्तर पर सफल साबित होती है, तो दोनों कंपनियां इसे बड़े पैमाने पर लागू करते हुए कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग शुरू करेंगी।
क्या होता है फॉर्मिक एसिड?
फॉर्मिक एसिड एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केमिकल है, जिसका उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है। इसमें शामिल हैं—
- टेक्सटाइल और लेदर इंडस्ट्री
- रबर प्रोसेसिंग
- कृषि एवं पशु चारा संरक्षण
- फार्मास्यूटिकल्स
- केमिकल मैन्युफैक्चरिंग
यदि इसका उत्पादन कम-कार्बन तकनीक से होता है, तो इससे उद्योगों का कार्बन फुटप्रिंट भी कम होगा।
जीत अदाणी ने क्या कहा?
अदाणी ग्रुप के डायरेक्टर जीत अदाणी ने इस साझेदारी को भारत के ग्रीन इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन की दिशा में अहम कदम बताया।
उन्होंने कहा कि कंपनी को भारत की पहली ऐसी फॉर्मिक एसिड प्रोडक्शन फैसिलिटी शुरू करने पर गर्व है, जो पूरी तरह रिन्यूएबल बिजली और कैप्चर किए गए कार्बन पर आधारित होगी।
उनके अनुसार, यह साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह औद्योगिक सहयोग के जरिए कार्बन जैसी पर्यावरणीय चुनौती को आर्थिक अवसर में बदला जा सकता है।
Dioxycle की CEO ने क्या कहा?
Dioxycle की CEO और को-फाउंडर डॉ. सारा लैमेसन ने कहा कि यह साझेदारी दिखाती है कि क्लीन टेक्नोलॉजी और बड़े औद्योगिक समूह मिलकर आवश्यक केमिकल्स के उत्पादन का तरीका बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास रिन्यूएबल एनर्जी, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और तेजी से आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का अनूठा संयोजन है। अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर कंपनी कम-कार्बन केमिकल उत्पादन का ऐसा मॉडल विकसित करना चाहती है, जिसे प्रतिस्पर्धी लागत पर बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके।
भारत के ग्रीन इंडस्ट्री मिशन को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के डिकार्बोनाइजेशन और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों को मजबूत करेगी। औद्योगिक उत्सर्जन से निकलने वाली CO₂ का दोबारा उपयोग कर मूल्यवान केमिकल्स तैयार करना सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भारत कम-कार्बन केमिकल उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।


