Gold Silver Price Crash Today: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद बुधवार (9 जुलाई) को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। आमतौर पर ऐसे हालात में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने बाजार की दिशा बदल दी। ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने से गोल्ड और सिल्वर दोनों पर दबाव बढ़ गया।
Highlights
- फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट।
- ब्याज दरों में कटौती टलने के संकेत से निवेशकों का सेंटीमेंट बदला।
- मध्य पूर्व तनाव के बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर रही।
- कच्चे तेल में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका।
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार COMEX में सोने की कीमतों में करीब 0.37% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी भी लगभग 0.85% टूटकर कारोबार करती दिखाई दी।
घरेलू वायदा बाजार MCX में भी सोने और चांदी दोनों पर दबाव देखने को मिला। सोना करीब ₹1.43 लाख से ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करता नजर आया, जबकि चांदी ₹2.23 लाख से ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करती दिखी।
तनाव के बावजूद क्यों टूटा गोल्ड?
सामान्य तौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट के दौरान निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने का रुख करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार तस्वीर अलग रही।
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 5% से अधिक उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई, जिसके चलते निवेशकों को लगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्द राहत नहीं देगा। इसी वजह से सोने-चांदी में बिकवाली बढ़ गई।
फेडरल रिजर्व के संकेत ने बढ़ाया दबाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया FOMC Minutes में साफ संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कटौती करने की जल्दबाजी में नहीं है।
फेड अधिकारियों का मानना है कि महंगाई अभी भी 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने (Higher for Longer) की नीति अपनाई जा सकती है। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश को कम आकर्षक बनाती हैं, जिससे इसकी कीमतों पर दबाव आता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल काफी हद तक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेड की अगली नीति बैठक और मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि ब्याज दरों में कटौती और आगे टलती है तो कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश की मांग दोबारा मजबूत होने की संभावना भी बनी रहेगी।
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