भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन इस साल मौसम की मार ने चाय उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। टी बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में देश के चाय उत्पादन में 3.54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर मानसून और प्री-मानसून सीजन में पर्याप्त बारिश नहीं होने से दक्षिण भारत, असम और दार्जिलिंग जैसे प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, पश्चिम बंगाल ने इस दौरान बेहतर प्रदर्शन करते हुए उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की है।
मई में 3.54% घटा चाय उत्पादन
टी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में देश का कुल चाय उत्पादन 131.60 मिलियन किलोग्राम रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 136.43 मिलियन किलोग्राम था। यानी साल-दर-साल आधार पर उत्पादन में करीब 3.54 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण कमजोर मानसून और प्री-मानसून अवधि में सामान्य से कम बारिश रहा, जिससे चाय की फसल का विकास प्रभावित हुआ।
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा असर
चाय उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट दक्षिण भारत में देखने को मिली।
- मई 2025 में उत्पादन: 19.04 मिलियन किलोग्राम
- मई 2026 में उत्पादन: 13.63 मिलियन किलोग्राम
यानी इस क्षेत्र में करीब 28 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
राज्यवार स्थिति देखें तो:
- केरल में उत्पादन 7.03 मिलियन किलोग्राम से घटकर 5.86 मिलियन किलोग्राम रह गया।
- कर्नाटक में भी चाय उत्पादन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
असम और दार्जिलिंग में भी घटा उत्पादन
देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य असम भी इस बार गिरावट से नहीं बच सका।
- मई 2025: 65.04 मिलियन किलोग्राम
- मई 2026: 64.70 मिलियन किलोग्राम
हालांकि गिरावट मामूली रही, लेकिन यह संकेत देती है कि मौसम का असर देश के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्र तक पहुंच चुका है।
वहीं, दार्जिलिंग में भी उत्पादन में हल्की कमी दर्ज की गई। दूसरी ओर, डूअर्स और तराई क्षेत्रों में बेहतर मौसम की वजह से उत्पादन में सुधार देखने को मिला।
पश्चिम बंगाल ने दिखाई मजबूती
जहां अधिकांश चाय उत्पादक क्षेत्रों में गिरावट रही, वहीं पश्चिम बंगाल ने बेहतर प्रदर्शन किया।
राज्य में चाय उत्पादन लगभग 5 फीसदी बढ़कर 42.69 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच गया। इसका श्रेय डूअर्स और तराई क्षेत्रों में अनुकूल मौसम और बेहतर उत्पादन परिस्थितियों को दिया जा रहा है।
क्या है गिरावट की असली वजह?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार चाय उत्पादन में कमी के पीछे मुख्य कारण हैं:
- प्री-मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश
- कमजोर मानसून की शुरुआत
- बढ़ता तापमान और मौसम में अस्थिरता
- कई चाय बागानों में नमी की कमी
चाय की खेती मौसम पर काफी निर्भर होती है। समय पर बारिश नहीं होने से नई पत्तियों की वृद्धि धीमी पड़ जाती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।
आगे क्या रहेगा असर?
अगर आने वाले महीनों में मानसून सामान्य रहता है तो उत्पादन में कुछ सुधार संभव है। हालांकि, लगातार बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां भारतीय चाय उद्योग के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। उत्पादन में कमी का असर भविष्य में चाय की कीमतों और निर्यात पर भी पड़ सकता है।


