नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही बाजार दबाव में था, लेकिन दोपहर बाद गिरावट ने रफ्तार पकड़ ली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 1,900 अंक टूटकर 76,266 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 581 अंक लुढ़ककर 23,900 के नीचे फिसल गया। इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ गई।
बाजार में इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर दिया गया बयान माना जा रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजारों में कमजोरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
निवेशकों की दौलत में 8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट
भारी बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 472 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। सेंसेक्स के लगभग सभी शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार में डर का माहौल इतना बढ़ गया कि इंडिया VIX करीब 27 फीसदी उछलकर 14.85 पर पहुंच गया, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है।
ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में रहा। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में करीब 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
सभी सेक्टरों में दिखी बिकवाली
एफएमसीजी, बैंकिंग, ऑयल एंड गैस, ऑटो और डिफेंस समेत लगभग सभी सेक्टरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
सबसे ज्यादा दबाव वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे—
- हिंदुस्तान यूनिलीवर
- इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो)
- मारुति सुजुकी
- कोटक महिंद्रा बैंक
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स
- भारती एयरटेल
इनमें 2 से 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। एनएसई पर 2,525 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 694 शेयरों में तेजी रही।
शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
1. ट्रंप के बयान से बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो गया है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।
इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई। निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष बढ़ा तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई।
- ब्रेंट क्रूड करीब 5% उछलकर 78.09 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
- WTI क्रूड भी करीब 74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने, महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि बाजार पर इसका नकारात्मक असर पड़ा।
3. वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत
दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
प्रमुख वैश्विक बाजारों का हाल
| बाजार | गिरावट |
|---|---|
| FTSE 100 (ब्रिटेन) | करीब 2% |
| CAC 40 (फ्रांस) | करीब 2% |
| DAX (जर्मनी) | करीब 2% |
| निक्केई (जापान) | करीब 1.5% |
| कोस्पी (दक्षिण कोरिया) | करीब 6% |
वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी शेयर बाजार पर दबाव बना।
- 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड: 4.565%
- 30 वर्षीय बॉन्ड यील्ड: 5.068%
- 2 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड: 4.197%
जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर बॉन्ड की ओर रुख करने लगते हैं। इससे इक्विटी बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है।
5. रुपये में कमजोरी
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.50 के स्तर से नीचे पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर की वजह से घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल पर तीन बड़े कारक असर डालेंगे—
- कच्चे तेल की कीमतें
- विदेशी निवेशकों (FII) का निवेश
- डॉलर इंडेक्स की दिशा
यदि रुपया और कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी आर्थिक संकेतकों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि, निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


