भारत में गोल्ड लोन की मांग लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) द्वारा दिए गए गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 70% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई 2026 तक गोल्ड लोन का कुल पोर्टफोलियो बढ़कर ₹3.29 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1.94 लाख करोड़ था। यह NBFC सेक्टर के सभी लेंडिंग सेगमेंट्स में सबसे तेज ग्रोथ मानी जा रही है।
Highlights
- NBFCs के गोल्ड लोन में 70% की सालाना बढ़ोतरी।
- कुल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹3.29 लाख करोड़ पहुंचा।
- तत्काल नकदी की जरूरत और सोने की ऊंची कीमतों से बढ़ी मांग।
- NBFC सेक्टर के लिए गोल्ड लोन सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बना।
- रिटेल लोन सेगमेंट में भी 19.5% की मजबूत वृद्धि दर्ज।
₹3.29 लाख करोड़ पहुंचा गोल्ड लोन का बाजार
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक NBFCs द्वारा गोल्ड ज्वेलरी के बदले दिए गए लोन का कुल बकाया ₹3.29 लाख करोड़ हो गया। एक साल पहले यह आंकड़ा ₹1.94 लाख करोड़ था। यानी सिर्फ एक वर्ष में इस सेगमेंट ने करीब 70% की रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी बताती है कि गोल्ड लोन अब NBFC उद्योग की कमाई और क्रेडिट ग्रोथ का प्रमुख आधार बन चुका है।
रिटेल लोन में भी दिखी मजबूत बढ़त
RBI के डेटा के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में भी मजबूत विस्तार देखने को मिला। इस दौरान कुल रिटेल क्रेडिट में करीब 19.5% की वृद्धि हुई, जिसमें गोल्ड लोन, हाउसिंग लोन और व्हीकल लोन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हालांकि सबसे तेज ग्रोथ गोल्ड लोन सेगमेंट में ही दर्ज की गई।
क्यों बढ़ रही है गोल्ड लोन की मांग?
गोल्ड लोन की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
- अचानक नकदी की जरूरत होने पर तुरंत लोन उपलब्ध होना।
- कम दस्तावेजों और आसान प्रक्रिया के कारण तेजी से मंजूरी।
- सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों को अधिक लोन राशि मिलना।
- अन्य अनसिक्योर्ड लोन की तुलना में अपेक्षाकृत कम ब्याज दरें।
- व्यवसाय, खेती, शिक्षा और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए आसान वित्तीय विकल्प।
NBFCs के लिए क्यों फायदेमंद है गोल्ड लोन?
गोल्ड लोन NBFCs के लिए भी बेहद आकर्षक कारोबार बन गया है क्योंकि यह सिक्योर्ड लोन होता है। लोन के बदले सोना गिरवी रखा जाता है, जिससे डिफॉल्ट का जोखिम कम रहता है और जरूरत पड़ने पर रिकवरी भी अपेक्षाकृत आसान होती है।
इसी वजह से कई NBFCs लगातार इस सेगमेंट पर अपना फोकस बढ़ा रही हैं और नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों की पेशकश कर रही हैं।
आगे क्या रह सकती है तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और लोगों की अल्पकालिक वित्तीय जरूरतें इसी तरह बढ़ती रहती हैं, तो गोल्ड लोन सेगमेंट में आने वाले महीनों में भी मजबूत ग्रोथ देखने को मिल सकती है। हालांकि, सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव इस बाजार की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है।


