नई दिल्ली: देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (Ethanol Blended Fuel) को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशों को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। जहां एक ओर E20 पेट्रोल को लेकर बहस जारी है, वहीं अब E100 पेट्रोल की मांग लगभग खत्म हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को 390 से अधिक E100 आउटलेट्स बंद करने पड़े हैं। अब कंपनियां E85 ईंधन के विस्तार को लेकर भी बेहद सतर्क नजर आ रही हैं।
400 से घटकर सिर्फ 5-6 आउटलेट बचे
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 400 पेट्रोल पंपों पर E100 ईंधन उपलब्ध कराया था। लेकिन ग्राहकों की ओर से मांग लगभग शून्य रहने के कारण अधिकांश आउटलेट्स बंद करने पड़े।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, फिलहाल केवल 5 से 6 आउटलेट्स पर ही E100 ईंधन उपलब्ध है। कंपनियां अब बाजार की मांग और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने का इंतजार कर रही हैं।
E100 और E85 में क्या है अंतर?
- E100: 100% इथेनॉल से तैयार ईंधन।
- E85: 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण।
इन दोनों ईंधनों का इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) इंजन वाली गाड़ियों में ही किया जा सकता है। भारत में ऐसे वाहनों की संख्या फिलहाल बेहद कम है, जिससे इन ईंधनों की मांग नहीं बन पा रही।
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
तेल कंपनियों का कहना है कि ऑटो कंपनियां धीरे-धीरे फ्लेक्स-फ्यूल वाहन लॉन्च कर रही हैं, लेकिन इनकी बिक्री अभी बहुत सीमित है। ऐसे में हर जगह नए E85 या E100 डिस्पेंसिंग सिस्टम लगाना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जब तक बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन सड़कों पर नहीं उतरते, तब तक नए इथेनॉल पंप खोलना व्यावहारिक नहीं होगा।
E25 पेट्रोल की योजना भी पड़ सकती है धीमी
सरकार भविष्य में E25 पेट्रोल लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है, लेकिन अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
इसकी वजह यह है कि अधिक इथेनॉल मिश्रण पुराने वाहनों के इंजन पर असर डाल सकता है।
किस वाहन में कितना इथेनॉल सुरक्षित?
- 2012 से मार्च 2023 के बीच बने अधिकांश वाहन E10 (10% इथेनॉल) के लिए डिजाइन किए गए थे।
- अप्रैल 2025 से पहले बने सभी वाहन पूरी तरह E20-रेडी भी नहीं माने जाते।
ऐसे में ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल सभी वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं है।
सस्ता होने के बावजूद क्यों नहीं बिक रहा E85?
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब ₹102.12 प्रति लीटर है, जबकि E85 की शुरुआती कीमत ₹82.12 प्रति लीटर रखी गई।
पहली नजर में E85 सस्ता दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक तस्वीर अलग है।
विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (Energy Density) पेट्रोल से कम होता है। इसका मतलब है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को अधिक इथेनॉल जलाना पड़ता है। इससे माइलेज कम हो जाता है और प्रति किलोमीटर ईंधन खर्च बढ़ जाता है।
पेट्रोल से महंगा पड़ सकता है इथेनॉल
थिंक टैंक CEEW (Council on Energy, Environment and Water) की रिपोर्ट के अनुसार:
- मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल, E100 की तुलना में 2% से 14% तक सस्ता साबित हो सकता है।
- माइलेज में कमी के कारण इथेनॉल की वास्तविक परिचालन लागत 15% से 25% तक अधिक पड़ सकती है।
यानी केवल प्रति लीटर कीमत कम होने से उपभोक्ता को कुल खर्च में फायदा नहीं मिलता।
कितना सस्ता होना चाहिए इथेनॉल?
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि इथेनॉल को पेट्रोल के मुकाबले वास्तव में किफायती बनाना है तो इसकी कीमत ₹52 से ₹63 प्रति लीटर के बीच होनी चाहिए। हालांकि यह स्तर वर्तमान उत्पादन लागत से भी कम है, इसलिए तेल कंपनियों के लिए इसे इतनी कम कीमत पर बेचना आसान नहीं होगा।
क्या आगे बदल सकती है रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत में बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन नहीं आते और इथेनॉल की कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी नहीं बनतीं, तब तक E85 और E100 जैसे ईंधनों का बड़े स्तर पर विस्तार मुश्किल रहेगा। फिलहाल सरकार का फोकस E20 के सफल क्रियान्वयन पर बना रहने की संभावना है।


