भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी ने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में अपनी अंतिम कानूनी लड़ाई भी हार दी है। अब ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया ही बाकी है।
Highlights
- ECHR में अंतिम कानूनी अपील भी खारिज, नीरव मोदी के सभी कानूनी विकल्प समाप्त।
- ब्रिटेन अब भारत प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
- 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है नीरव मोदी।
- PNB घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में CBI और ED को है उसकी तलाश।
नई दिल्ली: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के बहुचर्चित बैंकिंग घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत वापस लाने का रास्ता अब लगभग पूरी तरह साफ हो गया है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में दायर उसकी अंतिम कानूनी अपील भी खारिज हो चुकी है। इसके साथ ही ब्रिटेन में उपलब्ध उसके सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं और अब केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी हैं।
सूत्रों के अनुसार, ब्रिटिश प्रशासन ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं तो नीरव मोदी को जल्द ही भारत लाया जा सकता है, जहां उसे CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों का सामना करना होगा।
ECHR से भी नहीं मिली राहत
नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों में लगातार कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) का दरवाजा खटखटाया था। यह उसकी अंतिम कानूनी उम्मीद मानी जा रही थी।
हालांकि, ECHR ने उसकी याचिका पर कोई राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले अदालत ने उसकी याचिका को गोपनीय रखने की अनुमति दी थी, जिसके कारण इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी थी। स्ट्रॉसबर्ग स्थित यह अदालत आमतौर पर लंबित मामलों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करती।
अब जब ECHR ने भी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है, तो प्रत्यर्पण में कोई अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाधा शेष नहीं रह गई है।
ब्रिटेन हाई कोर्ट भी पहले दे चुका था झटका
ECHR पहुंचने से पहले नीरव मोदी को ब्रिटेन हाई कोर्ट से भी निराशा हाथ लगी थी। मार्च 2026 में लंदन स्थित हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस (King’s Bench Division) ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश पर दोबारा सुनवाई की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि भारत सरकार की ओर से जेल की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी माना कि नीरव मोदी का मामला ऐसा नहीं है जिसे दोबारा खोलने की आवश्यकता हो।
संजय भंडारी केस का दिया था हवाला
नीरव मोदी ने अपनी याचिका में रक्षा सौदों के कथित बिचौलिए संजय भंडारी के मामले का हवाला दिया था। उसने तर्क दिया कि यदि उसे भारत भेजा गया तो उसके साथ अमानवीय व्यवहार या प्रताड़ना हो सकती है।
लेकिन CBI ने अदालत में भारत की जेल व्यवस्था और सुरक्षा उपायों से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज पेश किए। अदालत इन दलीलों से संतुष्ट हुई और नीरव मोदी के तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
ब्रिटिश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नीरव मोदी की परिस्थितियां असाधारण नहीं हैं और इसलिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया रोकने का कोई आधार नहीं बनता।
2019 से लंदन की जेल में बंद
नीरव मोदी को मार्च 2019 में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। भारत की जांच एजेंसियां CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही हैं।
उस पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप हैं। इन मामलों की जांच कई वर्षों से जारी है।
अब आगे क्या होगा?
कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद अब गेंद पूरी तरह ब्रिटिश प्रशासन के पाले में है। प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक प्रशासनिक दस्तावेजों और औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। इसके बाद ब्रिटेन की सरकार नीरव मोदी को भारतीय अधिकारियों के हवाले करेगी।
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यदि किसी अप्रत्याशित बाधा का सामना नहीं करना पड़ा तो नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रत्यर्पण?
नीरव मोदी का प्रत्यर्पण केवल एक आरोपी को वापस लाने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय कानूनी और राजनयिक सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत आर्थिक अपराधों के आरोपियों को विदेशों से वापस लाने के लिए लगातार प्रयास करता रहा है।
यदि नीरव मोदी भारत आता है, तो उससे जुड़े बैंकिंग घोटाले, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों की जांच में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि बड़े आर्थिक अपराधों के आरोपी लंबे समय तक विदेशी अदालतों की आड़ लेकर कानून से बच नहीं सकते।
निष्कर्ष
यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में अंतिम अपील खारिज होने के बाद नीरव मोदी की सभी कानूनी संभावनाएं समाप्त हो चुकी हैं। अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। ऐसे में वर्षों से लंबित नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ती है, तो जल्द ही उसे भारत लाकर अदालतों के सामने पेश किया जा सकता है।


