Microsoft Layoffs: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है। कंपनी ने करीब 4,800 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया है, जो उसके कुल वर्कफोर्स का लगभग 2.1 फीसदी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब माइक्रोसॉफ्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश कर रही है। हालांकि AI कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बढ़ती लागत और निवेश के दबाव ने कंपनी को खर्च कम करने के लिए यह कठिन कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
AI पर भारी निवेश के बीच क्यों हुई छंटनी?
माइक्रोसॉफ्ट ने साफ किया है कि यह छंटनी किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के विभिन्न बिजनेस यूनिट्स में की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य संगठन को अधिक दक्ष (Efficient) बनाना और संसाधनों को AI आधारित प्रोजेक्ट्स की ओर स्थानांतरित करना है।
पिछले दो वर्षों में माइक्रोसॉफ्ट ने OpenAI के साथ साझेदारी को मजबूत करते हुए AI टेक्नोलॉजी में अरबों डॉलर का निवेश किया है। कंपनी अब अपने लगभग हर प्रोडक्ट—Windows, Microsoft 365, GitHub, Azure और Copilot—में AI फीचर्स जोड़ रही है। इन योजनाओं को सफल बनाने के लिए डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस चिप्स और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च किया जा रहा है।
2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान लगभग 190 अरब डॉलर तक के पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) का अनुमान लगाया है। यह खर्च मुख्य रूप से नए AI डेटा सेंटर, सर्वर क्षमता बढ़ाने और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर किया जाएगा।
पूरे टेक उद्योग में भी AI को लेकर निवेश तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि Microsoft, Amazon, Meta और Alphabet जैसी बड़ी कंपनियां मिलकर 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 700 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर सकती हैं।
शेयर बाजार में भी बना दबाव
माइक्रोसॉफ्ट के लिए 2026 की पहली छमाही शेयर बाजार के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का शेयर इस दौरान करीब 23 फीसदी तक टूट चुका है, जो 2022 के बाद पहला सबसे कमजोर शुरुआती प्रदर्शन माना जा रहा है।
निवेशकों की चिंता यह है कि AI पर भारी निवेश का वास्तविक वित्तीय लाभ आने में अभी समय लग सकता है, जबकि खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कारण कंपनी पर लागत कम करने और मुनाफे को संतुलित रखने का दबाव बढ़ा है।
इससे पहले भी दिया था Voluntary Buyout
यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट ने कर्मचारियों की संख्या घटाई है। इससे पहले कंपनी अमेरिका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को Voluntary Buyout (स्वैच्छिक सेपरेशन) का प्रस्ताव दे चुकी है।
माइक्रोसॉफ्ट हर वर्ष जून में वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद अपने बजट, प्राथमिकताओं और संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करती है। इसी प्रक्रिया के तहत कई बार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव किए जाते हैं।
Azure Cloud बना कंपनी की सबसे बड़ी ताकत
छंटनी के बावजूद माइक्रोसॉफ्ट का Azure Cloud कारोबार लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। AI सेवाओं की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा Azure को मिल रहा है।
कुछ समय पहले तक OpenAI के AI मॉडल्स का प्रमुख क्लाउड प्लेटफॉर्म Azure ही था। Copilot और अन्य AI सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता ने Azure की मांग को और मजबूत बनाया है। हालांकि इस मांग को पूरा करने के लिए विशाल डेटा सेंटर तैयार करना बेहद महंगा साबित हो रहा है।
Xbox बिजनेस पर भी पड़ा असर
AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स और हाई-एंड हार्डवेयर की जरूरत पड़ रही है। इससे हार्डवेयर की लागत बढ़ गई है।
इसी वजह से माइक्रोसॉफ्ट को अपने Xbox गेमिंग कंसोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ी है। दूसरी ओर गेमिंग हार्डवेयर की मांग पहले जैसी मजबूत नहीं रही, जिससे कंपनी के इस कारोबार पर भी दबाव बना हुआ है।
पूरे टेक सेक्टर में जारी है छंटनी का दौर
माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है जिसने AI निवेश के बीच कर्मचारियों की संख्या कम की है। 2026 में Amazon, Meta, Google और अन्य टेक कंपनियां भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI के कारण कई पारंपरिक और दोहराए जाने वाले कार्य अब ऑटोमेट हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियां अपने संसाधनों को AI रिसर्च, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-टेक इंजीनियरिंग जैसी प्राथमिकताओं की ओर स्थानांतरित कर रही हैं।
आगे क्या है माइक्रोसॉफ्ट की रणनीति?
विश्लेषकों के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट आने वाले वर्षों में AI को अपने कारोबार का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनाना चाहती है। कंपनी फिलहाल अल्पकालिक लागत कम करके दीर्घकालिक AI निवेश पर फोकस कर रही है। यदि AI सेवाओं की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो भविष्य में कंपनी को इस निवेश का बड़ा लाभ मिल सकता है, लेकिन फिलहाल बढ़ती लागत और निवेशकों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना उसकी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।


