नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली में कमी और रुपये आधारित परिसंपत्तियों के आकर्षक वैल्यूएशन ने देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है। आईएएसपीआई (IASPI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इन सकारात्मक कारकों के चलते आने वाले समय में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज हो सकती है और शेयर बाजार में भी नई तेजी देखने को मिल सकती है।
रिपोर्ट का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां कमोडिटी कीमतों में राहत, स्थिर वित्तीय हालात और मजबूत घरेलू मांग मिलकर विकास को नई गति दे सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा निवेशकों और कॉर्पोरेट सेक्टर को मिलने की संभावना है।
कच्चे तेल की नरमी बनी सबसे बड़ा सहारा
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलता है। इससे आयात बिल कम होता है, चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहता है और महंगाई पर भी दबाव घटता है।
आईएएसपीआई की रिपोर्ट के अनुसार, तेल की कीमतों में नरमी ने सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए आर्थिक प्रबंधन को आसान बनाया है। इससे ब्याज दरों पर दबाव कम होगा और निवेश का माहौल बेहतर बनने की उम्मीद है।
RBI आगे भी विकास को देगा समर्थन
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में विकास को समर्थन देने वाली मौद्रिक नीतियां जारी रख सकता है। यदि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता बनी रहती है तो सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी धीरे-धीरे गिरावट आ सकती है।
कम बॉन्ड यील्ड का फायदा कंपनियों और सरकार दोनों को मिलेगा क्योंकि उनके लिए पूंजी जुटाने की लागत घटेगी। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है।
मांग में सुधार से बढ़ेगी आर्थिक रफ्तार
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध है और घरेलू मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। यदि यह रुझान जारी रहता है तो वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान आर्थिक वृद्धि की गति और तेज हो सकती है।
आईएएसपीआई का मानना है कि मजबूत नॉमिनल ग्रोथ कॉर्पोरेट इंडिया की बिक्री और मुनाफे दोनों को बढ़ावा देगी। इससे कंपनियों की कमाई बेहतर होगी और शेयर बाजार को भी समर्थन मिलेगा।
बैलेंस ऑफ पेमेंट्स बना बड़ी ताकत
जिस बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) को कुछ समय पहले तक बाजार के लिए जोखिम माना जा रहा था, वही अब भारत की बड़ी मजबूती बनता दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में निवेश वाली परिसंपत्तियों पर बेहतर रिटर्न, विदेशी डेट निवेश में बढ़ोतरी और एफपीआई आउटफ्लो में कमी ने देश की बाहरी आर्थिक स्थिति को काफी मजबूत किया है।
रुपये की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा
आईएएसपीआई की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में भारत का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) 88 के नीचे पहुंच गया, जो आमतौर पर केवल गंभीर आर्थिक दबाव के समय देखने को मिलता है।
इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच महंगाई का अंतर भी कम हुआ है। इससे लंबे समय में रुपये के तेज अवमूल्यन की आशंका घटी है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर मजबूत हुआ है।
लार्ज-कैप शेयरों में दिख रहा सबसे बड़ा अवसर
रिपोर्ट में शेयर बाजार के लिहाज से लार्ज-कैप कंपनियों को सबसे आकर्षक निवेश विकल्प बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉर्पोरेट आय में सुधार जारी रहता है तो बड़ी कंपनियों के शेयर मिडकैप और स्मॉलकैप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मौजूदा समय में कई बड़ी कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं, जिससे उनमें तेजी की संभावना बढ़ गई है।
सीमेंट सेक्टर को मिल सकता है बड़ा फायदा
आर्थिक गतिविधियों में तेजी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ सीमेंट उद्योग को मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी से लंबे समय से दबाव झेल रहे सीमेंट सेक्टर के परिचालन प्रदर्शन में सुधार आएगा। साथ ही मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और बढ़ती मांग इस उद्योग के लिए अतिरिक्त सकारात्मक कारक साबित हो सकती है।
आईटी सेक्टर को लेकर बनी हुई है चिंता
हालांकि रिपोर्ट आईटी सेक्टर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। इसमें कहा गया है कि आईटी कंपनियों के शेयर फिलहाल वैल्यूएशन के लिहाज से आकर्षक जरूर हैं, लेकिन उनकी भविष्य की ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर की सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय मांग में उतार-चढ़ाव भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चुनौती बने रह सकते हैं।
उभरते बाजारों में भारत की बढ़ी अहमियत
आईएएसपीआई के मुताबिक इस समय अधिकांश उभरते बाजारों की तेजी मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी कंपनियों पर निर्भर है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में टेक शेयरों का दबदबा इतना अधिक हो गया है कि वहां बाजार कुछ चुनिंदा कंपनियों पर केंद्रित होता जा रहा है।
इसके विपरीत भारत का शेयर बाजार बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमर सेक्टर जैसे कई उद्योगों में संतुलित रूप से फैला हुआ है। यही विविधता भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और आकर्षक निवेश गंतव्य बनाती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, एफपीआई निवेश में सुधार जारी रहता है और घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। खासकर लार्ज-कैप, बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमेंट सेक्टर निवेशकों के लिए बेहतर अवसर प्रदान कर सकते हैं।


