विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारत के टॉप 10 शेयरों में FII हिस्सेदारी 20 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। जानिए इसका बाजार पर असर, किन शेयरों में गिरावट आई और निवेशकों को अब क्या रणनीति अपनानी चाहिए।
Share Market News: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से टॉप कंपनियों में FII हिस्सेदारी घटी
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors – FII) की लगातार बिकवाली देखने को मिली है। इसका सबसे बड़ा असर देश की बड़ी और दिग्गज कंपनियों पर पड़ा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की टॉप 10 लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेशकों की औसत हिस्सेदारी पिछले 20 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
DSP म्यूचुअल फंड के आंकड़ों के मुताबिक इन कंपनियों में FII की औसत हिस्सेदारी फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के करीब 34% रह गई है। यह स्तर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान दर्ज 37% से भी नीचे है। वहीं कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में इन 10 बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी दिसंबर 2019 के 39% के शिखर से घटकर अब लगभग 17% पर आ गई है।
किन वजहों से बढ़ी विदेशी निवेशकों की बिकवाली?
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं।
इनमें प्रमुख कारण हैं:
- अमेरिका और अन्य विकसित देशों में ऊंची ब्याज दरें।
- डॉलर की मजबूती और रुपये पर दबाव।
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव।
- उभरते बाजारों से पूंजी का निकलना।
- भारतीय बाजार में पिछले वर्षों के मुकाबले ऊंचे वैल्यूएशन।
इन परिस्थितियों में विदेशी निवेशकों ने भारत सहित कई उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया।
इन बड़ी कंपनियों में सबसे ज्यादा घटी विदेशी हिस्सेदारी
DSP Mutual Fund के आंकड़ों से पता चलता है कि कई ब्लू-चिप कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में काफी कम हुई है।
| कंपनी | पहले का उच्च स्तर | मार्च 2026 |
|---|---|---|
| एक्सिस बैंक | 68% | 44% |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 59% | 36% |
| एचडीएफसी बैंक | 44% | 38% |
| टीसीएस | 63% | 34% |
| इंफोसिस | 49% | 30% |
| आईसीआईसीआई बैंक | 40% | 34% |
| रिलायंस इंडस्ट्रीज | 36% से ऊपर के स्तर से गिरावट | 36% के आसपास |
हालांकि आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज में अन्य कंपनियों की तुलना में विदेशी हिस्सेदारी में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही है।
विशेषज्ञों की राय: लार्ज-कैप शेयर फिर बन सकते हैं आकर्षक
DSP Mutual Fund के मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट साहिल कपूर का कहना है कि मौजूदा समय में बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयर पहले की तुलना में अधिक आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं।
उनके अनुसार यदि आने वाले समय में:
- रुपये में स्थिरता आती है,
- वैश्विक तनाव कम होते हैं,
- और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती है,
तो इन लार्ज-कैप शेयरों में विदेशी निवेश फिर लौट सकता है। ऐसी स्थिति में इन कंपनियों के शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को केवल विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना अधिक समझदारी हो सकती है।
निवेश रणनीति
- मजबूत बैलेंस शीट वाली लार्ज-कैप कंपनियों पर नजर रखें।
- एकमुश्त निवेश के बजाय SIP या चरणबद्ध निवेश अपनाएं।
- केवल बाजार की गिरावट देखकर जल्दबाजी में खरीदारी या बिकवाली न करें।
- पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें।
- निवेश का फैसला हमेशा अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार लें।
लार्ज-कैप बनाम स्मॉल-कैप: किसमें बेहतर अवसर?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि स्मॉल-कैप कंपनियों में कमाई और प्रदर्शन का अंतर काफी बड़ा होता है। वहीं लार्ज-कैप कंपनियों की आय वृद्धि अपेक्षाकृत स्थिर रहती है और आमतौर पर 5% से 20% के दायरे में रहती है।
यदि विदेशी निवेशकों की वापसी होती है तो सबसे पहले फायदा बड़ी कंपनियों को मिलने की संभावना अधिक मानी जा रही है। ऐसे में लार्ज-कैप शेयर आने वाले वर्षों में बेहतर रिटर्न देने की स्थिति में हो सकते हैं।
निष्कर्ष
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारत की शीर्ष कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी को दो दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ इसे पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं मानते। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी स्थिति वाली लार्ज-कैप कंपनियां मौजूदा समय में आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं और वैश्विक परिस्थितियां सुधरने पर इनमें विदेशी निवेश फिर लौट सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय घबराने के बजाय गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर रखने और अनुशासित निवेश रणनीति अपनाने का हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


