नई दिल्ली: अगर आप विदेश से ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं, तो आने वाले समय में यह पहले से महंगी पड़ सकती है। यूरोपीय यूनियन (EU) ने कम कीमत वाले आयातित सामान पर 3 यूरो की एकसमान कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते सामान के बढ़ते आयात पर नियंत्रण करना, स्थानीय कारोबार को संरक्षण देना और कस्टम प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत 150 यूरो तक के आयातित सामान पर मिलने वाली कस्टम ड्यूटी छूट समाप्त कर दी गई है। इसका असर खास तौर पर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो चीन, अमेरिका या अन्य देशों से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे-मोटे सामान मंगाते हैं।
3 यूरो की नई ड्यूटी क्या है?
यूरोपीय यूनियन की कर और कस्टम व्यवस्था में किए गए इस बदलाव के अनुसार, हर योग्य डिजिटल ऑर्डर पर 3 यूरो की एक समान कस्टम ड्यूटी लागू होगी। यह शुल्क प्रत्येक शिपमेंट या ऑर्डर लाइन के आधार पर लगाया जाएगा।
इसका मतलब है कि यदि किसी ग्राहक ने अलग-अलग उत्पाद ऑर्डर किए हैं, तो प्रत्येक शिपमेंट पर अलग शुल्क लग सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ऑर्डर की कुल कीमत 6 यूरो है और उस पर 9 यूरो तक अतिरिक्त शुल्क लग जाए, तो कुल खर्च 15 यूरो तक पहुंच सकता है।
150 यूरो तक की छूट खत्म
अब तक यूरोपीय यूनियन में 150 यूरो तक के कम मूल्य वाले आयातित सामान को विशेष कस्टम छूट मिलती थी। नई व्यवस्था में यह छूट समाप्त कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे अधिक असर चीन से आने वाले कम कीमत वाले उत्पादों पर पड़ेगा, क्योंकि यूरोप में बड़ी संख्या में उपभोक्ता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और घरेलू सामान खरीदते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग और डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं
नई ड्यूटी लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को केवल कस्टम शुल्क ही नहीं बल्कि अतिरिक्त डिलीवरी या हैंडलिंग चार्ज भी देना पड़ सकता है।
यदि कोई पार्सल नए नियम लागू होने के बाद कस्टम से गुजरता है, तो कूरियर कंपनियां ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूल सकती हैं, भले ही खरीदारी के समय यह राशि बिल में शामिल न रही हो।
इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन शॉपिंग की कुल लागत पर दिखाई देगा।
कब तक लागू रहेगा नया नियम?
यूरोपीय यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष 3 यूरो शुल्क अस्थायी व्यवस्था है और 1 जुलाई 2028 तक लागू रहेगा।
इसके बाद सभी ई-कॉमर्स आयातित सामान पर सामान्य टैरिफ दरों के अनुसार शुल्क लगाया जाएगा, चाहे उत्पाद की कीमत कितनी भी हो।
हर पार्सल को माना जाएगा अलग शिपमेंट
नए नियमों के तहत प्रत्येक पार्सल को अलग शिपमेंट माना जाएगा। इसलिए यदि किसी ग्राहक ने कई छोटे ऑर्डर किए हैं, तो प्रत्येक पर अलग शुल्क लग सकता है।
ड्यूटी का भुगतान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उस पक्ष की होगी जो कस्टम घोषणा करता है। इसमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विक्रेता या कस्टम प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। कूरियर कंपनियां यह राशि अंतिम उपभोक्ता से वसूल सकती हैं।
फर्जी घोषणाओं पर भी लगेगी रोक
यूरोपीय यूनियन ने गलत उत्पाद विवरण और कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए प्रोडक्ट आइडेंटिफायर सिस्टम भी शुरू किया है।
इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक उत्पाद को एक विशेष पहचान कोड दिया जाएगा, जिसे कस्टम अधिकारी स्कैन कर सकेंगे। इससे सामान की सही पहचान, ट्रेसिंग और टैक्स निर्धारण में आसानी होगी तथा गलत घोषणाओं पर अंकुश लगेगा।
भारत पर क्या होगा असर?
यह फैसला मुख्य रूप से यूरोपीय यूनियन के आयात नियमों से जुड़ा है, इसलिए भारत में घरेलू ऑनलाइन शॉपिंग पर इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हालांकि, जो भारतीय ग्राहक यूरोप में रहते हैं या यूरोपीय यूनियन के पते पर चीन या अन्य देशों से ऑनलाइन सामान मंगाते हैं, उन्हें अब अधिक शुल्क चुकाना पड़ सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनियों की लॉजिस्टिक्स और मूल्य निर्धारण रणनीतियों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
यूरोपीय यूनियन का यह कदम केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सस्ते आयातित सामान पर नियंत्रण, स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा और कस्टम व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना भी है। 3 यूरो की एकसमान ड्यूटी और 150 यूरो तक की छूट समाप्त होने से विदेशी ऑनलाइन शॉपिंग की लागत बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों और वैश्विक ई-कॉमर्स कारोबार पर भी असर पड़ सकता है.
(Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर तैयार किया गया है। नियमों के अंतिम क्रियान्वयन और शुल्क संरचना में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।)


