इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के शेयरों में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। सरकार द्वारा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने के बाद शेयर करीब 5 फीसदी तक टूट गया। सरकार ने इस OFS के लिए 91 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है, जबकि शेयर हाल के दिनों में 100 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि आखिर सरकार ने इतना डिस्काउंट क्यों दिया?
Highlights
- सरकार IRFC में 2% हिस्सेदारी OFS के जरिए बेच रही है।
- फ्लोर प्राइस 91 रुपये प्रति शेयर रखा गया है।
- OFS की घोषणा के बाद शेयर में करीब 5% की गिरावट।
- रिटेल निवेशकों को भी डिस्काउंट पर शेयर खरीदने का मौका।
- सरकार का लक्ष्य विनिवेश के जरिए संसाधन जुटाना है।
नई दिल्ली। रेलवे सेक्टर की नवरत्न कंपनी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के शेयरों पर बुधवार को दबाव देखने को मिला। सरकार ने कंपनी में अपनी 2 फीसदी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचने का फैसला किया है। इसके साथ ही 1 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीनशू ऑप्शन भी रखा गया है।
OFS की घोषणा के बाद बाजार में बिकवाली बढ़ी और IRFC का शेयर 94 रुपये के स्तर पर खुलने के बाद शुरुआती कारोबार में 93.18 रुपये तक फिसल गया। शेयर में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
सरकार ने ₹91 का फ्लोर प्राइस क्यों रखा?
OFS के तहत शेयर बेचते समय सरकार आमतौर पर बाजार भाव से कुछ कम कीमत तय करती है ताकि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिले और पूरा इश्यू सफलतापूर्वक सब्सक्राइब हो सके। यही वजह है कि IRFC के लिए 91 रुपये का फ्लोर प्राइस रखा गया है।
इस रणनीति के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:
- बड़े संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करना।
- OFS को पूरी तरह सफल बनाना।
- सरकार के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करना।
- रिटेल निवेशकों को बाजार भाव से कम कीमत पर निवेश का अवसर देना।
हालांकि डिस्काउंट वाले फ्लोर प्राइस की वजह से बाजार में अक्सर शेयरों पर दबाव बन जाता है, क्योंकि निवेशक कम कीमत पर उपलब्ध होने वाले शेयरों का इंतजार करते हैं।
नॉन-रिटेल और रिटेल निवेशकों के लिए अलग-अलग विंडो
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के अनुसार, OFS का पहला दिन नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए रखा गया है। वहीं रिटेल निवेशक 25 जून को बोली लगा सकेंगे।
रिटेल निवेशकों के लिए यह अवसर इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्हें बाजार मूल्य से कम कीमत पर सरकारी कंपनी के शेयर खरीदने का मौका मिल सकता है।
क्या है सरकार की बड़ी रणनीति?
IRFC में हिस्सेदारी बिक्री सरकार के व्यापक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर संसाधन जुटा रही है।
21 मई के बाद सरकार विभिन्न OFS के जरिए 16,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुकी है। हाल के महीनों में सरकार ने कई प्रमुख सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेची है, जिनमें शामिल हैं:
- कोल इंडिया
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- NLC इंडिया
- NHPC
- GIC (जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया)
रेलवे की फंडिंग में अहम भूमिका निभाती है IRFC
IRFC रेल मंत्रालय के तहत काम करने वाली नवरत्न कंपनी है। यह भारतीय रेलवे की समर्पित वित्तीय शाखा के रूप में कार्य करती है और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, नए प्रोजेक्ट्स तथा रोलिंग स्टॉक की खरीद के लिए फंड जुटाने का काम करती है।
कंपनी लंबे समय से रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता प्रदान करती रही है, इसलिए इसे रेलवे सेक्टर की महत्वपूर्ण कंपनियों में गिना जाता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
OFS के दौरान शेयरों में अस्थायी दबाव देखना सामान्य बात है। कई बार डिस्काउंट पर शेयर उपलब्ध होने के कारण बाजार मूल्य नीचे आ जाता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की बुनियादी स्थिति, आय वृद्धि और भविष्य की संभावनाएं अधिक महत्वपूर्ण होती हैं।
निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यहां दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


