नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ी से बढ़ती पकड़ और वैश्विक बाजारों में बनी अनिश्चितता का असर अब भारतीय आईटी सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म JPMorgan Chase ने भारतीय आईटी उद्योग को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए HCLTech, Wipro और Tata Technologies के शेयरों की रेटिंग डाउनग्रेड कर दी है। इसके साथ ही इन कंपनियों के शेयरों के लिए निर्धारित लक्ष्य मूल्य (Target Price) में भी कटौती की गई है।
ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि जनरेटिव AI (GenAI) के विस्तार, टेक्नोलॉजी बजट पर बढ़ते दबाव और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण आईटी सेवाओं की मांग पर असर पड़ रहा है। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में सेक्टर की ग्रोथ उम्मीद से कमजोर रह सकती है।
क्यों बदला जेपी मॉर्गन का नजरिया?
जेपी मॉर्गन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आईटी सर्विस कंपनियां इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कंपनियों के ग्राहक अब AI आधारित ऑटोमेशन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक आईटी सेवाओं के बजट पर दबाव बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि GenAI के कारण सेवाओं की कीमतों में गिरावट (AI Deflation) देखने को मिल रही है। इसके अलावा अमेरिका और अन्य प्रमुख बाजारों में आर्थिक अनिश्चितता तथा जियोपॉलिटिकल तनाव भी कॉर्पोरेट आईटी खर्च को प्रभावित कर रहे हैं।
ब्रोकरेज के मुताबिक इन परिस्थितियों में भारतीय आईटी कंपनियों के लिए तेज ग्रोथ हासिल करना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो सकता है।
HCLTech, विप्रो और टाटा टेक्नोलॉजीज के नए टार्गेट
जेपी मॉर्गन ने तीनों कंपनियों के लिए अपने लक्ष्य मूल्य में कटौती की है।
| कंपनी | नया टार्गेट | पुराना टार्गेट | मंगलवार का क्लोजिंग भाव |
|---|---|---|---|
| HCLTech | ₹1,000 | ₹1,370 | ₹1,109.90 |
| Wipro | ₹160 | ₹200 | ₹174.50 |
| Tata Technologies | ₹540 | ₹560 | ₹758.60 |
सबसे बड़ी कटौती HCLTech के टार्गेट में की गई है, जहां लक्ष्य मूल्य को ₹1,370 से घटाकर ₹1,000 कर दिया गया। वहीं विप्रो और टाटा टेक्नोलॉजीज के लिए भी अपेक्षाकृत कम लेकिन महत्वपूर्ण कटौती देखने को मिली है।
भारतीय IT सेक्टर की ग्रोथ क्यों फंसी हुई है?
जेपी मॉर्गन का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से भारतीय आईटी सर्विस इंडस्ट्री की राजस्व वृद्धि (Revenue Growth) लगभग 2% से 3% के बीच सीमित रही है। इसका प्रमुख कारण ग्राहकों द्वारा खर्च में सतर्कता और नई तकनीकों के कारण बिजनेस मॉडल में हो रहे बदलाव हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि AI डिफ्लेशन अभी शुरुआती चरण में है और इसका प्रभाव आने वाले दो वर्षों तक बना रह सकता है। ऐसे में कंपनियों को नए ऑर्डर हासिल करने और मार्जिन बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
आगे क्या है अनुमान?
रिपोर्ट के अनुसार बड़ी भारतीय आईटी कंपनियां आने वाले वर्षों में मिड-सिंगल डिजिट ग्रोथ यानी लगभग 3% से 5% के बीच राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकती हैं। हालांकि AI से जुड़े नए अवसर लंबे समय में उद्योग के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, लेकिन निकट अवधि में इससे पारंपरिक आईटी सेवाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आईटी सेक्टर में आगे बढ़ते समय कंपनियों की AI रणनीति, नए ऑर्डर और वैश्विक मांग की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
डिस्क्लेमर
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