Tata Trusts Controversy: टाटा समूह में फिर उठा नया विवाद
नई दिल्ली। भारत के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में से एक टाटा समूह एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन और ट्रस्टियों की भूमिका से जुड़ा है। दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के करीबी सहयोगी रहे मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को मिलने वाली 1.42 करोड़ रुपये की वार्षिक फीस पर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष दायर एक हलफनामे में मिस्त्री ने दावा किया है कि नोएल टाटा को वित्त वर्ष 2024-25 से टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड से 1.42 करोड़ रुपये का सालाना कमीशन प्राप्त हो रहा है। मिस्त्री का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों को मिलने वाले ऐसे भुगतान और कुछ अन्य फैसलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उस समय सामने आया जब मेहली मिस्त्री ने पहले सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और अब सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) से हटाए जाने को लेकर कानूनी चुनौती दी है। हालांकि अपने ताजा हलफनामे में उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य ट्रस्ट में वापसी पाना नहीं बल्कि कथित अनियमितताओं को उजागर करना है।
मिस्त्री के अनुसार, उन्होंने ट्रस्ट की बैठकों में कुछ ऐसे मामलों पर सवाल उठाए थे जिन्हें वह हितों के टकराव और ट्रस्ट फंड के संभावित नुकसान से जुड़ा मानते हैं। उनका दावा है कि इन मुद्दों को उठाने के बाद उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया।
नोएल टाटा को लेकर क्या आरोप लगाए गए?
हलफनामे के अनुसार मेहली मिस्त्री ने कहा है कि नोएल टाटा को टाटा संस से वार्षिक कमीशन प्राप्त हो रहा है। मिस्त्री का तर्क है कि ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदों पर बैठे व्यक्तियों के वित्तीय हितों को लेकर अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कंपनी के बोर्ड सदस्य या निदेशक को मिलने वाला पारिश्रमिक भारतीय कॉरपोरेट ढांचे में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। इस मामले में अभी तक किसी नियामक संस्था ने किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि नहीं की है।
विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन भी विवाद में क्यों आए?
मेहली मिस्त्री ने अपने हलफनामे में रिटायर्ड डिफेंस सेक्रेटरी और टाटा ट्रस्टी विजय सिंह के खिलाफ भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि टाटा समूह की कंपनियों से लिए गए कुछ भुगतान और भूमिकाएं हितों के टकराव से जुड़ी हो सकती हैं।
इसके अलावा TVS मोटर के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन पर भी हितों के टकराव का आरोप लगाया गया है। मिस्त्री का कहना है कि जगुआर लैंड रोवर के पूर्व क्रिएटिव हेड को उनकी निजी कंपनी के लिए नियुक्त करने के मामले में संभावित हितों के टकराव की जांच होनी चाहिए।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
टाटा ट्रस्ट्स का महत्व क्यों है?
टाटा ट्रस्ट्स भारत की सबसे बड़ी परोपकारी संस्थाओं में गिने जाते हैं। टाटा संस में ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी है और समूह के दीर्घकालिक रणनीतिक फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, विज्ञान और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में टाटा ट्रस्ट्स दशकों से काम कर रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट्स से जुड़े किसी भी विवाद पर निवेशकों, कॉरपोरेट जगत और सामाजिक क्षेत्र की विशेष नजर रहती है।
मेहली मिस्त्री का क्या कहना है?
मेहली मिस्त्री ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह ट्रस्ट में पुनर्नियुक्ति नहीं चाहते। उनका उद्देश्य केवल उन मुद्दों को सामने लाना है जिन्हें वह ट्रस्ट प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मानते हैं।
उनका दावा है कि उन्होंने बोर्ड बैठकों में उठाए गए सवालों के कारण विरोध का सामना किया और बाद में उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया। दूसरी ओर, इस मामले में अंतिम निर्णय महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
आगे क्या हो सकता है?
कॉरपोरेट गवर्नेंस और ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े मामलों में आरोप और जवाब दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। फिलहाल यह मामला कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी पक्ष पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
हालांकि यह विवाद एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ले आया है कि बड़े कॉरपोरेट ट्रस्ट्स और उनकी सहयोगी कंपनियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और हितों के टकराव से जुड़े मानकों को किस तरह और मजबूत बनाया जा सकता है।


