टाटा ग्रुप के अंदर एक बार फिर गवर्नेंस को लेकर हलचल तेज हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट किया है। इसके बाद दोनों का ट्रस्टी के रूप में कार्यकाल खत्म हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोबारा नियुक्ति के लिए सभी ट्रस्टियों की सर्वसम्मति जरूरी थी, लेकिन कई ट्रस्टियों ने विरोध में वोट किया। इसके चलते दोनों की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव पास नहीं हो सका।
क्या हुआ पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार नोएल टाटा ने वोटिंग की डेडलाइन खत्म होने से ठीक एक दिन पहले शनिवार देर शाम अपना वोट डाला।
इससे पहले मेहली मिस्त्री और जे.एन. मिस्त्री के भी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट करने की खबरें सामने आई थीं। चूंकि दोबारा नियुक्ति के लिए unanimous approval यानी सभी ट्रस्टियों की सहमति जरूरी थी, इसलिए विरोध के बाद प्रस्ताव खारिज हो गया।
अब क्या होगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के internal circular में साफ कहा गया है कि पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पास नहीं हुए और 10 मई से दोनों ट्रस्टी नहीं रहेंगे।
सर्कुलर के अनुसार वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह का कार्यकाल मौजूदा tenure पूरा होने के साथ समाप्त हो जाएगा।
क्या है Tata Education and Development Trust?
TEDT यानी Tata Education and Development Trust, Tata Trusts नेटवर्क का एक बड़ा और महत्वपूर्ण ट्रस्ट माना जाता है।
हालांकि यह Tata Sons का shareholder नहीं है, लेकिन यह education-focused philanthropic initiatives चलाता है, scholarship programs को support करता है और हजारों करोड़ रुपये के funds manage करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TEDT करीब ₹5,000 करोड़ से ज्यादा के फंड का प्रबंधन करता है।
क्यों बढ़ी गवर्नेंस को लेकर हलचल?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ ट्रस्टी नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि Tata Trusts के अंदर governance structure को लेकर चल रही बड़ी हलचल का हिस्सा माना जा रहा है।
दरअसल Tata Trusts, Tata Sons को नियंत्रित करता है और Tata Sons ही पूरे Tata Group की holding company है। यानी ट्रस्ट्स के भीतर होने वाले फैसलों का असर पूरे समूह पर पड़ सकता है।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में क्या चल रहा?
इससे पहले रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust की बैठकों में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
इन मुद्दों में Tata Sons Board representation, Tata Sons Chairman N Chandrasekaran का भविष्य और कुछ Tata Group कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़ी चिंताएं शामिल बताई जा रही हैं।
भास्कर भट्ट की एंट्री पर भी चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक Titan Company के पूर्व MD Bhaskar Bhat को Tata Sons Board में शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही Tata Sons Board में Tata Trusts के nominee director के तौर पर वेणु श्रीनिवासन की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Tata Group के governance structure में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
क्यों टली बड़ी बैठक?
दो प्रमुख Tata Trusts की meetings पहले 8 मई को होनी थीं, लेकिन अब उन्हें 16 मई तक के लिए टाल दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह देरी इस बात का संकेत हो सकती है कि अंदरूनी स्तर पर चर्चा जारी है और governance issues पर consensus बनाने की कोशिश की जा रही है।
बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
Tata Group भारत के सबसे बड़े और भरोसेमंद business groups में से एक माना जाता है। ऐसे में governance changes, leadership decisions और board-level developments पर निवेशकों और बाजार की नजर बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह मामला governance restructuring के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन आगे चलकर इसका असर group strategy और leadership structure पर भी पड़ सकता है।
FAQ
नोएल टाटा ने किसके खिलाफ वोट किया?
वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ।
कौन से ट्रस्ट का मामला है?
Tata Education and Development Trust (TEDT) का।
दोनों ट्रस्टी कब से पद पर नहीं रहेंगे?
10 मई से उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
TEDT क्या काम करता है?
यह education और scholarship-based philanthropic initiatives चलाता है।
Tata Trusts क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि Tata Trusts, Tata Sons को नियंत्रित करता है।
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