पश्चिम बंगाल लंबे समय से देश के औद्योगिक नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अब राज्य सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0) स्कीम का लाभ उठाकर पश्चिम बंगाल अपने मौजूदा औद्योगिक ढांचे का विस्तार करने की योजना बना रहा है। इस पहल को राज्य में निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री में शामिल हैं। केंद्र सरकार भी देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की यह पहल राज्य को नए निवेश और रोजगार के अवसर दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
EMC 2.0 स्कीम के जरिए नई औद्योगिक रणनीति पर काम
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार केंद्र सरकार की EMC 2.0 स्कीम के तहत अपने मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर्स का विस्तार करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। राज्य सरकार विशेष रूप से नैहाटी और फाल्टा में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स को मजबूत करने पर विचार कर रही है।
ये दोनों क्लस्टर्स केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की पुरानी योजना के तहत विकसित किए गए थे। अब सरकार इन क्षेत्रों में अतिरिक्त बुनियादी ढांचे का निर्माण, नई फैक्ट्रियों की स्थापना और निवेश आकर्षित करने की संभावनाएं तलाश रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य EMC 2.0 के तहत अतिरिक्त केंद्रीय सहायता हासिल करने में सफल रहता है तो यह पूर्वी भारत के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन केंद्रों में से एक बन सकता है।
पश्चिम बंगाल को क्यों दिख रहा है बड़ा अवसर?
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का तेजी से विस्तार हो रहा है। मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर हार्डवेयर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी सप्लाई चेन में भारी निवेश देखा जा रहा है। अब तक इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों का दबदबा रहा है।
पश्चिम बंगाल सरकार का मानना है कि राज्य की भौगोलिक स्थिति उसे एक अतिरिक्त लाभ देती है। कोलकाता बंदरगाह, पूर्वोत्तर भारत तक पहुंच, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों से नजदीकी राज्य को लॉजिस्टिक्स के लिहाज से मजबूत बनाती है।
इसी वजह से सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डेटा सेंटर, आईटी-इनेबल्ड सर्विसेज (ITeS), एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर सपोर्ट इंडस्ट्री में भी निवेश आकर्षित करना चाहती है।
नैहाटी और फाल्टा क्लस्टर्स पर रहेगा फोकस
राज्य सरकार फिलहाल दो प्रमुख क्लस्टर्स पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। इनमें नैहाटी और फाल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स शामिल हैं।
नैहाटी क्लस्टर लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है जबकि फाल्टा क्लस्टर का आकार करीब 58 एकड़ है। दोनों क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त खाली क्षमता उपलब्ध बताई जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये दोनों स्थान कोलकाता से लगभग दो घंटे की दूरी पर स्थित हैं, जिससे उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक और मानव संसाधन उपलब्धता आसान हो जाती है।
सरकार का मानना है कि पूरी तरह नए औद्योगिक पार्क विकसित करने के बजाय पहले से मौजूद क्लस्टर्स का विस्तार करना अधिक व्यावहारिक और कम लागत वाला विकल्प साबित हो सकता है।
नई जमीन की पहचान भी शुरू
राज्य सरकार भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए निवेश क्षेत्रों की पहचान भी कर रही है। हालांकि, नए लैंड बैंक का निर्माण आसान नहीं माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और बुनियादी ढांचे के विकास जैसी प्रक्रियाओं में काफी समय लग सकता है।
यही कारण है कि फिलहाल सरकार मौजूदा क्लस्टर्स में अतिरिक्त निवेश आकर्षित करने पर जोर दे रही है। इसके साथ ही डेटा सेंटर और औद्योगिक भूमि से जुड़ी नई नीतियां तैयार की जा रही हैं ताकि निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
उद्योग जगत का मानना है कि यदि नीति निर्माण की प्रक्रिया तेज रहती है तो आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल पूर्वी भारत का महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स हब बन सकता है।
क्या है EMC 2.0 स्कीम?
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0) योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में की थी। इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
योजना के तहत केंद्र सरकार रेडी-बिल्ट फैक्ट्री शेड, सड़क, बिजली, जल आपूर्ति, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग प्रदान करती है।
हालांकि यह सहायता प्रति 100 एकड़ भूमि पर अधिकतम 70 करोड़ रुपये तक सीमित रहती है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत देश के 10 राज्यों में 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी थी जिनमें 123 भूमि आवंटी शामिल थे।
मार्च 2024 में इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया बंद हो चुकी है। ऐसे में पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि क्या पुराने EMC 1.0 क्लस्टर्स को अपग्रेड करने के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जा सकती है।
केंद्र सरकार की शर्तें आसान नहीं
EMC 2.0 योजना के तहत अतिरिक्त सहायता हासिल करने के लिए पश्चिम बंगाल को कई सख्त शर्तों को पूरा करना होगा।
सबसे पहले मौजूदा क्लस्टर्स से सटी कम से कम 100 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होनी चाहिए। इसके अलावा क्लस्टर की कम से कम 80 प्रतिशत बिक्री योग्य या लीज योग्य भूमि उद्योगों को आवंटित होनी चाहिए।
एक अन्य महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवंटित भूमि प्राप्त करने वाली कम से कम 50 प्रतिशत इकाइयों में वास्तविक उत्पादन शुरू हो चुका हो। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता का लाभ केवल उन्हीं परियोजनाओं को मिले जहां वास्तविक औद्योगिक गतिविधियां हो रही हों।
डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निवेश पर भी नजर
पश्चिम बंगाल केवल पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहता। राज्य सरकार की रणनीति में डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई कंप्यूटिंग सुविधाएं और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से जुड़े निवेश भी शामिल हैं।
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कई योजनाएं शुरू कर चुकी है। ऐसे में यदि पश्चिम बंगाल निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में सफल रहता है तो उसे इन योजनाओं का भी फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स के आसपास डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी पार्क विकसित होने से राज्य में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है मंजूरी प्रक्रिया
हालांकि निवेश आकर्षित करने की दिशा में राज्य सरकार सक्रिय नजर आ रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या परियोजनाओं और आवेदनों के निपटारे में लगने वाला समय है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पश्चिम Bengal Right to Public Services Act, 2013 के तहत कुछ औद्योगिक आवेदनों के निपटारे की अधिकतम समय सीमा 50 दिन निर्धारित है। इसके बावजूद कुछ मामलों में औसतन 235 दिन तक का समय लगने की जानकारी सामने आई है।
उद्योग जगत लंबे समय से सिंगल विंडो क्लियरेंस और तेज मंजूरी प्रक्रिया की मांग करता रहा है। यदि राज्य सरकार इस चुनौती को दूर करने में सफल रहती है तो निवेश आकर्षित करने की उसकी क्षमता और मजबूत हो सकती है।
क्या पश्चिम बंगाल बन सकता है अगला इलेक्ट्रॉनिक्स हब?
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का आकार लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का नया निवेश आने की संभावना है। पश्चिम बंगाल EMC 2.0 योजना के माध्यम से इस अवसर का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
नैहाटी और फाल्टा जैसे मौजूदा क्लस्टर्स का विस्तार, नई औद्योगिक नीतियां, डेटा सेंटर निवेश की संभावनाएं और केंद्र सरकार का समर्थन राज्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि भूमि उपलब्धता, मंजूरी प्रक्रिया और निवेशकों का विश्वास जीतना अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं।
यदि सरकार इन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से संभालने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।


