मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर बनी अनिश्चितता का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को एशियाई बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। बीएसई सेंसेक्स 719 अंक टूटकर 73,524 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 करीब 244 अंक फिसलकर 23,123 के स्तर तक पहुंच गया। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से निवेशकों की संपत्ति में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
ऐसे माहौल में आम निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस समय निवेश से दूरी बना लेनी चाहिए या फिर गिरावट को अवसर के रूप में देखना चाहिए? इसी सवाल का जवाब आजकल निवेश जगत में तेजी से लोकप्रिय हो रही एक रणनीति “कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग” में छिपा है।
क्या है Contrarian Investing और क्यों बढ़ रही इसकी लोकप्रियता?
कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का मूल सिद्धांत यह है कि जब अधिकांश निवेशक डर के कारण बाजार से दूर भाग रहे हों, तब अवसर तलाशे जाएं। इसके विपरीत जब बाजार में अत्यधिक उत्साह हो और हर कोई खरीदारी कर रहा हो, तब सतर्कता बरती जाए।
इस रणनीति को अपनाने वाले निवेशक यह मानते हैं कि कई बार बाजार में गिरावट कंपनियों की वास्तविक कारोबारी स्थिति के कारण नहीं बल्कि वैश्विक घटनाओं, भू-राजनीतिक तनाव या अल्पकालिक घबराहट के कारण आती है। ऐसे समय में मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों के शेयर भी सस्ते हो जाते हैं, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों को बेहतर एंट्री पॉइंट मिल सकता है।
मौजूदा बाजार परिस्थिति भी कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हुई है, लेकिन इसका सीधा असर भारत की अधिकांश मजबूत कंपनियों के कारोबार पर नहीं पड़ा है। यही कारण है कि कई निवेश विशेषज्ञ इस गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञ क्यों दे रहे हैं लार्ज और मिडकैप फंड्स पर जोर?
ऑप्टिमा मनी के संस्थापक पंकज मठपाल का कहना है कि वर्तमान स्तरों पर बाजार में निवेश के अच्छे अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार ऐसे समय में लार्ज और मिडकैप कंपनियों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड्स बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
लार्ज कैप कंपनियां आमतौर पर अपने-अपने क्षेत्रों की स्थापित और मजबूत कंपनियां होती हैं। इनके पास मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर नकदी प्रवाह और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस होती है। दूसरी ओर मिडकैप कंपनियां विकास के शुरुआती चरण में होती हैं और उनमें तेजी से विस्तार की क्षमता मौजूद रहती है।
इसी वजह से लार्ज और मिडकैप का संयोजन निवेशकों को स्थिरता और ग्रोथ दोनों का लाभ देने की क्षमता रखता है।
गिरावट के बाद आकर्षक हुए वैल्यूएशन
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में तेज तेजी देखने को मिली थी। इससे कई अच्छी कंपनियों के वैल्यूएशन काफी महंगे स्तर तक पहुंच गए थे। लेकिन हालिया गिरावट के बाद स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आई कमजोरी ने कई शेयरों के वैल्यूएशन प्रीमियम को कम कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब निवेशकों को पहले की तुलना में बेहतर कीमतों पर मजबूत कंपनियों में निवेश का अवसर मिल सकता है।
हालांकि सीधे शेयरों में निवेश करना हर रिटेल निवेशक के लिए आसान नहीं होता। सही कंपनी चुनना, उसका विश्लेषण करना और जोखिम को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से निवेश एक अधिक व्यावहारिक विकल्प माना जाता है, जहां अनुभवी फंड मैनेजर निवेशकों की ओर से पोर्टफोलियो का प्रबंधन करते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर क्यों हैं उम्मीदें?
कई अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रह सकता है। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और बढ़ती घरेलू खपत इसके प्रमुख कारण हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में निम्नलिखित क्षेत्रों में मजबूत ग्रोथ देखने को मिल सकती है:
- मैन्युफैक्चरिंग
- इंफ्रास्ट्रक्चर
- वित्तीय सेवाएं
- बिजली और ऊर्जा
- स्वास्थ्य सेवाएं
- शिक्षा क्षेत्र
- डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेवाएं
- उपभोक्ता वस्तुएं
इन क्षेत्रों में सक्रिय बड़ी और मध्यम आकार की कंपनियों को आर्थिक विकास का सीधा लाभ मिल सकता है। यही वजह है कि लार्ज और मिडकैप फंड्स को भविष्य की ग्रोथ थीम से जोड़कर देखा जा रहा है।
पिछले वर्षों में कैसा रहा प्रदर्शन?
ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि लार्ज और मिडकैप श्रेणी के कई म्यूचुअल फंड्स ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है।
इस श्रेणी में शामिल कुछ प्रमुख फंड्स के पिछले तीन वर्षों के औसत वार्षिक रिटर्न इस प्रकार रहे हैं:
| फंड का नाम | 3 वर्ष वार्षिक रिटर्न |
|---|---|
| Nippon India Vision Large & Mid Cap Fund | 17.91% |
| ICICI Prudential Large & Mid Cap Fund | 16.41% |
| Bandhan Large & Mid Cap Fund | 15.33% |
| Invesco India Large & Mid Cap Fund | 14.97% |
हालांकि पिछले रिटर्न भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि इस श्रेणी ने लंबी अवधि में निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने की क्षमता दिखाई है।
रिटेल निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार में गिरावट के दौरान घबराहट में निर्णय लेना अक्सर नुकसानदायक साबित होता है। वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि यदि किसी निवेशक का लक्ष्य लंबी अवधि का है तो ऐसी गिरावटों को अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
जो निवेशक एकमुश्त निवेश करने में सहज नहीं हैं, वे SIP के माध्यम से धीरे-धीरे निवेश जारी रख सकते हैं। इससे बाजार की अस्थिरता का प्रभाव कम करने में मदद मिलती है और औसत लागत का लाभ मिलता है।
मौजूदा माहौल में लार्ज और मिडकैप म्यूचुअल फंड्स उन निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकते हैं जो जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन चाहते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषण पर आधारित हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है।


