नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश में ईंधन उपलब्धता को लेकर उठ रही चिंताओं पर सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और किसी भी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है।
कंपनी ने बताया कि उसकी मजबूत सप्लाई चेन, स्टोरेज क्षमता और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण राजधानी दिल्ली में सभी पेट्रोल पंपों और गैस वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। वहीं केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी भरोसा दिलाया कि देश के पास 76 से 80 दिनों तक की जरूरत पूरी करने लायक ईंधन भंडार मौजूद है।
दिल्ली में सामान्य बनी हुई है ईंधन आपूर्ति
BPCL के अनुसार दिल्ली में उसके सभी रिटेल आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है। कंपनी लगातार स्टॉक रिफिलिंग और सप्लाई नेटवर्क की निगरानी कर रही है ताकि उपभोक्ताओं, सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कंपनी ने कहा कि उसकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईंधन वितरण की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहे। इसके लिए रिफाइनरियों, डिपो और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के बीच समन्वय लगातार बनाए रखा गया है।
BPCL के प्रवक्ता के अनुसार कंपनी का सप्लाई नेटवर्क कुशलता से काम कर रहा है और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।
पेट्रोल की बिक्री में दर्ज हुई बढ़ोतरी
BPCL द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में दिल्ली में पेट्रोल की मांग में वृद्धि देखने को मिली। मई 2026 के दौरान कंपनी ने 27,800 मीट्रिक टन से अधिक पेट्रोल की बिक्री की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 27,100 मीट्रिक टन के आसपास था।
इस प्रकार पेट्रोल की बिक्री में लगभग 2.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी वाहनों के बढ़ते उपयोग, गर्मियों की छुट्टियों के दौरान यात्रा में बढ़ोतरी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
पेट्रोल की मांग में लगातार वृद्धि यह संकेत भी देती है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में उपभोक्ता गतिविधियां सामान्य बनी हुई हैं और परिवहन क्षेत्र में भी मजबूती देखने को मिल रही है।
डीजल की मांग भी बढ़ी
केवल पेट्रोल ही नहीं बल्कि डीजल की खपत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। BPCL के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में दिल्ली में डीजल की बिक्री 16,500 मीट्रिक टन से अधिक रही। मई 2025 में यह आंकड़ा 16,100 मीट्रिक टन के आसपास था।
इस प्रकार डीजल की बिक्री में लगभग 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। डीजल की मांग में यह बढ़ोतरी माल परिवहन, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक उपयोग में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को दर्शाती है।
विश्लेषकों का कहना है कि डीजल की खपत अक्सर आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। ऐसे में इसकी बढ़ती बिक्री अर्थव्यवस्था में निरंतर गतिविधियों का संकेत देती है।
सीएनजी की सप्लाई भी मजबूत
दिल्ली देश के उन प्रमुख शहरों में शामिल है जहां सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक वाहनों में सीएनजी का व्यापक उपयोग होता है। BPCL ने बताया कि मई 2026 के दौरान उसने 33,400 मीट्रिक टन से अधिक सीएनजी की आपूर्ति की।
इस आपूर्ति के जरिए बसों, टैक्सियों, ऑटो रिक्शा और अन्य व्यावसायिक वाहनों की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीएनजी आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी सीएनजी की खपत में वृद्धि जारी रह सकती है क्योंकि सरकार स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन को प्राथमिकता दे रही है।
एलपीजी सिलेंडरों की रिकॉर्ड आपूर्ति
घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी की उपलब्धता को लेकर भी BPCL ने स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी के अनुसार मई 2026 के दौरान दिल्ली में 7.7 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति की गई।
इसके अतिरिक्त 18,000 से अधिक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और 22,000 से ज्यादा एफटीएल (Free Trade LPG) सिलेंडरों की भी सप्लाई की गई।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि घरेलू और व्यावसायिक दोनों श्रेणियों में एलपीजी की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक और वितरण व्यवस्था मौजूद है। कंपनी ने कहा कि एलपीजी वितरण नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहा है और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
सरकार ने दिया भरोसा, 76-80 दिन का फ्यूल स्टॉक मौजूद
इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी देश में ईंधन उपलब्धता को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। CNN-News18 के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत के पास 76 से 80 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखा है। देश के रणनीतिक भंडार, रिफाइनिंग क्षमता और आयात व्यवस्था मिलकर ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि आम लोगों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों पर क्या बोले मंत्री?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। हालांकि हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया कि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहने की संभावना कम है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार की परिस्थितियां समय-समय पर बदलती रहती हैं और भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उनका मानना है कि तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी स्थायी नहीं होगी।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
क्या उपभोक्ताओं को चिंता करनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई वजह नहीं है। BPCL के ताजा आंकड़े और सरकार के बयान दोनों यह संकेत देते हैं कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है।
दिल्ली सहित देश के प्रमुख शहरों में ईंधन वितरण सामान्य है और आने वाले समय में भी किसी प्रकार की कमी की संभावना नहीं दिखाई दे रही। ऐसे में उपभोक्ताओं को अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता न केवल आम नागरिकों बल्कि उद्योगों, परिवहन क्षेत्र और देश की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।


