नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत की सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों में साफ दिखाई देने लगा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) दोनों को भारी घाटा हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद लंबे समय तक देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (LPG) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में करीब 70% तक उछल गईं, जिससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की लागत में भारी इजाफा हुआ।
HPCL को 12,265 करोड़ रुपये का घाटा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, HPCL ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा दर्ज किया। पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।
इसके अलावा कंपनी को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर 3,607 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी भी झेलनी पड़ी। यानी सरकार द्वारा नियंत्रित कीमतों पर एलपीजी बेचने के कारण कंपनी को वास्तविक लागत की भरपाई नहीं हो सकी।
BPCL भी घाटे में पहुंची
इसी तरह BPCL को भी अप्रैल-जून तिमाही में 1,873 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 6,839 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।
कंपनी ने बताया कि उसे घरेलू एलपीजी की बिक्री पर 3,485 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा, जिसने उसके मुनाफे पर बड़ा असर डाला।
क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा होता गया, लेकिन सरकार ने उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ने से बचाने के लिए लंबे समय तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया।
हालांकि बाद में मई के दूसरे पखवाड़े में:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
- 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की वृद्धि की गई।
लेकिन यह बढ़ोतरी कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज वृद्धि की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसी वजह से कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
HPCL और BPCL का प्रदर्शन
| कंपनी | Q1 FY27 में घाटा | पिछले साल Q1 | LPG अंडर-रिकवरी |
|---|---|---|---|
| HPCL | ₹12,265 करोड़ | ₹4,111 करोड़ का लाभ | ₹3,607 करोड़ |
| BPCL | ₹1,873 करोड़ | ₹6,839 करोड़ का लाभ | ₹3,485 करोड़ |
राजस्व में फिर भी रही मजबूत बढ़ोतरी
दिलचस्प बात यह है कि घाटे के बावजूद दोनों कंपनियों के कारोबार में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई।
- HPCL का ऑपरेशन से राजस्व पिछले वर्ष के 1.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो करीब 21% की वृद्धि है।
- BPCL का राजस्व भी 1.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
यानी बिक्री और कारोबार मजबूत रहे, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत और ईंधन की नियंत्रित कीमतों ने लाभ को पूरी तरह प्रभावित कर दिया।
इंडियन ऑयल के नतीजों पर रहेगी नजर
देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अभी तक अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी नहीं किए हैं। बाजार की नजर अब IOC के परिणामों पर टिकी है, क्योंकि माना जा रहा है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर उसके प्रदर्शन पर भी देखने को मिल सकता है।
HPCL ने क्या कहा?
HPCL ने अपने बयान में स्वीकार किया कि पहली तिमाही के नतीजों पर पश्चिम एशिया संकट का स्पष्ट प्रभाव पड़ा है। हालांकि कंपनी ने कहा कि उसके रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन मजबूत बने हुए हैं और भविष्य में बाजार की परिस्थितियों के अनुसार प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है।


