नई दिल्ली। घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी होने के बावजूद सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर आर्थिक दबाव कम नहीं हुआ है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई लागत मौजूदा समय में ₹1,600 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि दिल्ली में उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर ₹942 में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका मतलब है कि प्रत्येक सिलेंडर पर लगभग ₹700 की अंडर-रिकवरी हो रही है।
Highlights
- घरेलू LPG सिलेंडर पर OMCs को करीब ₹700 की अंडर-रिकवरी
- सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) मई-जून में 46% से अधिक बढ़ा
- पश्चिम एशिया तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट से बढ़ी लागत
- उज्ज्वला लाभार्थियों को अब भी मिल रही ₹300 प्रति सिलेंडर सब्सिडी
- वित्त वर्ष 2026 में LPG अंडर-रिकवरी ₹60,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान
सरकार का कहना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बनी है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े सप्लाई जोखिमों ने भारत सहित कई आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है।
आखिर क्या होती है अंडर-रिकवरी?
अंडर-रिकवरी का मतलब सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं होता। यह वह अंतर है जो किसी उत्पाद की वास्तविक लागत और उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत के बीच होता है।
उदाहरण के तौर पर यदि एक घरेलू LPG सिलेंडर को उपभोक्ता तक पहुंचाने की कुल लागत ₹1,640 है और उपभोक्ता उससे केवल ₹942 का भुगतान करता है, तो दोनों के बीच का लगभग ₹700 का अंतर अंडर-रिकवरी कहलाता है।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का पूरा बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। इसी कारण OMCs को यह नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में आई रिकॉर्ड तेजी
भारत में LPG की कीमतों पर सबसे बड़ा असर सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) का पड़ता है। यह अंतरराष्ट्रीय LPG व्यापार का प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सप्लाई संकट से पहले Saudi CP लगभग 543 डॉलर प्रति टन था। मई में यह बढ़कर 775 डॉलर प्रति टन पहुंच गया, जबकि जून में यह और बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन हो गया।
यानी कुछ ही हफ्तों में कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका सीधा असर भारत की LPG आयात लागत पर पड़ा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। पश्चिम एशिया से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए एशियाई देशों तक पहुंचता है।
भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के लगभग 54 प्रतिशत LPG आयात इसी मार्ग से होकर आते हैं। जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, शिपिंग लागत, बीमा खर्च और ऊर्जा कीमतों में तेजी आ जाती है।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष और सप्लाई बाधाओं की आशंका के कारण LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
दिल्ली में कितनी है घरेलू LPG की कीमत?
हालिया संशोधन के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 हो गई है। इससे पहले इसकी कीमत ₹913 थी।
हालांकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को अब भी प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी मिल रही है। ऐसे में उनके लिए प्रभावी कीमत लगभग ₹642 रह जाती है।
सरकार का कहना है कि गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को राहत देने के लिए सब्सिडी व्यवस्था जारी रखी गई है।
कमर्शियल LPG की कीमतें क्यों अलग हैं?
घरेलू LPG और कमर्शियल LPG की मूल्य निर्धारण व्यवस्था अलग-अलग है।
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह बाजार आधारित हैं और इन्हें हर महीने अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर संशोधित किया जाता है।
दिल्ली में फिलहाल 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3,113.50 है। यह लगभग ₹164 प्रति किलोग्राम बैठती है।
इसके मुकाबले घरेलू उपभोक्ता लगभग ₹66 प्रति किलोग्राम की दर से LPG प्राप्त कर रहे हैं। यही वजह है कि घरेलू LPG में अंडर-रिकवरी का दबाव बना हुआ है।
पेट्रोल, डीजल और CNG पर भी असर
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल LPG तक सीमित नहीं है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने हाल के महीनों में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में भी कई बार संशोधन किया है।
सरकार के अनुसार, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की ऊंची लागत के कारण OMCs पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है। इसकी आंशिक भरपाई ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए की जा रही है।
हालांकि सरकार अभी भी घरेलू LPG की कीमतों को पूरी तरह बाजार के हवाले करने से बच रही है।
वित्त वर्ष 2026 में कितना हो सकता है नुकसान?
सरकारी अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी लगभग ₹60,000 करोड़ तक पहुंच सकती है। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा ₹41,338 करोड़ था।
यानी केवल एक वर्ष में यह बोझ लगभग 45 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
क्या देश में LPG की कमी होने वाली है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद देश में LPG या अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है।
सप्लाई जोखिम को कम करने के लिए घरेलू रिफाइनरियों ने LPG उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उत्पादन को 32,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर लगभग 52,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जो 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
सरकार का मानना है कि इससे आयात पर निर्भरता का दबाव कुछ हद तक कम होगा।
NewsJagran Analysis
घरेलू LPG की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद सरकार और OMCs पर दबाव कम नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ती LPG कीमतें और पश्चिम एशिया से जुड़ी अनिश्चितता है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े जोखिम लंबे समय तक बने रहते हैं तो आने वाले महीनों में LPG की लागत और बढ़ सकती है।
सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत देने की नीति पर कायम दिख रही है, लेकिन बढ़ती अंडर-रिकवरी लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में भविष्य में LPG कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी या अतिरिक्त सरकारी सहायता जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।


