नई दिल्ली। घरेलू एलपीजी सिलिंडर एक बार फिर महंगा हो गया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। ऐसे समय में जब महंगाई पहले से ही आम परिवारों के बजट पर दबाव बना रही है, रसोई गैस की कीमत में यह बढ़ोतरी करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन गई है।
हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में घरेलू गैस अभी भी दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती है। सरकार का कहना है कि यदि वास्तविक आयात लागत के आधार पर कीमत तय की जाए तो एक सिलिंडर की लागत 1,600 रुपये से अधिक बैठती है, लेकिन उपभोक्ताओं को यह 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। क्या केवल अंतरराष्ट्रीय तुलना के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भारत में एलपीजी सस्ती है? और क्या आम भारतीय परिवार वास्तव में इस बढ़ोतरी का असर आसानी से झेल पाएंगे? आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
क्यों बढ़े LPG सिलिंडर के दाम?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में लगातार तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में होने वाले बदलाव का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ता है।
विशेष रूप से सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price-CP), जिसे भारत एलपीजी आयात के लिए प्रमुख बेंचमार्क मानता है, फरवरी के बाद लगातार बढ़ा है। मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इस तेजी के कारण तेल विपणन कंपनियों की लागत काफी बढ़ गई है।
सरकार के मुताबिक मौजूदा समय में एक घरेलू एलपीजी सिलिंडर की वास्तविक आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को 942 रुपये में सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। यानी वास्तविक लागत और बिक्री मूल्य के बीच का बड़ा अंतर सरकार और तेल कंपनियां वहन कर रही हैं।
यही वजह है कि सरकार इस मूल्य वृद्धि को आवश्यक बता रही है और कह रही है कि पूरी लागत उपभोक्ताओं पर नहीं डाली गई है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को कितनी राहत?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत आने वाले परिवारों को अभी भी सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। सरकार साल में निर्धारित रिफिल पर प्रति सिलिंडर 300 रुपये की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजती है।
इस व्यवस्था के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 942 रुपये वाला सिलिंडर प्रभावी रूप से 642 रुपये का रह जाता है। सरकार का दावा है कि इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों को राहत मिल रही है और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सब्सिडी नहीं होती तो ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार दोबारा पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी और गोबर के उपयोग की ओर लौट सकते थे। इसलिए उज्ज्वला योजना केवल एक सब्सिडी कार्यक्रम नहीं बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी पहल भी है।
पड़ोसी देशों की तुलना में कितना सस्ता है LPG?
सरकार ने विभिन्न देशों में एलपीजी की कीमतों की तुलना करते हुए कहा है कि भारत में घरेलू गैस अब भी अपेक्षाकृत सस्ती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में समान क्षमता वाले सिलिंडर की कीमत लगभग 1,046 रुपये है। नेपाल में यह करीब 1,207 रुपये, बांग्लादेश में लगभग 1,225 रुपये और श्रीलंका में करीब 1,241 रुपये में मिल रहा है।
इन आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो भारत में 942 रुपये का सिलिंडर पड़ोसी देशों की तुलना में वास्तव में सस्ता दिखाई देता है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए यह अंतर और अधिक बढ़ जाता है।
किस देश में कितने में मिल रहा LPG सिलिंडर?
| देश | 14.2 किलोग्राम सिलिंडर की कीमत (₹) |
|---|---|
| भारत (उज्ज्वला लाभार्थी) | 642 |
| भारत (सामान्य उपभोक्ता) | 942 |
| पाकिस्तान | 1,046 |
| नेपाल | 1,207 |
| बांग्लादेश | 1,225 |
| श्रीलंका | 1,241 |
| अमेरिका | 1,755 |
| ऑस्ट्रेलिया | 1,765 |
| कनाडा | 2,411 |
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में क्या हैं दाम?
सरकार के आंकड़ों के अनुसार विकसित देशों में घरेलू एलपीजी की कीमतें भारत की तुलना में काफी अधिक हैं। अमेरिका में समान क्षमता वाले सिलिंडर की कीमत लगभग 1,755 रुपये बताई गई है। ऑस्ट्रेलिया में यह करीब 1,765 रुपये और कनाडा में लगभग 2,411 रुपये तक पहुंच जाती है।
सिर्फ कीमत के आधार पर तुलना की जाए तो भारत निश्चित रूप से इन देशों की तुलना में काफी सस्ता दिखाई देता है। यही वजह है कि सरकार अपने दावे के समर्थन में इन आंकड़ों का उल्लेख कर रही है।
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल कीमत की तुलना पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। किसी भी देश में ऊर्जा उत्पादों की वास्तविक वहनीयता (Affordability) वहां की औसत आय और क्रय शक्ति पर निर्भर करती है।
क्या सिर्फ कीमतों की तुलना से पूरी तस्वीर समझी जा सकती है?
यहीं पर सरकार के दावे का दूसरा पहलू सामने आता है। ऊर्जा अर्थशास्त्रियों के अनुसार किसी उत्पाद की कीमत कम या ज्यादा होने का मूल्यांकन केवल रुपए में तुलना करके नहीं किया जा सकता।
उदाहरण के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में एलपीजी सिलिंडर की कीमत भारत से अधिक है, लेकिन वहां के नागरिकों की औसत आय भी भारतीय परिवारों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। ऐसे में गैस सिलिंडर पर होने वाला खर्च उनकी कुल आय का बहुत छोटा हिस्सा होता है।
भारत में स्थिति अलग है। यहां बड़ी आबादी निम्न और मध्यम आय वर्ग से आती है। ऐसे परिवारों के लिए 942 रुपये का सिलिंडर मासिक बजट पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। खासकर उन परिवारों के लिए जिनकी आय सीमित है और जिनके घरेलू खर्च का बड़ा हिस्सा खाद्य पदार्थों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जाता है।
यही कारण है कि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में एलपीजी की कीमतों का आकलन केवल अंतरराष्ट्रीय तुलना के आधार पर नहीं बल्कि घरेलू आय और महंगाई के संदर्भ में भी किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार की वास्तविक लागत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाए तो सिलिंडर की कीमत कहीं अधिक हो सकती है। इसलिए वर्तमान मूल्य व्यवस्था को उपभोक्ता हित में संतुलित मॉडल बताया जा रहा है।
आपूर्ति पर नहीं है कोई संकट
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी या अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है।
सरकार के अनुसार भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई वैकल्पिक स्रोत विकसित किए हैं। अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से एलपीजी आयात बढ़ाया गया है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।
इसके अलावा घरेलू उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। मंत्रालय का दावा है कि पिछले वर्षों की तुलना में घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इससे वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी देश के भीतर मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
आने वाले महीनों में LPG की कीमतों पर क्या रहेगा असर?
आने वाले समय में एलपीजी की कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर निर्भर करेगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है और सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो तेल कंपनियों की लागत बढ़ी रह सकती है।
हालांकि यदि कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक कीमतों में नरमी आती है तो घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल सरकार का कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति यह तय करेगी कि एलपीजी की कीमतें स्थिर रहेंगी या इनमें और बदलाव देखने को मिलेगा।
सरकार के दावे में कितना दम?
उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो सरकार का यह दावा काफी हद तक सही प्रतीत होता है कि भारत में एलपीजी की कीमतें कई पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम हैं। उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी भी लाखों परिवारों को अतिरिक्त राहत देती है।
लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि 942 रुपये का सिलिंडर भारत के कई परिवारों के लिए अब भी एक बड़ा खर्च है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय तुलना के आधार पर सरकार का दावा मजबूत दिखाई देता है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं की महंगाई संबंधी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं होती।
यानी निष्कर्ष यही है कि भारत में एलपीजी वैश्विक मानकों पर अपेक्षाकृत सस्ती जरूर है, लेकिन आम भारतीय परिवार के बजट पर इसका बोझ अभी भी महसूस किया जा रहा है। यही कारण है कि कीमतों पर बहस आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है।


