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Reading: Private Nuclear Power: अब निजी कंपनियां भी बनाएंगी परमाणु बिजली, सरकार खरीद की देगी गारंटी; जानिए क्या बदलने वाला है
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बिजनेस न्यूज़

Private Nuclear Power: अब निजी कंपनियां भी बनाएंगी परमाणु बिजली, सरकार खरीद की देगी गारंटी; जानिए क्या बदलने वाला है

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 6:53 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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Private Nuclear Power in India: न्यूक्लियर सेक्टर में निजी निवेश के लिए सरकार की बड़ी तैयारी

भारत सरकार देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। अब सरकार निजी कंपनियों को न्यूक्लियर पावर सेक्टर में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। इसके लिए कई नीतिगत कदमों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें सबसे अहम है बिजली खरीद की गारंटी यानी एश्योर्ड पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA)।

Contents
Private Nuclear Power in India: न्यूक्लियर सेक्टर में निजी निवेश के लिए सरकार की बड़ी तैयारीक्यों जरूरी है न्यूक्लियर एनर्जी पर जोर?सरकार क्या योजना बना रही है?बिजली खरीद की गारंटी क्यों है अहम?निजी कंपनियों को मिल सकता है वित्तीय समर्थनSHANTI Act 2025 से क्या बदलेगा?किन क्षेत्रों में निजी कंपनियों की एंट्री नहीं होगी?भारत की वर्तमान न्यूक्लियर क्षमता कितनी है?2047 तक क्या है सरकार का लक्ष्य?छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सरकार का फोकसभारत के लिए क्या होंगे फायदे?निष्कर्ष

इस कदम का उद्देश्य निजी निवेशकों के लिए जोखिम कम करना और देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को तेज गति से बढ़ाना है। अभी तक भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पर मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों का नियंत्रण रहा है, लेकिन आने वाले वर्षों में निजी कंपनियों की भूमिका काफी बढ़ सकती है।

क्यों जरूरी है न्यूक्लियर एनर्जी पर जोर?

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। औद्योगिक विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग, डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या और शहरीकरण के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुमान के अनुसार अगले दो दशकों में भारत की बिजली खपत कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे में केवल सौर और पवन ऊर्जा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि ये मौसम पर निर्भर स्रोत हैं।

न्यूक्लियर ऊर्जा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 24 घंटे लगातार बिजली उत्पादन कर सकती है और इसमें कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है। यही कारण है कि अमेरिका, फ्रांस, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे देश परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहे हैं।

सरकार क्या योजना बना रही है?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने संकेत दिया है कि सरकार तकनीक डेवलपर्स, ऑपरेटर्स और निवेशकों के साथ व्यापक चर्चा शुरू करने वाली है।

सरकार SHANTI Act 2025 के तहत नियमों को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रही है। इस कानून का पूरा नाम “Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India” है।

इस कानून के जरिए पहली बार निजी क्षेत्र को न्यूक्लियर इकोसिस्टम के कई हिस्सों में भागीदारी का अवसर दिया गया है।

सरकार यह भी समझना चाहती है कि निजी कंपनियों को निवेश के लिए किन प्रकार की वित्तीय और नीतिगत सहायता की जरूरत होगी। इसी आधार पर आगे की नीति तय की जाएगी।

बिजली खरीद की गारंटी क्यों है अहम?

किसी भी न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट की लागत हजारों करोड़ रुपये में होती है। परियोजनाओं को पूरा होने में कई साल लग जाते हैं। ऐसे में निवेशकों को यह भरोसा चाहिए कि बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद खरीदार उपलब्ध रहेगा।

यहीं पर एश्योर्ड पावर परचेज एग्रीमेंट महत्वपूर्ण हो जाता है।

यदि सरकार या सरकारी एजेंसियां पहले से बिजली खरीदने का वादा करती हैं तो निवेशकों का जोखिम कम हो जाता है। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी ऐसे प्रोजेक्ट्स को फंड करना आसान हो जाता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह सबसे प्रभावी उपायों में से एक हो सकता है।

निजी कंपनियों को मिल सकता है वित्तीय समर्थन

सरकार केवल नीतिगत बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहती। निजी कंपनियों को वित्तीय सहायता देने पर भी विचार किया जा रहा है।

इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) योजना का इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह योजना लंबी अवधि के लिए कम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। इसका उद्देश्य नई और परिवर्तनकारी तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है।

न्यूक्लियर सेक्टर को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इससे स्टार्टअप्स, टेक्नोलॉजी डेवलपर्स और निजी कंपनियों को पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।

कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार न्यूक्लियर सेक्टर के लिए अलग से विशेष फंड भी बना सकती है ताकि शुरुआती निवेशकों को अतिरिक्त सहायता मिल सके।

SHANTI Act 2025 से क्या बदलेगा?

यह कानून भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है।

इसके तहत निजी कंपनियां कई गतिविधियों में भाग ले सकेंगी, जिनमें शामिल हैं:

  • न्यूक्लियर पावर प्लांट का संचालन
  • बिजली उत्पादन
  • उपकरण निर्माण
  • विशेष तकनीकी सेवाएं
  • न्यूक्लियर सप्लाई चेन से जुड़ी गतिविधियां

इससे भारत में एक नया औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित हो सकता है जिसमें इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और हाई-टेक सेक्टर की कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे।

किन क्षेत्रों में निजी कंपनियों की एंट्री नहीं होगी?

हालांकि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के कुछ क्षेत्रों को निजी भागीदारी से बाहर रखा है।

इनमें शामिल हैं:

  • रेडियोएक्टिव पदार्थों का एनरिचमेंट
  • आइसोटोपिक सेपरेशन
  • इस्तेमाल हो चुके न्यूक्लियर फ्यूल का प्रबंधन
  • हैवी वाटर का उत्पादन और अपग्रेडेशन

इन गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा।

भारत की वर्तमान न्यूक्लियर क्षमता कितनी है?

भारत की कुल स्थापित न्यूक्लियर पावर क्षमता लगभग 8.78 गीगावॉट है।

देश में फिलहाल सात अलग-अलग स्थानों पर 24 न्यूक्लियर रिएक्टर संचालित हो रहे हैं।

ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल बिजली उत्पादन में न्यूक्लियर ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 1.7 प्रतिशत है।

इसके मुकाबले:

  • जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 47.7 प्रतिशत
  • गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 50.6 प्रतिशत

है।

यह आंकड़ा बताता है कि भारत के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी अभी भी काफी कम है।

2047 तक क्या है सरकार का लक्ष्य?

भारत ने विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ 2047 तक न्यूक्लियर क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावॉट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

यह वर्तमान क्षमता से कई गुना अधिक है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सरकारी निवेश पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए निजी क्षेत्र को शामिल करना लगभग अनिवार्य माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी निवेश को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला तो भारत दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर ऊर्जा बाजारों में शामिल हो सकता है।

छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सरकार का फोकस

केंद्र सरकार पहले ही 20,000 करोड़ रुपये के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की घोषणा कर चुकी है।

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य Small Modular Reactors (SMRs) का विकास करना है।

SMRs पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में छोटे, सुरक्षित और अपेक्षाकृत कम लागत वाले माने जाते हैं।

सरकार का लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी डिजाइन वाले SMRs को चालू करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में भारत के औद्योगिक क्षेत्रों, डेटा सेंटरों और बड़े शहरों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में SMRs महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारत के लिए क्या होंगे फायदे?

न्यूक्लियर सेक्टर में निजी निवेश बढ़ने से देश को कई लाभ मिल सकते हैं।

सबसे पहला फायदा ऊर्जा सुरक्षा का होगा। भारत को कोयला और गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

दूसरा फायदा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के रूप में मिलेगा, जिससे नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करना आसान होगा।

तीसरा फायदा रोजगार और औद्योगिक विकास का होगा। नई परियोजनाओं के कारण इंजीनियरिंग, निर्माण, उपकरण निर्माण और अनुसंधान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवसर पैदा हो सकते हैं।

निष्कर्ष

भारत अपने ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में बढ़ रहा है। SHANTI Act 2025, एश्योर्ड पावर परचेज एग्रीमेंट और संभावित वित्तीय सहायता जैसी पहलें निजी क्षेत्र के लिए नए अवसर खोल सकती हैं। यदि सरकार और उद्योग के बीच सही तालमेल बनता है तो आने वाले वर्षों में न्यूक्लियर एनर्जी भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकती है और 2047 तक 100 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकती है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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