नई दिल्ली। आज भारत में पेट्रोल पंपों का विशाल नेटवर्क दिखाई देता है। शहरों से लेकर गांवों और राष्ट्रीय राजमार्गों तक देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के हजारों आउटलेट मौजूद हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस विशाल साम्राज्य की शुरुआत एक छोटे से शहर से हुई थी, जहां कभी डीजल की सप्लाई ऊंटगाड़ियों के जरिए की जाती थी?
भारत के ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल इंडियन ऑयल का पहला रिटेल आउटलेट वर्ष 1961 में गुजरात के कच्छ जिले के अंजार शहर में शुरू किया गया था। उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि एक छोटे से पेट्रोल पंप से शुरू हुई यह यात्रा आगे चलकर देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी का रूप ले लेगी।
आज करीब 65 वर्षों बाद इसी ऐतिहासिक पेट्रोल पंप को नए स्वरूप में विकसित कर देश के पहले “हेरिटेज रिटेल आउटलेट” के रूप में संरक्षित किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत के ऊर्जा इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को करीब से समझ सकें।
भोगिलाल गांधी बने थे इंडियन ऑयल के पहले डीलर
इंडियन ऑयल के इतिहास में अंजार स्थित इस पेट्रोल पंप का विशेष महत्व है। कंपनी के पहले रिटेल आउटलेट का डीलरशिप अधिकार भोगिलाल गांधी को मिला था। उस दौर में पेट्रोल पंप खोलना केवल व्यवसाय नहीं बल्कि देश के औद्योगिक विकास का हिस्सा बनना माना जाता था।
पंप को आधिकारिक तौर पर IND-0001 नंबर दिया गया था, जो आज भी इसे इंडियन ऑयल के इतिहास में एक विशेष पहचान दिलाता है। बाद के वर्षों में यह आउटलेट केवल ईंधन बिक्री केंद्र नहीं रहा बल्कि कंपनी की विकास यात्रा का प्रतीक बन गया।
इंडियन ऑयल के पूर्व चेयरमैन एस. एम. वैद्य ने भी इस ऐतिहासिक स्थान का दौरा किया था और इसे कंपनी की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। बाद में इसे “हेरिटेज रिटेल आउटलेट” के रूप में विकसित किया गया।
जब ऊंटगाड़ियों से पहुंची थी 3600 लीटर डीजल की पहली खेप
इस पेट्रोल पंप से जुड़ी सबसे रोचक कहानी इसकी पहली डीजल सप्लाई की है।
आज जब ईंधन टैंकरों, हाईवे नेटवर्क और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स सिस्टम के जरिए देशभर में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति की जाती है, तब 1961 की स्थिति बिल्कुल अलग थी। उस समय कच्छ क्षेत्र में परिवहन सुविधाएं सीमित थीं और सड़क नेटवर्क भी विकसित नहीं हुआ था।
इंडियन ऑयल के अनुसार, कांडला इंस्टॉलेशन से अंजार तक डीजल की पहली खेप भेजी गई थी। लेकिन आधुनिक परिवहन साधनों की कमी के कारण करीब 3600 लीटर डीजल ऊंटगाड़ियों पर लादकर इस पेट्रोल पंप तक पहुंचाया गया था।
यह घटना केवल एक सप्लाई ऑपरेशन नहीं थी बल्कि उस दौर में भारत के ऊर्जा वितरण नेटवर्क के शुरुआती संघर्षों और चुनौतियों का प्रतीक भी थी। आज जिस कंपनी के पास हजारों टैंकर, पाइपलाइन नेटवर्क और विशाल लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर है, उसकी शुरुआत ऊंटगाड़ियों के सहारे हुई थी।
कैसे बना देश का पहला हेरिटेज पेट्रोल पंप?
समय के साथ यह पेट्रोल पंप केवल एक व्यावसायिक केंद्र नहीं रहा। इंडियन ऑयल ने इसे अपनी विरासत के प्रतीक के रूप में विकसित करने का फैसला लिया।
कंपनी ने इस आउटलेट का पुनर्विकास कर इसे देश का पहला हेरिटेज रिटेल आउटलेट बनाया। इसका उद्देश्य केवल पेट्रोल और डीजल बेचना नहीं बल्कि लोगों को इंडियन ऑयल की ऐतिहासिक यात्रा से परिचित कराना भी है।
इस आउटलेट में एक विशेष व्यूइंग गैलरी बनाई गई है, जहां कंपनी के छह दशक से अधिक लंबे इतिहास को तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले लोग यह देख सकते हैं कि कैसे इंडियन ऑयल ने एक छोटे से नेटवर्क से शुरुआत कर देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में जगह बनाई।
कच्छ की संस्कृति को भी मिला विशेष स्थान
हेरिटेज आउटलेट को डिजाइन करते समय स्थानीय संस्कृति को भी प्रमुखता दी गई है।
पूरे परिसर को कच्छ की प्रसिद्ध लिप्पन कला से सजाया गया है। यह पारंपरिक मिट्टी और दर्पण से बनने वाली कला गुजरात की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। इसके अलावा यहां एक स्मारिका दुकान भी बनाई गई है, जो पारंपरिक कुच्छी शैली में तैयार की गई है।
इस पहल का उद्देश्य केवल इतिहास को संजोना नहीं बल्कि स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा देना है। इस वजह से यह पेट्रोल पंप अब केवल ईंधन भरवाने की जगह नहीं बल्कि एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बना रहा है।
इंडियन ऑयल का सफर कितना बड़ा हो चुका है?
जिस कंपनी की शुरुआत एक छोटे से पेट्रोल पंप और ऊंटगाड़ियों से हुई थी, आज वह भारत की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शामिल है।
इंडियन ऑयल देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी है और पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एविएशन फ्यूल, पेट्रोकेमिकल्स तथा ग्रीन एनर्जी जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है। कंपनी का नेटवर्क देशभर में हजारों पेट्रोल पंप, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर और पाइपलाइन सिस्टम तक फैला हुआ है।
वर्तमान में इंडियन ऑयल का मार्केट कैप लगभग ₹1.96 लाख करोड़ के आसपास पहुंच चुका है। कंपनी भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और ग्रीन हाइड्रोजन, बायोफ्यूल तथा ऊर्जा संक्रमण से जुड़े नए क्षेत्रों में भी तेजी से निवेश कर रही है।
आम लोगों के लिए इस कहानी का क्या महत्व है?
भारत के पहले इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप की कहानी केवल एक कंपनी के विकास की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार आगे बढ़ता रहा।
1961 में ऊंटगाड़ियों के जरिए डीजल पहुंचाने वाला देश आज दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा बाजारों में शामिल है। यह कहानी बताती है कि मजबूत विजन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और निरंतर निवेश किस तरह किसी छोटे प्रयास को राष्ट्रीय उपलब्धि में बदल सकते हैं।
यही वजह है कि अंजार का यह पेट्रोल पंप केवल एक पुरानी इमारत नहीं बल्कि भारत के औद्योगिक और ऊर्जा विकास का जीवंत प्रतीक बन चुका है। आज भी जब कोई इस हेरिटेज आउटलेट पर पहुंचता है तो उसे उस दौर की याद आती है जब देश की ऊर्जा यात्रा ऊंटगाड़ियों से शुरू हुई थी और आज वैश्विक स्तर तक पहुंच चुकी है।


