मुंबई के रहने वाले शाम कुमावत की कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो लगातार असफलताओं के बाद हार मान लेते हैं। यूपीएससी परीक्षा में सफलता नहीं मिली, पहला बिजनेस कोरोना महामारी में बंद हो गया और लाखों रुपये का नुकसान भी हुआ। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनका स्टार्टअप Safsafaiwala सालाना 1.5 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है और कई शहरों में अपनी सेवाएं दे रहा है।
होटल में पार्ट-टाइम काम से मिली बिजनेस की प्रेरणा
शाम कुमावत ने साल 2017 में पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी करने पुणे चले गए। पढ़ाई के दौरान खर्च निकालने के लिए उन्होंने होटलों में हाउसकीपिंग का काम किया। इसी दौरान वह Urban Company के साथ सर्विस पार्टनर के रूप में भी जुड़े।
यहीं से उन्हें क्लीनिंग इंडस्ट्री की असली समस्याओं को समझने का मौका मिला। उन्होंने देखा कि घरों और ऑफिसों की प्रोफेशनल सफाई की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस सेक्टर में भरोसेमंद और प्रशिक्षित स्टाफ की काफी कमी है। कई प्लेटफॉर्म्स एक साथ कई तरह की सेवाएं देते हैं, जिसकी वजह से क्वालिटी कंट्रोल कमजोर हो जाता है।
यूपीएससी नहीं निकला, पहला बिजनेस भी डूब गया

यूपीएससी की तैयारी के साथ-साथ शाम ने एक छोटी क्लीनिंग एजेंसी शुरू की थी ताकि बैकअप तैयार रहे। लेकिन तभी कोरोना महामारी आ गई। लॉकडाउन के दौरान उनका काम पूरी तरह ठप हो गया। बिजनेस बंद हो गया और करीब 3 लाख रुपये का नुकसान हुआ। वह कर्ज में भी डूब गए।
कई लोगों के लिए यह स्थिति हार मान लेने जैसी थी, लेकिन शाम ने इसे सीखने का मौका माना। उन्होंने समझा कि केवल मेहनत काफी नहीं होती, बिजनेस मॉडल और सिस्टम भी मजबूत होना चाहिए।
2022 में की नई शुरुआत
साल 2022 में वह मुंबई लौटे और नए सिरे से शुरुआत की। उन्होंने तय किया कि इस बार वह केवल क्लीनिंग सर्विस पर फोकस करेंगे। अपने छोटे भाई के सुझाव पर उन्होंने स्टार्टअप का नाम “साफसफाईवाला” रखा।
शुरुआत में उन्हें टीम मैनेजमेंट, स्टाफ ट्रेनिंग और ग्राहक भरोसा बनाने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन, धीरे-धीरे उन्होंने प्रोफेशनल मैनेजर्स की मदद ली और बिजनेस को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।
सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार

आज के समय में किसी भी सर्विस बिजनेस के लिए डिजिटल भरोसा बेहद जरूरी है। शाम कुमावत ने इसे जल्दी समझ लिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर सफाई से जुड़े वीडियो, ट्रेनिंग क्लिप और पहले/बाद के रिजल्ट वाले वीडियो पोस्ट करने शुरू किए।
इस रणनीति का बड़ा फायदा मिला। कंपनी को करीब 70% ऑर्गेनिक बुकिंग सोशल मीडिया और रेफरल के जरिए मिलने लगी। इससे मार्केटिंग खर्च भी कम रहा और ब्रांड की विश्वसनीयता भी बढ़ी।
क्या है साफसफाईवाला का यूनिक बिजनेस मॉडल?
Safsafaiwala ने खुद को दूसरे प्लेटफॉर्म्स से अलग बनाने के लिए कुछ खास रणनीतियां अपनाईं।
1. केवल क्लीनिंग सर्विस पर फोकस
कंपनी प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल या पेंटिंग जैसी दूसरी सेवाओं में नहीं गई। उसने सिर्फ डीप क्लीनिंग और हाउसकीपिंग पर ध्यान दिया।
2. इन-हाउस ट्रेनिंग सेंटर
सर्विस पार्टनर्स को सीधे काम पर नहीं भेजा जाता। पहले उनका KYC और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन होता है। फिर उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है।
3. कमीशन-बेस्ड मॉडल
कंपनी अपने ऐप के जरिए हर पूरे हुए काम पर करीब 25% कमीशन लेती है।
4. क्वालिटी कंट्रोल
नो-शो, अधूरी सफाई और खराब अनुभव जैसी समस्याओं को कम करने के लिए प्रोसेस आधारित सिस्टम तैयार किया गया।
अब कई शहरों में फैल चुका है कारोबार

शुरुआत में सिर्फ 5,000 रुपये महीना कमाने वाला यह स्टार्टअप अब तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी मुंबई, पुणे, ठाणे और दिल्ली में सेवाएं दे रही है। इसमें फुल हाउस डीप क्लीनिंग, ऑफिस क्लीनिंग और कमर्शियल क्लीनिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं।
वर्तमान में कंपनी की 30 लोगों की इन-हाउस टीम है 200 से ज्यादा एक्टिव सर्विस पार्टनर्स जुड़े हैं मंथली रन-रेट 20 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है.
2025 में 1.5 करोड़ रुपये का रेवेन्यू
कंपनी ने साल 2025 में करीब 1.5 करोड़ रुपये का सालाना रेवेन्यू दर्ज किया। यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब भारत में प्रोफेशनल होम सर्विसेज और ऑन-डिमांड क्लीनिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो शहरों में कामकाजी परिवारों की संख्या बढ़ने और प्रोफेशनल हाइजीन के प्रति जागरूकता बढ़ने से इस सेक्टर में आने वाले वर्षों में और तेजी आ सकती है।
आगे क्या है कंपनी का प्लान?

शाम कुमावत अब कंपनी को देशभर में विस्तार देना चाहते हैं। उनका लक्ष्य दिवाली 2026 तक 10 नए शहरों में एंट्री करने का है। इसके अलावा कंपनी कार वॉश, गार्डनिंग, मेड सर्विसेज जैसे नए वर्टिकल्स में भी उतरने की तैयारी कर रही है।
क्यों खास है यह सफलता की कहानी?
शाम कुमावत की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने उस काम को बिजनेस में बदला जिसे आमतौर पर लोग छोटा काम मानते हैं। यूपीएससी में असफलता और बिजनेस फेल होने के बाद भी उन्होंने मौके तलाशे और एक ऐसी समस्या को पहचाना जिसे लोग रोज महसूस करते हैं।
आज उनका स्टार्टअप यह साबित कर रहा है कि सही रणनीति, लगातार सीखने की इच्छा और ग्राहकों का भरोसा जीतने की क्षमता किसी भी छोटे आइडिया को बड़े बिजनेस में बदल सकती है।
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