“जो बीवी से करे प्यार, वो प्रेस्टिज से कैसे करे इनकार…”
90 के दशक का यह मशहूर विज्ञापन आज भी लोगों की यादों में जिंदा है। लेकिन इस विज्ञापन के पीछे जिस शख्स की सोच और मेहनत थी, उसकी कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। यह कहानी है T. T. Jagannathan की, जिन्हें भारत का ‘किचन किंग’ कहा जाता है।
टीटी जगन्नाथन ने सिर्फ एक कंपनी नहीं संभाली, बल्कि एक डूबते हुए पारिवारिक कारोबार को भारत के सबसे भरोसेमंद किचन अप्लायंस ब्रांड में बदल दिया। उन्होंने भारतीय रसोई में सुरक्षा, तकनीक और भरोसे का ऐसा मेल तैयार किया जिसने ‘प्रेस्टीज’ को घर-घर तक पहुंचा दिया।
दादा थे देश के वित्त मंत्री, विरासत में मिला कारोबार
टीटी जगन्नाथन दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके दादा T. T. Krishnamachari भारत के पूर्व वित्त मंत्री थे। उन्होंने ही साल 1928 में TTK ग्रुप की स्थापना की थी।
बाद में यही समूह घरेलू उपकरणों और किचन प्रोडक्ट्स के कारोबार में उतरा। लेकिन 1970 के दशक तक कंपनी भारी आर्थिक संकट में फंस चुकी थी।
IIT और अमेरिका से पढ़ाई के बाद संभाली कमान
टीटी जगन्नाथन ने IIT मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से ऑपरेशंस रिसर्च में मास्टर डिग्री हासिल की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने पारिवारिक बिजनेस संभाला, तब कंपनी कर्ज में डूबी हुई थी और लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच चुकी थी। लेकिन यहीं से शुरू हुई उस बदलाव की कहानी जिसने भारतीय किचन इंडस्ट्री का चेहरा बदल दिया।
‘आपके कुकर खतरनाक हैं’, सुननी पड़ी थी ये बात
उस दौर में प्रेस्टीज प्रेशर कुकर बाजार में मौजूद जरूर था, लेकिन उसकी छवि खराब हो चुकी थी। कई हादसों में कुकर फटने की शिकायतें सामने आई थीं।
जब टीटी जगन्नाथन उत्तर भारत के बाजारों में गए तो कई दुकानदारों ने उनसे साफ कहा, “आपके कुकर खतरनाक हैं, इन्हें कौन खरीदेगा?” यह बात उनके लिए बड़ा झटका थी। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय समस्या का समाधान खोजने का फैसला किया।
गैस्केट रिलीज सिस्टम ने बदल दी पूरी इंडस्ट्री
टीटी जगन्नाथन ने अपनी इंजीनियरिंग टीम के साथ मिलकर प्रेशर कुकर में गैस्केट रिलीज सिस्टम (GRS) विकसित किया। इस तकनीक में अगर कुकर का मुख्य वेंट बंद हो जाए तो अतिरिक्त भाप सुरक्षित तरीके से बाहर निकल जाती थी। इससे कुकर फटने का खतरा काफी कम हो गया।
यह इनोवेशन भारतीय किचन इंडस्ट्री में गेमचेंजर साबित हुआ। टीटी जगन्नाथन अक्सर गर्व से कहा करते थे, “उसके बाद से आज तक प्रेस्टीज का एक भी कुकर नहीं फटा।” यही वह मोड़ था जिसने ‘प्रेस्टीज’ को भरोसे का दूसरा नाम बना दिया।
कैसे बना भारत का सबसे बड़ा किचन ब्रांड?
टीटी जगन्नाथन ने सिर्फ प्रेशर कुकर तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने कंपनी को गैस स्टोव, इंडक्शन कुकटॉप, राइस कुकर, नॉन-स्टिक कुकवेयर और इलेक्ट्रिक किचन उपकरण जैसे कई सेगमेंट में उतारा। धीरे-धीरे TTK Prestige भारतीय मध्यम वर्ग की रसोई का अहम हिस्सा बन गया।
आज कंपनी भारत की सबसे बड़ी किचन अप्लायंस कंपनियों में शामिल है। कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध है और इसका मार्केट कैप 7000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
देशभर में फैले हैं प्लांट और रिसर्च सेंटर
TTK Prestige के होसुर, कोयंबटूर, करजन, रुड़की और खारदी जैसे शहरों में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट मौजूद हैं। कंपनी के पास दो बड़े रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर भी हैं, जहां नए किचन प्रोडक्ट्स और तकनीकों पर लगातार काम किया जाता है।
क्यों कहलाए ‘किचन किंग’?
टीटी जगन्नाथन को ‘किचन किंग’ इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने भारतीय रसोई को सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इनोवेशन और भरोसा साथ हो तो घरेलू उत्पाद भी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को चुनौती दे सकते हैं।
आज भी करोड़ों घरों में मौजूद है ‘प्रेस्टीज’
आज भारत के करोड़ों घरों में प्रेस्टीज के प्रोडक्ट इस्तेमाल होते हैं। खास बात यह है कि यह ब्रांड सिर्फ उत्पाद नहीं बेचता, बल्कि भरोसा बेचता है। टीटी जगन्नाथन की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही नेतृत्व, तकनीकी समझ और ग्राहक की जरूरतों को समझकर कैसे एक डूबती कंपनी को देश का सबसे बड़ा ब्रांड बनाया जा सकता है।
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