प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserve एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पीएम मोदी ने देशवासियों से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने, विदेश यात्राएं कम करने और ईंधन की बचत करने की अपील की है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संकट, महंगे कच्चे तेल और ग्लोबल सप्लाई चेन बाधाओं ने भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ा दिया है।
क्यों बढ़ी चिंता?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं और कई जगह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में भी शामिल है।
ऐसे में तेल आयात, गोल्ड इंपोर्ट और विदेशी भुगतान के लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च होते हैं। यही वजह है कि सरकार विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर दे रही है।
क्या होता है Forex Reserve?
Forex Reserve यानी विदेशी मुद्रा भंडार वह संपत्ति होती है जिसे किसी देश का केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्राओं, सोना, SDR और IMF रिजर्व पोजिशन के रूप में सुरक्षित रखता है।
भारत में इसका प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI करता है। यह किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है।
Forex Reserve क्यों होता है जरूरी?
विदेशी मुद्रा भंडार कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके जरिए आयात भुगतान किया जाता है, रुपये को स्थिर रखने में मदद मिलती है, विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच मिलता है।
अगर किसी देश के पास पर्याप्त डॉलर रिजर्व नहीं हो तो आयात महंगा हो सकता है, मुद्रा कमजोर हो सकती है और आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।
भारत के पास विदेशी मुद्रा कैसे आती है?
भारत के पास विदेशी मुद्रा कई प्रमुख स्रोतों से आती है। इनमें निर्यात, विदेशी निवेश (FDI और FPI) और विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजी गई रकम यानी Remittances सबसे बड़े स्रोत माने जाते हैं।
जब भारत दूसरे देशों को सामान बेचता है तो भुगतान डॉलर या अन्य विदेशी मुद्रा में मिलता है। इसके अलावा विदेशों में काम कर रहे भारतीय हर साल बड़ी मात्रा में पैसा भारत भेजते हैं, जिससे देश का डॉलर भंडार मजबूत होता है।
भारत के पास कितना Forex Reserve है?
RBI की हाफ-ईयरली रिजर्व मैनेजमेंट रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 तक भारत का Forex Reserve 691.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
यह रिजर्व लगभग 11 महीने के आयात बिल को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह भारत को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
गोल्ड रिजर्व भी बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड रिजर्व की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। मार्च 2026 तक कुल Forex Reserve में गोल्ड की हिस्सेदारी 16.7 प्रतिशत पहुंच गई, जो सितंबर 2025 में 13.92 प्रतिशत थी।
भारत के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना रिजर्व मौजूद है। इसमें से करीब 680.05 मीट्रिक टन सोना भारत के भीतर सुरक्षित रखा गया है।
1991 का संकट आज भी क्यों याद किया जाता है?
भारत का मौजूदा रिजर्व मजबूत जरूर है, लेकिन 1991 का आर्थिक संकट अब भी नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जाता है। उस समय भारत के पास इतने कम डॉलर बचे थे कि देश केवल कुछ हफ्तों का आयात ही कर सकता था। हालात इतने खराब हो गए थे कि भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा और IMF से आपातकालीन मदद लेनी पड़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज की स्थिति 1991 जैसी बिल्कुल नहीं है, लेकिन सरकार नहीं चाहती कि तेल की बढ़ती कीमतें, गोल्ड इंपोर्ट और लंबा वैश्विक तनाव फिर से विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव बनाएं।
पीएम मोदी ने क्यों की अपील?
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने, विदेश यात्राएं टालने, ईंधन की बचत करने और स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील की है।
सरकार का मानना है कि अगर डॉलर की गैर-जरूरी खपत घटे, आयात बिल कम हो और विदेशी मुद्रा की बचत हो तो भारत वैश्विक संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।
क्या आगे और बढ़ सकती हैं चुनौतियां?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है तो तेल की कीमतें, शिपिंग लागत और डॉलर पर दबाव और बढ़ सकता है।
इसका असर महंगाई, रुपये की कीमत और भारत के आयात बिल पर भी पड़ सकता है। हालांकि मजबूत Forex Reserve फिलहाल भारत की सबसे बड़ी आर्थिक सुरक्षा ढाल माना जा रहा है।
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