आज के समय में फैमिली एंटरटेनर फिल्मों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ज्यादातर कॉमेडी फिल्मों में डबल मीनिंग जोक्स, ओवरड्रामैटिक सीन्स और फोर्स्ड ह्यूमर देखने को मिलता है। ऐसे माहौल में कपिल शर्मा और नीतू कपूर की नई फिल्म ‘दादी की शादी’ एक अलग तरह की फैमिली फिल्म बनकर सामने आई है।
फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद ऐसा लगा था कि मेकर्स ने पूरी कहानी पहले ही दिखा दी है, लेकिन थिएटर में फिल्म देखने पर समझ आता है कि कहानी में कई ट्विस्ट और इमोशनल सरप्राइज छिपाकर रखे गए हैं।
हालांकि फिल्म हर मोर्चे पर परफेक्ट नहीं है। इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसका लंबा रनटाइम और कुछ हद तक प्रेडिक्टेबल स्क्रीनप्ले है। लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म फैमिली ऑडियंस को काफी हद तक एंटरटेन करने में सफल रहती है।
क्या है ‘दादी की शादी’ की कहानी?
फिल्म की कहानी दिल्ली के रहने वाले टोनी कालरा (कपिल शर्मा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी पिछले तीन साल से नहीं हो पा रही। उसके बाउजी (योगराज सिंह) लगातार उसके लिए लड़की ढूंढने की कोशिश करते हैं और आखिरकार कनिका आहूजा (सादिया खातीब) के रूप में रिश्ता तय हो जाता है।
सब कुछ सही चल रहा होता है और दोनों परिवार रोके की तैयारी में लगे होते हैं। तभी कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है। कनिका की दादी विमला आहूजा (नीतू कपूर) सोशल मीडिया पर ऐलान कर देती हैं कि वह खुद शादी करने जा रही हैं।
यहीं से पूरे परिवार में हड़कंप मच जाता है। टोनी के बाउजी साफ कह देते हैं कि अगर लड़की की दादी इस उम्र में शादी करेंगी तो उनका पोता यह रिश्ता नहीं करेगा। इसके बाद दोनों परिवार विमला आहूजा को शादी से रोकने के लिए शिमला पहुंच जाते हैं।
लेकिन दादी विमला और उनके लवर कैप्टन आदिविष्णु रेड्डी (आर सरथकुमार) शादी करने का फैसला कर चुके होते हैं। अब क्या दादी की शादी होगी? क्या टोनी और कनिका का रिश्ता टूट जाएगा? और परिवार आखिर इस फैसले को कैसे देखेगा? यही फिल्म की मुख्य कहानी है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसकी साफ-सुथरी कॉमेडी
‘दादी की शादी’ की सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी कॉमेडी जबरदस्ती वाली नहीं लगती। फिल्म में सिचुएशनल कॉमेडी का इस्तेमाल किया गया है और कई सीन्स सच में आपको हंसाने में सफल रहते हैं।
आज के दौर में जहां कॉमेडी फिल्मों का मतलब अक्सर वल्गर जोक्स और डबल मीनिंग डायलॉग बन चुका है, वहीं यह फिल्म साफ-सुथरी और फैमिली फ्रेंडली कॉमेडी पेश करती है। यही वजह है कि इसे पूरे परिवार के साथ आराम से देखा जा सकता है।
कपिल शर्मा की टाइमिंग फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। उनके वन-लाइनर्स कई जगह पर अच्छा मनोरंजन करते हैं और फिल्म को हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं।
फैमिली इमोशन्स को अच्छे तरीके से दिखाया गया
फिल्म सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रहती बल्कि परिवार, रिश्तों और उम्र के बाद भी इंसान की निजी खुशियों के अधिकार जैसे विषयों को भी छूती है।
दादी के दोबारा शादी करने के फैसले को जिस तरह परिवार अलग-अलग नजरिए से देखता है, वह कई जगह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।
मेकर्स ने कोशिश की है कि फिल्म सिर्फ मजाक बनकर न रह जाए बल्कि उसमें इमोशनल कनेक्शन भी बना रहे और काफी हद तक वह इसमें सफल भी रहते हैं।
रनटाइम फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी
जहां फिल्म की कहानी और कॉमेडी इसकी ताकत है, वहीं इसका लंबा रनटाइम इसकी सबसे बड़ी समस्या बन जाता है।
फिल्म करीब ढाई घंटे लंबी है और कई जगह ऐसा महसूस होता है कि कहानी जरूरत से ज्यादा खींची जा रही है। पहला हाफ काफी मजेदार और एंटरटेनिंग रहता है, लेकिन बीच-बीच में फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
सेकेंड हाफ में भी कुछ हिस्से ऐसे लगते हैं जिन्हें आसानी से छोटा किया जा सकता था। अगर फिल्म 20-25 मिनट छोटी होती तो इसका असर और बेहतर हो सकता था।
कहानी कुछ जगह प्रेडिक्टेबल हो जाती है
फिल्म की एक और कमजोरी यह है कि कहानी एक पॉइंट के बाद काफी हद तक अंदाजा लगाने लायक हो जाती है।
दर्शक आसानी से समझ सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है और कौन सा ट्विस्ट किस दिशा में जाएगा। हालांकि मेकर्स ने कुछ सरप्राइज जरूर छिपाकर रखे हैं, लेकिन पूरी फिल्म पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं लगती।
एक्टिंग के मामले में फिल्म काफी मजबूत है
कपिल शर्मा लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर पुराने अंदाज में नजर आते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई जगह संभालती है। ऐसा लगता है कि वह इस फिल्म में ज्यादा सहज और कॉन्फिडेंट दिखाई दिए हैं।
नीतू कपूर दादी विमला के किरदार में काफी प्यारी और नैचुरल लगती हैं। उन्होंने अपने किरदार में भावनात्मक गहराई भी अच्छी तरह दिखाई है।
आर सरथकुमार ने भी अपने रोल को गंभीरता और सादगी के साथ निभाया है। वहीं सादिया खातीब स्क्रीन पर काफी आकर्षक लगती हैं और अपने किरदार में फिट बैठती हैं।
रिद्धिमा कपूर ने अपने बॉलीवुड डेब्यू में ठीक-ठाक काम किया है और कहीं भी कमजोर नहीं लगतीं।
योगराज सिंह फिल्म के सरप्राइज पैकेज हैं
फिल्म में युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी नजर आते हैं और उनका किरदार काफी मजेदार है। उन्हें इस अंदाज में देखना दर्शकों के लिए एक सरप्राइज साबित हो सकता है।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कई जगह पर फिल्म को नया एनर्जी लेवल देती है।
क्या आपको ‘दादी की शादी’ देखनी चाहिए?
अगर आप लंबे समय बाद ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसे पूरे परिवार के साथ बिना किसी झिझक के देखा जा सके, तो ‘दादी की शादी’ आपको निराश नहीं करेगी।
यह फिल्म कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और इमोशन्स का अच्छा मिश्रण पेश करती है। हालांकि इसका लंबा रनटाइम और कुछ प्रेडिक्टेबल हिस्से इसे पूरी तरह शानदार बनने से रोकते हैं।
लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म थिएटर में फैमिली ऑडियंस को अच्छा अनुभव देने की क्षमता रखती है।
हमारी रेटिंग: 3/5
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