पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले रोजमर्रा के उत्पादों पर भी दिखाई देने लगा है। फेविकोल बनाने वाली कंपनी पिडिलाइट इंडस्ट्रीज ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में उसके कई लोकप्रिय उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
कंपनी के अनुसार कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की वजह से लागत पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में फेविकोल, फेवीक्विक, डॉ. फिक्सिट और एम-सील जैसे उत्पादों की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण और फर्नीचर सेक्टर में लागत बढ़ने का असर छोटे कारोबारियों और ग्राहकों दोनों पर पड़ सकता है।
आखिर क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधांशु वत्स के अनुसार पश्चिम एशिया संकट की वजह से कच्चे तेल से जुड़े रसायनों की कीमतों में भारी उछाल आया है।
उन्होंने बताया कि Vinyl Acetate Monomer (VAM) जैसे महत्वपूर्ण रसायन की कीमतों में 40% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है। VAM का इस्तेमाल चिपकाने वाले उत्पादों और कई केमिकल आधारित प्रोडक्ट्स में किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सीधे पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों पर पड़ता है, जिसमें एडहेसिव और केमिकल कंपनियां भी शामिल हैं।
कंपनी पहले ही दो बार बढ़ा चुकी है दाम
रिपोर्ट्स के अनुसार पिडिलाइट अप्रैल 2026 और मई 2026 में पहले ही कीमतें बढ़ा चुकी है।
खासतौर पर Fevicol की कीमतों में 12% से 15% तक की बढ़ोतरी की गई थी। अब कंपनी जून में एक और price hike पर विचार कर रही है।
कौन-कौन से उत्पाद हो सकते हैं महंगे?
विशेषज्ञों के अनुसार पिडिलाइट के जिन प्रमुख उत्पादों पर असर पड़ सकता है, उनमें फेविकोल, फेवीक्विक, डॉ. फिक्सिट और एम-सील जैसे ब्रांड शामिल हैं।
ये उत्पाद फर्नीचर, निर्माण कार्य, घरेलू मरम्मत और DIY उपयोग में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।
क्या ग्राहकों पर बढ़ेगा बोझ?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों के लिए पूरा बोझ खुद उठाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।
हालांकि कंपनियां सप्लाई चेन सुधार, लागत नियंत्रण और पैकेजिंग ऑप्टिमाइजेशन जैसे उपायों से दबाव कम करने की कोशिश भी करती हैं।
मांग अभी भी मजबूत क्यों बनी हुई है?
महंगाई के बावजूद कंपनी ने कहा है कि बाजार में मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है।
पिडिलाइट के अनुसार शहरी बाजारों में मांग मजबूत रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली। अप्रैल 2026 में भी उपभोक्ता मांग उत्साहजनक बनी रही।
हालांकि कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है और महंगाई लगातार बढ़ती है, तो आगे चलकर उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है।
कंपनी के नतीजे कैसे रहे?
पिडिलाइट इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए।
कंपनी का शुद्ध लाभ 36.63% बढ़कर 584.15 करोड़ रुपये रहा, जबकि राजस्व 13.24% बढ़कर 3648.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल आय 11% बढ़कर 14,867 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
शेयर बाजार में कैसा रहा प्रदर्शन?
हालांकि मजबूत नतीजों के बावजूद कंपनी का शेयर प्रदर्शन बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं रहा।
हालिया कारोबारी सत्र में पिडिलाइट का शेयर 1.72% की तेजी के साथ बंद हुआ। लेकिन पिछले 6 महीनों में शेयर में सीमित तेजी देखने को मिली, जबकि इस साल अब तक इसमें मामूली बढ़त ही दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल कच्चे माल की लागत, मार्जिन दबाव और महंगाई जैसे फैक्टर्स पर नजर बनाए हुए हैं।
पश्चिम एशिया संकट का असर कितना बड़ा?
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव केवल तेल कंपनियों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पेट्रोकेमिकल, FMCG, पेंट, केमिकल और एडहेसिव जैसे कई सेक्टरों की लागत भी बढ़ा देता है।
क्योंकि इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल सीधे या परोक्ष रूप से कच्चे तेल से जुड़े होते हैं। भारत अपनी पेट्रोकेमिकल जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे कंपनियों की लागत पर पड़ता है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहीं, सप्लाई चेन पर दबाव बना रहा और पश्चिम एशिया संकट लंबा चला, तो आने वाले महीनों में और कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं।
यानी महंगाई का असर अब केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले घरेलू उत्पाद भी धीरे-धीरे महंगे हो सकते हैं। अगर पश्चिम एशिया संकट जल्द नहीं थमता, तो आने वाले महीनों में अन्य केमिकल और FMCG कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं।
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