आज 29 अप्रैल 2026 को सर्राफा बाजार में हलचल तेज रही। एक तरफ वैश्विक स्तर पर तनाव बना हुआ है, दूसरी तरफ घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं। आमतौर पर ऐसे हालात में सोना मजबूत होता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी उलटी दिख रही है—और यही बात बाजार को दिलचस्प भी बना रही है।
सबसे पहले बात आज के ताजा भाव की। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोना हल्की गिरावट के साथ ₹1,49,918 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा। वहीं सर्राफा बाजार में कीमत सीधे ₹1,800 टूटकर ₹1,54,300 प्रति 10 ग्राम (टैक्स सहित) पर आ गई। Indian Bullion and Jewellers Association के आंकड़ों के मुताबिक सुबह तक यह और नीचे फिसलकर ₹1,48,782 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।
ध्यान देने वाली बात ये है कि यही सोना कुछ ही महीनों पहले—29 जनवरी 2026 को—₹1,80,779 के रिकॉर्ड स्तर पर था। यानी मौजूदा गिरावट सिर्फ मामूली उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक बड़ा correction माना जा रहा है।

आज का गोल्ड रेट (कैरेट के हिसाब से)
| कैरेट | 1 ग्राम | 8 ग्राम | 10 ग्राम | 100 ग्राम |
|---|---|---|---|---|
| 18 कैरेट | ₹11,334 | ₹90,672 | ₹1,13,340 | ₹11,33,400 |
| 22 कैरेट | ₹13,849 | ₹1,10,792 | ₹1,38,490 | ₹13,84,900 |
| 24 कैरेट | ₹15,107 | ₹1,20,856 | ₹1,51,070 | ₹15,10,700 |
चांदी में बड़ी गिरावट, एक दिन में 6,500 रुपये कम
सोने के साथ-साथ चांदी में भी आज बड़ा झटका देखने को मिला। सर्राफा बाजार में चांदी ₹6,500 गिरकर ₹2,44,000 प्रति किलो पर आ गई। MCX पर भी हल्की कमजोरी रही और भाव ₹2,37,100 प्रति किलो के आसपास दर्ज किया गया। IBJA के अनुसार, चांदी ₹2,36,541 प्रति किलो तक फिसल चुकी है।
अगर पिछले रिकॉर्ड की बात करें तो 29 जनवरी 2026 को चांदी ₹4,20,048 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। उस हिसाब से देखें तो मौजूदा स्तर काफी नीचे है।
गिरावट की वजह क्या है?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है—जब वैश्विक तनाव बढ़ रहा है तो सोना-चांदी गिर क्यों रहे हैं?
इस बार कहानी थोड़ी अलग है।
Iran से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक पूरी तरह गोल्ड की तरफ नहीं जा रहे, बल्कि कुछ जगहों पर मुनाफावसूली (profit booking) भी हो रही है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार का संतुलन बदल दिया है।
सीधे शब्दों में कहें तो पैसा फिलहाल एक जगह टिक नहीं रहा—कभी गोल्ड, कभी ऑयल, कभी डॉलर—यही कारण है कि बुलियन में दबाव दिख रहा है।
क्या यह खरीदारी का मौका है?
यहां मामला थोड़ा समझदारी वाला है। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो ऐसे गिरावट वाले स्तर अक्सर मौके बनाते हैं। लेकिन अगर आप शॉर्ट टर्म में एंट्री लेना चाहते हैं, तो थोड़ा सतर्क रहना बेहतर होगा क्योंकि बाजार अभी स्थिर नहीं है।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
फिलहाल साफ है कि बाजार पूरी तरह वैश्विक घटनाओं पर निर्भर है। अगर तनाव और बढ़ता है तो सोना फिर से उछल सकता है। लेकिन अगर निवेशक दूसरे एसेट्स की तरफ शिफ्ट होते रहे, तो कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष:
आज की गिरावट को सिर्फ कमजोरी मानना सही नहीं होगा। यह बाजार का एक phase है—जहां बड़े खिलाड़ी अपनी पोजिशन बदल रहे हैं। ऐसे समय में जल्दबाजी के बजाय समझदारी से कदम उठाना ही बेहतर रणनीति होती है।
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