नई दिल्ली। डेयरी कारोबार से जुड़े किसानों और पशुपालकों के लिए हिमाचल प्रदेश से बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य सरकार ने छोटे डेयरी किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दूध खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (मिल्कफेड) ने प्रत्येक डेयरी उत्पादक से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध खरीदने की सीमा तय की है। सरकार का कहना है कि इस कदम से बढ़ी हुई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ छोटे किसानों तक पहुंच सकेगा और बड़े उत्पादकों तक सीमित नहीं रहेगा।
छोटे डेयरी किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
राज्य सरकार के अनुसार, दूध खरीद की नई सीमा लागू करने का उद्देश्य सहकारी डेयरी व्यवस्था में छोटे पशुपालकों की भागीदारी बढ़ाना है। अक्सर बड़े डेयरी उत्पादक अधिक मात्रा में दूध बेचकर अधिकांश लाभ हासिल कर लेते हैं, जबकि छोटे किसान पीछे रह जाते हैं। नई व्यवस्था के बाद अधिक संख्या में छोटे किसान बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठा सकेंगे।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी रणनीति के तहत दूध खरीद नीति में यह बदलाव किया गया है।
गाय और भैंस के दूध की MSP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादकों को राहत देते हुए दूध की खरीद कीमतों में बड़ी वृद्धि की है।
- गाय के दूध की MSP: ₹32 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर
- भैंस के दूध की MSP: ₹47 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर
गाय के दूध की कीमत में ₹29 प्रति लीटर और भैंस के दूध की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि देश के कई राज्यों की तुलना में काफी अधिक मानी जा रही है और इससे डेयरी व्यवसाय की लाभप्रदता बढ़ने की उम्मीद है।
डेयरी क्षेत्र में बढ़ी किसानों की भागीदारी
सरकार के अनुसार, दूध की बेहतर कीमत मिलने और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। पिछले दो वर्षों में मिल्कफेड से जुड़े डेयरी किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- 2024 में जुड़े किसानों की संख्या: 28,645
- वर्तमान संख्या: 42,500 से अधिक
यह आंकड़ा दर्शाता है कि अधिक किसान अब संगठित डेयरी नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य और बाजार तक पहुंच मिल रही है।
दूध कलेक्शन में भी आया बड़ा उछाल
दूध उत्पादन और खरीद दोनों में तेजी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में राज्य में दैनिक दूध संग्रहण में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- पहले दैनिक संग्रहण: 1.57 लाख लीटर
- वर्तमान दैनिक संग्रहण: 2.20 लाख लीटर
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर खरीद मूल्य और सहकारी संस्थाओं की सक्रियता के कारण डेयरी क्षेत्र में यह वृद्धि संभव हुई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
हिमाचल प्रदेश की बड़ी आबादी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय पर निर्भर है। दूध की कीमतों में वृद्धि से किसानों की आय बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही युवाओं का डेयरी व्यवसाय की ओर रुझान भी बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश सरकार का दूध खरीद सीमा और MSP बढ़ाने का फैसला राज्य के हजारों छोटे डेयरी किसानों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। गाय और भैंस दोनों के दूध पर बेहतर कीमत मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी, जबकि सहकारी डेयरी व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में इसका असर राज्य के डेयरी उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है।


