नई दिल्ली। भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं बल्कि निवेश, बचत और सामाजिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों और लंबी अवधि की बचत तक, सोने की मांग लगातार बनी रहती है। हालांकि जब भी सोना खरीदने की बात आती है तो अधिकांश लोगों के मन में पीले रंग का पारंपरिक सोना ही आता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि बाजार में येलो गोल्ड के अलावा व्हाइट गोल्ड और रोज गोल्ड (पिंक गोल्ड) भी उपलब्ध हैं।
आज ज्वैलरी बाजार में डिजाइन, फैशन और निवेश की बदलती जरूरतों के कारण इन तीनों प्रकार के गोल्ड की मांग बढ़ रही है। ऐसे में निवेशकों और ग्राहकों के सामने यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर किस रंग का सोना खरीदना ज्यादा समझदारी होगी और किस विकल्प में भविष्य में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है।
सोने का रंग क्यों बदलता है?
कई लोग यह मानते हैं कि पीला सोना ही असली सोना होता है जबकि सफेद या गुलाबी रंग का सोना नकली होता है। वास्तव में ऐसा नहीं है। सोने का रंग उसकी शुद्धता से नहीं बल्कि उसमें मिलाई जाने वाली अन्य धातुओं से तय होता है।
शुद्ध सोना यानी 24 कैरेट गोल्ड प्राकृतिक रूप से पीले रंग का होता है। लेकिन यह काफी मुलायम होता है। इसलिए ज्वैलरी बनाने के लिए इसमें अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिन्हें अलॉय कहा जाता है। इन्हीं धातुओं के मिश्रण के आधार पर गोल्ड का रंग बदल जाता है।
येलो गोल्ड क्यों है सबसे लोकप्रिय?
येलो गोल्ड भारत में सबसे ज्यादा खरीदा और पसंद किया जाने वाला सोना है। इसमें सोने के साथ कॉपर और जिंक जैसी धातुएं मिलाई जाती हैं ताकि इसकी मजबूती बढ़ सके।
येलो गोल्ड की सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च स्वीकार्यता है। भारत के लगभग सभी ज्वैलर्स इसे आसानी से खरीदते और बेचते हैं। यही वजह है कि निवेश के लिहाज से इसे सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का उद्देश्य सिर्फ निवेश करना है तो उसे येलो गोल्ड को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि इसकी रीसेल वैल्यू बेहतर रहती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
व्हाइट गोल्ड क्या होता है?
व्हाइट गोल्ड देखने में चांदी या प्लैटिनम जैसा लगता है। इसे तैयार करने के लिए सोने में पैलेडियम, सिल्वर या निकल जैसी धातुएं मिलाई जाती हैं। इसके बाद इसकी सतह पर रोडियम की कोटिंग की जाती है, जिससे यह चमकदार सफेद दिखाई देता है।
व्हाइट गोल्ड का उपयोग विशेष रूप से डायमंड ज्वैलरी में किया जाता है क्योंकि इसका रंग हीरे की चमक को और अधिक आकर्षक बनाता है।
हालांकि इसकी एक कमी भी है। समय के साथ रोडियम कोटिंग घिस सकती है, जिसके बाद दोबारा पॉलिश या कोटिंग करानी पड़ सकती है। इससे अतिरिक्त खर्च आता है।
रोज गोल्ड या पिंक गोल्ड की बढ़ती लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में रोज गोल्ड की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इसमें कॉपर की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसका रंग हल्का गुलाबी दिखाई देता है।
युवा ग्राहकों और आधुनिक डिजाइन पसंद करने वाले लोगों के बीच इसकी मांग काफी बढ़ी है। कई अंतरराष्ट्रीय ज्वैलरी ब्रांड और स्मार्टवॉच कंपनियां भी रोज गोल्ड फिनिश वाले उत्पाद लॉन्च कर रही हैं।
कॉपर की अधिक मात्रा के कारण रोज गोल्ड अपेक्षाकृत मजबूत माना जाता है। इसलिए यह रोजाना उपयोग होने वाली ज्वैलरी के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
क्या तीनों गोल्ड की कीमत अलग होती है?
सामान्य धारणा है कि व्हाइट या रोज गोल्ड ज्यादा महंगा होता है। वास्तव में सोने की मूल कीमत उसके रंग से नहीं बल्कि उसकी शुद्धता यानी कैरेट पर निर्भर करती है।
यदि 22 कैरेट येलो गोल्ड, 22 कैरेट व्हाइट गोल्ड और 22 कैरेट रोज गोल्ड की तुलना की जाए तो तीनों में सोने की मात्रा लगभग समान होती है। हालांकि डिजाइन, ब्रांड, कोटिंग और मेकिंग चार्ज के कारण कीमत में अंतर आ सकता है।
इसलिए खरीदारी के समय केवल रंग देखकर निर्णय लेने के बजाय कैरेट और हॉलमार्क पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
निवेश के लिए कौन सा गोल्ड सबसे बेहतर?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश के लिए येलो गोल्ड सबसे बेहतर विकल्प है। इसके पीछे कई कारण हैं।
सबसे पहले, इसकी रीसेल वैल्यू अधिक होती है। दूसरा, इसे देशभर में आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है। तीसरा, निवेशकों और ज्वैलर्स के बीच इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
यदि आपका उद्देश्य केवल निवेश है तो फिजिकल गोल्ड की बजाय गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्प भी विचार करने योग्य हो सकते हैं।
ज्वैलरी खरीदने वालों के लिए क्या है सही विकल्प?
अगर आपका मुख्य उद्देश्य फैशन, डिजाइन और आधुनिक लुक है तो व्हाइट गोल्ड और रोज गोल्ड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। विशेष रूप से डायमंड ज्वैलरी के लिए व्हाइट गोल्ड काफी पसंद किया जाता है।
वहीं यूनिक और ट्रेंडी डिजाइन पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए रोज गोल्ड आकर्षक विकल्प माना जाता है।
सोना खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सोना खरीदते समय केवल रंग या डिजाइन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। खरीदारों को BIS हॉलमार्क, HUID नंबर, कैरेट, मेकिंग चार्ज और ज्वैलर की विश्वसनीयता की भी जांच करनी चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें क्योंकि यह उसकी शुद्धता की सरकारी गारंटी देता है।
आज क्या हैं सोने और चांदी के दाम?
बाजार आंकड़ों के अनुसार 15 जून को 24 कैरेट सोना करीब ₹1.52 लाख से ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है।
चांदी की कीमत ₹2.44 लाख से ₹2.49 लाख प्रति किलोग्राम के बीच चल रही है। पिछले कुछ दिनों की तेज गिरावट के बाद बाजार में आई यह स्थिरता निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
निष्कर्ष
येलो, व्हाइट और रोज गोल्ड तीनों ही असली सोने के रूप हैं। इनके बीच सबसे बड़ा अंतर रंग, डिजाइन और उपयोग का है। यदि आपका लक्ष्य निवेश और भविष्य में बेहतर रीसेल वैल्यू है तो येलो गोल्ड सबसे उपयुक्त रहेगा। वहीं फैशन और आधुनिक ज्वैलरी पसंद करने वाले लोग व्हाइट या रोज गोल्ड चुन सकते हैं। किसी भी प्रकार का सोना खरीदते समय रंग से ज्यादा उसकी शुद्धता, हॉलमार्क और बाजार में मांग को प्राथमिकता देना चाहिए।


