केंद्र का बड़ा फैसला—किसानों को मिलेगा MSP जैसा सहारा
देश के किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन (20 LMT) आलू की सरकारी खरीद को हरी झंडी दे दी गई है।
यह खरीद Market Intervention Scheme (MIS) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के लिए की जाएगी, जिसमें किसानों को ₹6,500 प्रति मीट्रिक टन की निर्धारित कीमत मिलेगी।
इस फैसले का सीधा मकसद है—किसानों को मंडी में कम कीमत (distress sale) से बचाना और उन्हें उनकी फसल का सही मूल्य दिलाना।
क्या है Market Intervention Scheme (MIS) और क्यों जरूरी है?
Market Intervention Scheme एक ऐसी योजना है, जिसे खास तौर पर उन फसलों के लिए लागू किया जाता है जो MSP के दायरे में नहीं आतीं—जैसे आलू, प्याज आदि।
इस योजना के तहत:
- सरकार बाजार में गिरती कीमतों के समय हस्तक्षेप करती है
- एक तय “Market Intervention Price” पर खरीद करती है
- किसानों को घाटे में बेचने से बचाया जाता है
आलू जैसी फसल, जिसमें उत्पादन ज्यादा और कीमतें अक्सर अस्थिर रहती हैं, उसके लिए MIS बेहद अहम भूमिका निभाता है।
यूपी में क्यों जरूरी थी आलू खरीद?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। हर साल यहां बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है, लेकिन समस्या तब आती है जब:
- उत्पादन ज्यादा हो जाता है
- बाजार में कीमतें गिर जाती हैं
- कोल्ड स्टोरेज भर जाते हैं
ऐसे हालात में किसानों को मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ती है।
इसी संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
किसानों को कितना फायदा होगा?
इस फैसले से किसानों को कई स्तर पर फायदा मिलेगा:
1. तय कीमत की गारंटी
₹6,500 प्रति टन की कीमत से किसानों को न्यूनतम आय सुनिश्चित होगी
2. बाजार में स्थिरता
सरकारी खरीद से खुले बाजार में कीमतों का संतुलन बना रहेगा
3. नुकसान से बचाव
किसानों को औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी
4. उत्पादन के प्रति भरोसा
अगले सीजन में किसान ज्यादा आत्मविश्वास के साथ खेती कर सकेंगे
कुल मिलाकर, यह कदम किसानों के लिए income security + market stability दोनों सुनिश्चित करता है।
केंद्र का निवेश: ₹203 करोड़ से ज्यादा का सपोर्ट
इस पूरी योजना में केंद्र सरकार करीब ₹203.15 करोड़ का वित्तीय योगदान दे रही है।
यह दिखाता है कि सरकार सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि financial backing के साथ किसानों के साथ खड़ी है।
अन्य राज्यों के लिए भी बड़े फैसले
यह फैसला सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। सरकार ने अन्य राज्यों के लिए भी अहम कदम उठाए हैं:
आंध्र प्रदेश: चना खरीद बढ़ी
Price Support Scheme (PSS) के तहत:
- पहले 94,500 MT चना खरीद की मंजूरी
- अब बढ़ाकर 1,13,250 MT कर दी गई
इससे चना किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक: अरहर (तूर) खरीद की समयसीमा बढ़ी
Tur dal की खरीद के लिए:
- 30 दिन का एक्सटेंशन
- अब 15 मई 2026 तक खरीद जारी रहेगी
इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
सरकार का संदेश: “कोई किसान मजबूरी में सस्ता न बेचे”
Shivraj Singh Chouhan ने साफ कहा कि सरकार का लक्ष्य है:
“कोई भी किसान बाजार दबाव के कारण अपनी फसल सस्ते में बेचने को मजबूर न हो।”
यह कदम इसी सोच का हिस्सा है, जहां केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को समय पर राहत देने की कोशिश कर रही हैं।
ग्राउंड रियलिटी: क्यों जरूरी हैं ऐसे फैसले?
भारत में खेती अब भी कई चुनौतियों से जूझ रही है:
- कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
- स्टोरेज की सीमित सुविधा
- बिचौलियों का दबाव
- लागत बढ़ना
ऐसे में MIS और PSS जैसी योजनाएं किसानों के लिए “safety net” का काम करती हैं।
क्या यह कदम लंबे समय में असरदार होगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर:
- समय पर खरीद हो
- पारदर्शी सिस्टम लागू हो
- भुगतान समय पर मिले
तो यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में बड़ा रोल निभा सकती है।
लेकिन अगर क्रियान्वयन में देरी हुई, तो इसका असर सीमित रह सकता है।
निष्कर्ष: किसानों के लिए राहत, लेकिन निगरानी जरूरी
उत्तर प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन आलू खरीद का फैसला निश्चित रूप से किसानों के लिए बड़ी राहत है।
यह कदम न सिर्फ उन्हें बेहतर कीमत देगा, बल्कि बाजार में स्थिरता भी लाएगा।
हालांकि, असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह योजना जमीन पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू होती है।
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