Lucknow-Kanpur Expressway News: करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। लगातार हो रही मानसूनी बारिश के बीच एक्सप्रेसवे के दो स्थानों पर सड़क धंस गई है और कई हिस्सों में डामर की परत उखड़ने की शिकायत सामने आई है। घटना के बाद निर्माण एजेंसी ने मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है, जबकि NHAI का कहना है कि भारी बारिश के कारण कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ है और इसे तेजी से ठीक किया जा रहा है।
उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई बड़ी खामी
Unnao, Uttar Pradesh: Just 12 days after its inauguration, a large section of the main route of the Lucknow-Kanpur Greenfield National Elevated Expressway, built at a cost of 4200 crore rupees, has sunk due to rains. Following the emergence of a video of the road collapse on… pic.twitter.com/xfpN8UbD2z
— IANS (@ians_india) July 26, 2026 13 जुलाई को आम लोगों के लिए खोले गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन में कोरारी के पास करीब 9 मीटर लंबा हिस्सा धंस गया। सड़क बैठने से गहरे गड्ढे बन गए, जिनमें लगातार बारिश के कारण पानी भर गया है। इससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
इसके अलावा, टोल प्लाजा से लगभग एक किलोमीटर पहले भी करीब 8 फीट सड़क धंसने की सूचना मिली है। दोनों स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं।
निर्माण कंपनी ने शुरू कराया मरम्मत कार्य
एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत शुरू कर दी है। प्रभावित स्थानों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की गति नियंत्रित की जा रही है और चालक सावधानी से गुजर रहे हैं।
निर्माण एजेंसी का कहना है कि सड़क को जल्द से जल्द पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
4,200 करोड़ रुपये की लागत से बना है एक्सप्रेसवे
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से कराया है। परियोजना की खास बात यह थी कि इसे Automated Intelligence Machine Guided Construction (AIMGC) तकनीक से तैयार किया गया।
दावा किया गया था कि अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में इस तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया गया यह पहला एक्सप्रेसवे है। इसलिए इस परियोजना को आधुनिक सड़क निर्माण तकनीक का बड़ा उदाहरण माना जा रहा था।
पहली ही बारिश में उखड़ी डामर की परत
हालांकि, पहली ही मानसूनी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड सेक्शन में किलोमीटर संख्या 64.200 के आसपास कई मीटर तक डामर की परत उखड़ गई। सोशल मीडिया पर क्षतिग्रस्त सड़क के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें सड़क की खराब स्थिति साफ दिखाई दे रही है।
लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क की सतह प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे निर्माण गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं समस्याएं
यह पहली बार नहीं है जब इस एक्सप्रेसवे पर निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आई हों। इससे पहले भी एक्सप्रेसवे के किनारों पर कई स्थानों पर मिट्टी का कटाव देखा गया था। वहीं, अचलगंज के पास अप्रोच रोड का एक हिस्सा भी धंस गया था।
कई जगहों पर मरम्मत के लिए किए गए पैचवर्क के कारण सड़क की समतलता भी प्रभावित हुई है। वाहन चालकों का कहना है कि पुलों और पुलियाओं पर बने एक्सपेंशन जॉइंट्स से गुजरते समय तेज झटके महसूस हो रहे हैं, जिससे सफर का अनुभव प्रभावित हो रहा है।
NHAI ने क्या कहा?
एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर वी. कुंडू ने कहा कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कुछ स्थानों पर सड़क को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है और यातायात सामान्य रूप से जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि नया एक्सप्रेसवे होने के कारण शुरुआती चरण में इस प्रकार की छोटी-मोटी तकनीकी समस्याएं असामान्य नहीं मानी जातीं। संबंधित टीम लगातार निगरानी कर रही है और जहां भी आवश्यकता होगी, वहां तत्काल सुधार कार्य किया जाएगा।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
उद्घाटन के महज 13 दिनों के भीतर सड़क धंसने और डामर उखड़ने की घटनाओं ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी लागत और आधुनिक तकनीक से बने एक्सप्रेसवे में शुरुआती दिनों में इस तरह की खराबियां सामने आना चिंता का विषय है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि मरम्मत के बाद सड़क कितनी टिकाऊ साबित होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


