नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच चीन ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जून 2026 में चीन ने करीब 173 टन (1,73,000 किलो) सोना आयात किया, जो मार्च 2024 के बाद सबसे बड़ी मासिक खरीदारी मानी जा रही है। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और इससे संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल चीन अभी भी सोने को सुरक्षित निवेश मान रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आई गिरावट का फायदा उठाते हुए चीन ने बड़े पैमाने पर खरीदारी की है। इस कदम से वैश्विक गोल्ड मार्केट में नई हलचल देखने को मिल रही है और निवेशकों की नजर अब सोने की आगे की चाल पर टिक गई है।
हाइलाइट्स
- जून 2026 में चीन ने 1,73,000 किलो (173 टन) सोना खरीदा।
- मार्च 2024 के बाद यह सबसे बड़ी मासिक खरीदारी रही।
- अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के बावजूद सोने की मांग मजबूत बनी रही।
- नई लाइसेंसिंग व्यवस्था से आयात में तेजी आने की संभावना।
- विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने “Buying the Dip” रणनीति अपनाई।
कीमतें गिरते ही चीन ने बढ़ा दी खरीदारी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हाल के महीनों में नरमी देखने को मिली। आमतौर पर जब कीमतें नीचे आती हैं, तब निवेशक खरीदारी बढ़ाते हैं। चीन ने भी इसी रणनीति पर काम किया और जून महीने में रिकॉर्ड स्तर पर सोना आयात किया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह खरीदारी केवल मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित मांग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए भी की गई है।
दुनिया के सबसे बड़े बुलियन बाजार में बनी हुई है मजबूत मांग
चीन दुनिया के सबसे बड़े बुलियन और गोल्ड उपभोक्ता बाजारों में शामिल है। कीमतों में गिरावट के बावजूद वहां सोने की मांग कमजोर नहीं हुई। इसके उलट निवेशकों ने कम कीमतों को अवसर मानते हुए बड़ी मात्रा में सोने की खरीदारी की।
इसी वजह से चीन का सोना आयात जून में दो साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।
विश्लेषकों ने क्या कहा?
जिनरुई फ्यूचर्स (Jinrui Futures) के विश्लेषक जिजिये वू के अनुसार, हालिया खरीदारी के पीछे सबसे बड़ा कारण “Buying the Dip” यानी कीमतें गिरने पर खरीदारी करना है।
उनके मुताबिक—
- कमर्शियल बैंकों को रिटेल ग्राहकों के लिए पर्याप्त फिजिकल गोल्ड स्टॉक रखना पड़ता है।
- गोल्ड एक्युमुलेशन प्लान के लिए भी अतिरिक्त सोने की जरूरत होती है।
- भविष्य में मांग बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए बैंक सुरक्षा भंडार (Safety Reserve) भी तैयार रखते हैं।
ETF में भी बढ़ रहा निवेश
शंघाई गोल्ड एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बुलियन-बैक्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी लगभग 28 टन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है। इससे साफ है कि केवल फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि गोल्ड आधारित निवेश उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
यह ट्रेंड बताता है कि निवेशक अभी भी सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं।
नई लाइसेंसिंग व्यवस्था का भी पड़ा असर
चीन में सोने का आयात पूरी तरह नियंत्रित व्यवस्था के तहत होता है। बैंकों को सोना आयात करने के लिए पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) द्वारा तय किए गए कोटा और लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
1 जून 2026 से लागू नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के बाद माना जा रहा है कि बैंकों ने अपने मौजूदा आयात कोटे का अधिकतम उपयोग किया, जिससे जून महीने में सोने का आयात तेजी से बढ़ गया।
क्या भारत पर भी पड़ सकता है असर?
चीन की इतनी बड़ी खरीदारी का असर वैश्विक गोल्ड मार्केट पर पड़ सकता है। यदि दुनिया के बड़े खरीदार लगातार सोना खरीदते रहे, तो आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
भारत जैसे देशों में, जहां सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर की चाल से प्रभावित होती हैं, वहां भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के मौसम में मांग बढ़ने पर घरेलू बाजार में सोना महंगा हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और बड़े देशों की मजबूत मांग के चलते सोना लंबे समय में सुरक्षित निवेश बना रह सकता है। हालांकि अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए निवेशकों को चरणबद्ध (SIP या नियमित अंतराल) निवेश की रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है।


