Gold Import Decline: भारत में सोने के आयात में अगस्त महीने के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में देश ने करीब 2.3 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 5.4 अरब डॉलर था। यानी सालाना आधार पर सोने के आयात की कीमत में आधे से भी ज्यादा की कमी आई है।
नई दिल्ली: भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के लिए बड़ी मात्रा में सोने की खरीदारी होती है। ऐसे में आयात में इतनी बड़ी गिरावट को अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोने के आयात में आई इस गिरावट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से डॉलर की बचत और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की बात कही थी। हालांकि, केवल इस अपील को आयात में गिरावट की एकमात्र वजह मानना उचित नहीं होगा। सोने की कीमत, घरेलू मांग, वैश्विक बाजार की परिस्थितियां और आयात की लागत जैसे कई कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
अगस्त में 2.3 अरब डॉलर का सोना आया भारत
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत का सोने का आयात घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया। अगस्त 2025 में देश ने करीब 5.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।
इस हिसाब से एक साल में सोने के आयात के मूल्य में करीब 3.1 अरब डॉलर की कमी आई है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो गिरावट करीब 57 फीसदी की है।
सोने के आयात में कमी इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत को अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से खरीदना पड़ता है। ऐसे में आयात बिल कम होने से देश के विदेशी मुद्रा खर्च पर भी दबाव घट सकता है।
PM मोदी की अपील की क्यों हो रही चर्चा?
सोने की खरीदारी का भारत के आयात बिल पर सीधा असर पड़ता है। देश में सोने की घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोने की खरीदारी को लेकर सावधानी बरतने की अपील की थी। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत और आयात पर निर्भरता को कम करना था।
अब अगस्त के आंकड़ों में सोने के आयात में बड़ी गिरावट सामने आने के बाद इस अपील की चर्चा फिर तेज हो गई है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि आयात में पूरी गिरावट सिर्फ प्रधानमंत्री की अपील की वजह से हुई है। बाजार में सोने की कीमतों और मांग में बदलाव भी महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
भारत के कुल आयात में क्या हुआ बदलाव?
अगस्त में भारत का कुल वस्तु आयात 72.67 अरब डॉलर रहा। पिछले साल के मुकाबले इसमें करीब 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जुलाई 2026 में देश का वस्तु आयात 76.22 अरब डॉलर रहा था।
यानी अगस्त में कुल आयात जुलाई के मुकाबले कम रहा, लेकिन सालाना आधार पर आयात काफी ऊंचा रहा।
इससे साफ है कि सोने के आयात में गिरावट के बावजूद देश के कुल आयात पर इसका असर सीमित रहा, क्योंकि अन्य वस्तुओं का आयात मजबूत बना हुआ है।
भारत का निर्यात 43.81 अरब डॉलर पर पहुंचा
अगस्त में भारत के वस्तु निर्यात में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार के मुताबिक, सालाना आधार पर वस्तु निर्यात 26.1 फीसदी बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया।
यह भारत के वस्तु निर्यात का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन बताया गया है। निर्यात में वृद्धि से देश को विदेशी मुद्रा कमाने में मदद मिलती है और आयात के भुगतान के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलती है।
वाणिज्य मंत्रालय के सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, निर्यात में बढ़ोतरी के पीछे इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, केमिकल और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन उत्पादों की मांग अमेरिका, यूरोपीय संघ और BRICS देशों में मजबूत रही।
हालांकि, मासिक आधार पर निर्यात में थोड़ी कमी आई। जुलाई में भारत का वस्तु निर्यात 44.24 अरब डॉलर था, जो अगस्त में घटकर 43.81 अरब डॉलर रह गया।
व्यापार घाटा भी हुआ कम
भारत का व्यापार घाटा अगस्त में 26.86 अरब डॉलर रहा। पिछले साल अगस्त में यह 27.22 अरब डॉलर था। यानी सालाना आधार पर व्यापार घाटे में मामूली सुधार हुआ है।
जुलाई 2026 में व्यापार घाटा करीब 32 अरब डॉलर था। इस लिहाज से अगस्त में व्यापार घाटे में मासिक आधार पर भी अच्छी कमी देखने को मिली।
व्यापार घाटा तब बनता है जब किसी देश का कुल आयात उसके कुल निर्यात से अधिक होता है। भारत के मामले में लंबे समय से सोना और कच्चा तेल जैसे आयात व्यापार घाटे के प्रमुख घटकों में रहे हैं।
ऐसे में सोने के आयात में तेज गिरावट और निर्यात में बढ़ोतरी दोनों को एक साथ देखा जाए तो अगस्त के व्यापार आंकड़े अपेक्षाकृत बेहतर तस्वीर पेश करते हैं।
चालू खाता घाटा कितना रहा?
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा 4.2 अरब डॉलर रहा। यह GDP का करीब 0.5 फीसदी था।
पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में चालू खाता घाटा GDP के करीब 0.4 फीसदी के बराबर था।
इस दौरान पश्चिम एशिया में संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, LPG और उर्वरक जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव रहा। इसके बावजूद चालू खाता घाटा अपेक्षाकृत नियंत्रित स्तर पर रहा।
विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी हाल के आंकड़ों में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.9 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा भंडार में इस बड़ी बढ़ोतरी में RBI की FCNR(B) जमा योजना से जुड़े डॉलर इनफ्लो को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
इस बढ़ोतरी के बाद भारत विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया और रूस को पीछे छोड़ दिया। भारत से ऊपर चीन, जापान और स्विट्जरलैंड हैं।
सोने का कम आयात भारत के लिए क्यों अहम है?
सोने का आयात घटने से सबसे बड़ा फायदा विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव में कमी के रूप में हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है।
अगर सोने की घरेलू मांग में कमी आती है और आयात घटता है तो डॉलर की मांग पर भी कुछ दबाव कम हो सकता है। इससे व्यापार घाटे और चालू खाते की स्थिति को संभालने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण आयात बिल में बदलाव सिर्फ मात्रा के आधार पर नहीं होता। इसलिए आने वाले महीनों के आंकड़ों से ही यह स्पष्ट होगा कि अगस्त में आई गिरावट अस्थायी थी या भारतीय सोने की मांग में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
आगे क्या रहेगा नजर में?
अब बाजार की नजर आने वाले महीनों के सोने के आयात आंकड़ों पर रहेगी। अगर आयात लगातार कम बना रहता है तो इसका मतलब घरेलू मांग, कीमतों या खरीदारी के व्यवहार में बदलाव हो सकता है।
दूसरी ओर, त्योहारों और शादी के सीजन में सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में आगे आयात में दोबारा तेजी भी आ सकती है।
इसलिए अगस्त के आंकड़ों को फिलहाल एक महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन इससे पूरे साल की सोने की मांग का रुझान तय करना जल्दबाजी होगी।
Source: वाणिज्य मंत्रालय, RBI और Bloomberg के आंकड़ों पर आधारित।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध सरकारी और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। सोने की कीमतों और आयात में बदलाव के कई आर्थिक एवं वैश्विक कारण हो सकते हैं। इसे प्रधानमंत्री की अपील और आयात में गिरावट के बीच सीधे कारण-परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


