Wealth Creation Tips: क्या आपको लगता है कि बड़ा फंड तैयार करने के लिए मोटी सैलरी होना जरूरी है? अगर हां, तो यह सोच आपकी वेल्थ क्रिएशन की राह में सबसे बड़ी बाधा बन सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा कमाई से ज्यादा जरूरी है कि आप अपनी कमाई को किस तरह मैनेज करते हैं, कितनी नियमितता से निवेश करते हैं और बढ़ती इनकम के साथ अपने खर्च को कितना नियंत्रित रखते हैं।
कई लोग अच्छी सैलरी का इंतजार करते रहते हैं और इसी वजह से निवेश शुरू करने में देर कर देते हैं। दूसरी तरफ, सीमित आय वाले लोग भी अनुशासन के साथ हर महीने निवेश करके लंबे समय में बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। आशीष कांचरला एंड एसोसिएट्स के फाउंडर और सीए के मुताबिक, वेल्थ क्रिएशन के लिए कुछ बुनियादी वित्तीय आदतों को अपनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
1. पहले निवेश करें, फिर खर्च
वेल्थ क्रिएशन के रास्ते में सबसे बड़ी समस्या अक्सर कम कमाई नहीं, बल्कि पैसे को लेकर हमारी सोच होती है। आमतौर पर लोग पहले अपनी जरूरतों और इच्छाओं पर खर्च करते हैं और महीने के अंत में जो पैसा बचता है, उसे सेविंग या निवेश के लिए अलग रखते हैं।
यही आदत लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती है। इसके बजाय ‘पहले निवेश, बाद में खर्च’ का नियम अपनाना बेहतर माना जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी मासिक सैलरी 1 लाख रुपये है तो आप अपनी क्षमता के अनुसार शुरुआत में 20,000 से 30,000 रुपये तक की रकम सेविंग और निवेश के लिए अलग कर सकते हैं। इसके बाद बाकी रकम से अपने जरूरी खर्चों को मैनेज करें।
हालांकि, निवेश की रकम आपकी आय, खर्च, कर्ज और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से तय होनी चाहिए। ऐसा अमाउंट तय करना जरूरी है जिसे आप लंबे समय तक बिना परेशानी जारी रख सकें।
2. निवेश को बनाएं नियमित आदत
निवेश कोई ऐसा काम नहीं है जिसे साल में कुछ खास मौकों पर किया जाए। वेल्थ क्रिएशन के लिए नियमित निवेश और अनुशासन सबसे अहम है।
कई लोग उत्साह में निवेश शुरू करते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद निवेश की रकम रोक देते हैं। इससे लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा कम हो सकता है।
इसलिए शुरुआत में ही ऐसी निवेश राशि तय करें जिसे आपकी मौजूदा इनकम और खर्चों को देखते हुए लगातार जारी रखा जा सके। म्यूचुअल फंड में SIP जैसे विकल्प नियमित निवेश की आदत बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन किसी भी निवेश विकल्प का चुनाव जोखिम और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
याद रखें, वेल्थ क्रिएशन में सिर्फ एक बार बड़ा निवेश करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है लंबे समय तक लगातार निवेश करते रहना।
3. सैलरी बढ़े तो खर्च नहीं, निवेश बढ़ाएं
इनकम बढ़ने के साथ खर्च बढ़ जाना लोगों की सबसे आम वित्तीय गलतियों में से एक है। इसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है।
मान लीजिए आज आपकी मासिक आय 1 लाख रुपये है और कुछ वर्षों बाद यह बढ़कर 2.5 लाख रुपये हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपके खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ जाएं।
अगर इनकम बढ़ने पर हर बार नई कार, महंगा फोन, बड़ा घर या दूसरी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च बढ़ता गया, तो ज्यादा कमाई के बावजूद आपकी नेट वर्थ बहुत तेजी से नहीं बढ़ेगी।
इसके बजाय सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम को धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश करें। उदाहरण के लिए, अगर आपकी इनकम में 20 फीसदी की बढ़ोतरी होती है तो उसका पूरा हिस्सा खर्च करने के बजाय एक हिस्सा निवेश बढ़ाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस तरह समय के साथ आपकी निवेश राशि भी बढ़ेगी और कंपाउंडिंग का फायदा भी ज्यादा मिल सकता है।
4. इंश्योरेंस को निवेश नहीं, सुरक्षा समझें
वेल्थ क्रिएशन के साथ फाइनेंशियल प्रोटेक्शन भी जरूरी है। खासकर अगर परिवार आपकी आय पर निर्भर है तो किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य वित्तीय सुरक्षा देना है, न कि निवेश से रिटर्न कमाना।
अगर आप नौकरी करते हैं और आपके परिवार में जीवनसाथी या बच्चे आपकी आय पर निर्भर हैं तो पर्याप्त लाइफ कवर पर विचार करना जरूरी है। टर्म इंश्योरेंस आमतौर पर शुद्ध जीवन सुरक्षा प्रदान करता है और इसकी लागत कई पारंपरिक जीवन बीमा उत्पादों की तुलना में कम हो सकती है।
हालांकि, कितने कवर की जरूरत है, यह आपकी आय, मौजूदा देनदारियों, परिवार की जरूरतों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
यानी निवेश के लिए अलग रणनीति बनाएं और इंश्योरेंस को परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करें।
5. निवेश पोर्टफोलियो में रखें डायवर्सिफिकेशन
वेल्थ क्रिएशन के लिए सिर्फ निवेश शुरू करना पर्याप्त नहीं है। आपका पैसा कहां निवेश हो रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अगर आपका पूरा पैसा किसी एक एसेट क्लास में लगा है तो जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार अलग-अलग एसेट क्लास में पैसा बांटने पर विचार कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर पोर्टफोलियो में इक्विटी, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड इनकम और गोल्ड जैसे अलग-अलग विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि निवेश से मिलने वाला रिटर्न महंगाई यानी इंफ्लेशन को मात देने में सक्षम होना चाहिए। सिर्फ पैसे को सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि समय के साथ महंगाई आपकी रकम की वास्तविक खरीद क्षमता को कम कर सकती है।
फिक्स्ड इनकम के लिए PPF, VPF, बैंक FD और कुछ बॉन्ड आधारित विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। वहीं, पोर्टफोलियो का एक हिस्सा गोल्ड जैसे एसेट में रखना भी डायवर्सिफिकेशन के लिहाज से उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किसी एक तय प्रतिशत को हर निवेशक के लिए सही नहीं माना जा सकता। एसेट एलोकेशन व्यक्ति की उम्र, जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार तय होना चाहिए।
हाई सैलरी से ज्यादा जरूरी है सही वित्तीय अनुशासन
वेल्थ क्रिएशन का मतलब केवल ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप अपनी कमाई का कितना हिस्सा बचाते हैं, उसे कितनी नियमितता से निवेश करते हैं और बढ़ती आय के साथ अपने खर्चों को किस तरह नियंत्रित करते हैं।
इसलिए अगर आपकी सैलरी अभी बहुत ज्यादा नहीं है तो निवेश शुरू करने के लिए भविष्य की बड़ी सैलरी का इंतजार करना जरूरी नहीं है। छोटी रकम से शुरुआत करके उसे नियमित बनाए रखना लंबे समय में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।
हालांकि, निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता, टैक्स स्थिति और निवेश की अवधि को जरूर समझें। बाजार से जुड़े निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती।


